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बाजीराव मस्तानी रिव्यू: शाही अंदाज में पिरोया गया 'रोमांटिक त्रिकोण', मोहब्बत की 'मस्तानी' की अनूठी दास्तां

मुंबई। बॉलीवुड के नामचीन निर्देशक संजय लीला भंसाली सिनेमाई स्कोप पर हर बार कुछ अलग कर गुजरने के लिए जाने जाते हैं। उनका प्रयोग हर बार सिनेमा की नई परिभाषा को गढ़ता और सींचता है। दिल दे चुके सनम, देवदास, ब्लैक और रामलीला में अपने इस सेल्यूलाइड के हुनर को वह साबित कर चुके हैं। फिल्में तो सभी बनाते है लेकिन भंसाली का अंदाज कुछ अलग होता है। साल 2003 में घोषणा के 12 साल बाद आखि‍रकार संजय लीला भंसाली बड़े पर्दे पर अपनी ड्रीम प्रोजेक्ट 'बाजीराव मस्तानी' लेकर आए हैं जो शुक्रवार को रिलीज हो गई है। फिल्म की भव्यता अद्भुत और शानदार है। एक ऐतिहासिक प्रेम त्रिकोण को इतने शानदार ढंग से पिरोना सिर्फ भंसाली जैसे निर्देशक ही कर सकते हैं। फिल्म की कहानी सन् 1700 के कथानक पर आधारित है। फिल्म की भव्यता, ट्रीटमेंट ,सेट और कॉस्टयूम पर भंसाली ने पानी की तरह पैसा बहाया है। रिलीज से पहले इस बात की चर्चा थी कि इस फिल्म को बनाने में 160 करोड़ रुपए लगे है। फिल्म मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव के जीवन पर आधारित है। रणवीर सिंह ने ग्रेट मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव का किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है। बाजीराव एक बेहतरीन योद्धा और ऐसा शासक है, जो अपना साम्राज्य फैलाना चाहता है। प्रियंका चोपड़ा ने बाजीराव की पत्नी यानी काशीबाई का किरदार निभाया है जबकि दीपिका ने बाजीराव की दूसरी पत्नी यानी मस्तानी का रोल प्ले किया है। फिल्म में लव स्टोरी मेन एंगल है। मस्तानी से मुलाकात के बाद बाजीराव यानी रणवीर सिंह उसका दीवाना हो जाता है। वह मस्तानी से शादी कर उसे पुणे ले कर आता है। बाजीराव की जिंदगी में मस्तानी का आना शाही पेशवा परिवार को बिल्कुल पसंद नहीं आता। बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई भी मस्तानी के दखलंदाजी को लेकर परेशान हैं। कहानी में बाजीराव-मस्तानी और काशीबाई को लेकर एक लव ट्राएंगल बनता है। इसी प्रेम त्रिकोण के केंद्र और शाही परिवार में शह-मात का खेल शुरू होता और फिर...। फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले,स्क्रिप्ट और ट्रीटमेंट का जवाब नहीं। भव्य सेट के बीच भंसाली ने अद्भुत अंदाज में ऐतिहासिक गाथा पिरोई है जो देखने लायक है। ऐतिहासिक गाथा में रोमांस के त्रिकोण को पिराना आसान नहीं होता है लेकिन भंसाली ने इसे अपने स्टाइल में कर दिखाया है।फिल्म की शूटिंग राजस्थान, महाराष्ट्र, और गुजरात में हुई है। युद्ध के सीक्वेंस भंसाली ने जबरदस्त मेहनत की है। एक्टर रणवीर सिंह ने बाजीराव के किरदार को शानदार तरीके से निभाया है। उन्होंने मराठी लहजे को लेक काफी मेहनत की है जो कि उनके संवाद अदायगी के दौरान झलकती है। दीपिका पादुकोण ने एक बार फिर साबित किया है वह बॉलीवुड की नंबर वन एक्ट्रेस यूं हीं नहीं कहलाती। अपनी उम्दा एक्टिंग, बेहतरीन डांस और मस्तानी की खूबसूरती को दीपिका ने पर्दे पर जीवंत कर दिया है। प्रियंका चोपड़ा ने भी एक समर्पित पत्नी के किरदार के साथ न्याय किया है। फिल्म के बाकी कलाकारों का भी काम अच्छा है। लेकिन रणवीर इस फिल्म में अपनी अदाकारी की बदौलत छा गए है। इस फिल्म का संगीत पहले ही लोगों की जुबान पर चढ़ चुका है। 'पिंगा', 'मस्तानी', 'गजानना' के साथ ही अरि‍जीत की आवाज में 'आयत' सुनने में कर्णप्रिय लगते हैं। फिल्म में संगीत इसकी जान है लेकिन फिल्म का कम अवधि का होना कई बार खटकता है। फिल्म की कसावट पर यूं तो ध्यान दिया गया है लेकिन कई बार फिल्म की पेस भटकती और तेजी से भागती हुई नजर आती है। अगर आप भंसाली के फैन है, रणबीर, प्रियंका और दीपिका के प्रशंसक है, ऐतिहासिक फिल्म और प्रेम गाथा की फिल्मों को देखने के शौकीन हैं तो आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।
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