ताज़ा ख़बर

ट्रेडिशनल और डिजिटल पीआर में क्या है सबसे बड़ा अंतर?

पीआर, यानी पब्लिक रिलेशन। यूं तो जब पीआर सेक्टर अस्तित्व में आया, तब इसे सिर्फ पीआर के नाम से ही जाना जाता था लेकिन मौजूदा दौर में पीआर को दो अलग अलग सेक्टर्स में बाँट कर देखा जाता है। एक, ट्रेडिशनल पीआर और दूसरा डिजिटल पीआर। मूल रूप से देखें तो ट्रेडिशनल और डिजिटल पीआर, दोनों का मिशन एक ही है। दोनों का मुख्य उद्देश्य ब्रांड अवेयरनेस को बढ़ाते हुए एक पॉजिटिव मैसेज के साथ टारगेट आॅडियंस को जोड़ने में मदद करना है। अब सवाल ये उठता है कि ट्रेडिशनल पीआर और डिजिटल पीआर किस प्रकार काम करते हैं। ट्रेडिशनल पीआर को खास तौर पर प्रिंट मीडिया से जोड़कर देखा जाता है, वहीँ डिजिटल पीआर अपने नाम के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक टूल्स पर आधारित होता है. उत्तर भारत की जानी मानी पीआर संस्था पीआर 24७7 के संस्थापक अतुल मलिकराम बताते हैं, पिछले करीब 15 सालों में पब्लिक रिलेशन कुछ बड़े और महत्वपूर्ण बदलावों के साथ आगे बढ़ा है। मौजूदा समय में डिजिटल मार्केटिंग, आउटरीच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कम्युनिकेशन में आॅनलाइन मीडिया का उपयोग भी काफी हद तक बढ़ा है। लेकिन ट्रेडिशनल और डिजिटल पीआर में जो सबसे बड़ा अंतर है वह यही कि डिजिटल पीआर को एक व्यापक आॅनलाइन मार्केटिंग रणनीति के हिस्से के रूप में देख सकते हैं, वहीं ट्रेडिशनल पीआर अधिक आधारभूत तरीके से पेश किया जा सकता है। डिजिटल पीआर को एसईओ, लीड जनरेशन और इनबाउंड मार्केटिंग सहित आपकी व्यापक आॅनलाइन रणनीति के साथ सोशल रिलेशन को लाइनअप करने के लिए डिजाइन किया गया है। पीआर प्रोफेशनल नेहा गौर के मुताबिक, "ट्रडिशनल पीआर में आपको अपने कंटेंट आउटपुट के साथ ज्यादा सजग और चतुर होना पड़ता है, ताकि आपका कंटेंट पब्लिश होने में कोई दिक्कत न हो। और क्लाइंट सेटिस्फेक्शन के लिए पब्लिश्ड मैटर का बहुत महत्व होता है। हम कह सकते हैं कि ट्रेडिशनल पीआर के अंतर्गत प्रिंटेड मैटेरियल अधिक प्रत्यक्ष होता है। दूसरी ओर डिजिटल पीआर आमतौर पर रिस्पॉन्स और इंगेजमेंट के लिए अधिक गुंजाइश पैदा करता है। सोशल मीडिया साइट्स पर वेबसाइट ब्लॉग और पोस्ट दो अच्छे उदाहरण के तौर पर देखे जाते हैं। इसके माध्यम से टारगेट आॅडियंस के साथ बातचीत के स्तर में वृद्धि की जा सकती है। जानकार बताते हैं कि अच्छी तरह से किया गया डिजिटल पीआर आपके व्यवसाय के पूरे आॅनलाइन प्रोफाइल की परफॉरमेंस में बेहतरीन सुधार लाता है। एसईओ और एडवांस सर्च रैंकिंग दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें विशेष रूप से ट्रेडिशनल पीआर की मदद नहीं ली जा सकती है। डिजिटल पीआर के अंतर्गत सोशल मीडिया के माध्यम से सभी इंगेजमेंट के अवसरों का लाभ उठाया जा सकता है। संक्षेप में कहें तो आप डिजिटल पीआर के साथ ट्रेडिशनल पीआर की तुलना में बहुत अधिक कार्य कर सकते हैं। ट्रेडिशनल पीआर सामान्य प्रेस, मुद्रित प्रकाशन, टीवी और रेडियो जैसे चैनलों पर ध्यान केंद्रित करता है। दूसरी तरफ डिजिटल पीआर में अन्य चैनलों की एक भीड़ उपलब्ध होती है। इनमें वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ब्लॉग, प्रभावित अभियान, आॅनलाइन समाचार और वीडियो पोर्टल शामिल हैं। उपलब्ध चैनलों की तरह, ट्रेडिशनल पीआर और डिजिटल पीआर की तुलना करते समय उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में भी बड़े अंतर होते हैं। डिजिटल पीआर को सही ढंग से करने के लिए, एसईओ सॉफ्टवेयर, मार्केटिंग आॅटोमेशन सर्विसेज, वेबसाइट एनालिसिस (गूगल एनालिटिक्स सहित), सोशल मीडिया सॉल्यूशंस और कई अन्य टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। सही उपकरण के साथ आप डिजिटल पीआर प्रोजेक्ट के हर पहलू को ट्रैक कर सकते हैं।
  • Blogger Comments
  • Facebook Comments

0 comments:

Post a Comment

आपकी प्रतिक्रियाएँ क्रांति की पहल हैं, इसलिए अपनी प्रतिक्रियाएँ ज़रूर व्यक्त करें।

Item Reviewed: ट्रेडिशनल और डिजिटल पीआर में क्या है सबसे बड़ा अंतर? Rating: 5 Reviewed By: newsforall.in