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गुजरात में हिंसा के बाद शांति, कई इलाकों में अब भी कर्फ्यू

अहमदाबाद/नई दिल्ली। गुजरात में पटेल समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद हालात काबू में करने में मदद के लिए बुधवार को सेना बुला ली गयी। हिंसा में आठ लोग मारे जा चुके हैं और राज्य के कई बड़े शहरों और कस्बों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस ने कहा कि पटेल समुदाय की कल हुई बड़ी रैली के बाद भड़की हिंसा में राज्य में आठ लोग मारे जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से शांति बनाये रखने की अपील के बावजूद पटेल समुदाय के सदस्यों ने आगजनी, पथराव किया और सरकारी तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने इस बात से इनकार किया कि उनकी सरकार ने अहमदाबाद की रैली में प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज के आदेश दिए थे, जिसके बाद हिंसक प्रदर्शन हुए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जीएमडीसी मैदान में लाठीचार्ज की घटना के मामले में जांच के आदेश दे दिये हैं। गुजरात के डीसीपी जांच कर रहे हैं। सरकार को रिपोर्ट का इंतजार है। सरकार ने कल लाठीचार्ज के लिए या अत्यधिक बल प्रयोग के लिए कोई आदेश नहीं दिया था।’’ अहमदाबाद, सूरत, मेहसाणा, राजकोट, जामनगर, पालनपुर, उंझा, विसनगर और पाटन शहरों में कफ्र्यू लगा दिया गया है। अहमदाबाद के जिला कलेक्टर राजकुमार बेनीवाल ने कहा, ‘‘पटेल समुदाय के आंदोलन की वजह से हिंसा भड़कने के बाद कानून व्यवस्था को नियंत्रण में करने के लिए अहमदाबाद शहर में सेना की पांच कंपनियां बुलाई गयी हैं।’’ बेनीवाल ने कहा कि शहर के पांच मागोर् पर सेना फ्लैग-मार्च करेगी, जहां बड़ी संख्या में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। अहमदाबाद के अलावा सूरत और मेहसाणा में सेना की दो-दो कंपनियां तैनात की गयी हैं। अर्धसैनिक बलों के भी करीब 5000 जवान गुजरात पहुंच गये हैं। पुलिस ने बताया कि छह लोग पुलिस गोलीबारी में मारे गये, वहीं दो लोग मंगलवार रात से शुरू हुई हिंसा मारे गए हैं। चार मामले अहमदाबाद से, तीन मामले बनासकांठा जिले के गढ़ गांव से और एक मामला महेसाणा कस्बे से आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजराती भाषा में दिए टेलीविजन संदेश में लोगों से शांति की अपील की और इस बात पर जोर दिया कि बातचीत से सभी मुद्दों को सुलझाया जा सकता है। प्रधानमंत्री बनने से पहले 12 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने कहा, ‘‘महात्मा गांधी और सरदार पटेल की धरती पर किस तरह हिंसा का सहारा लिया जा रहा है.... मैं गुजरात के सभी भाइयों और बहनों से अपील करता हूं कि उन्हें हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। केवल एक मंत्र होना चाहिए ‘शांति’.’’ केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज सुबह मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल से बात की और उन्हें हालात से निपटने में केंद्र की ओर से पूरी तरह सहायता का आश्वासन दिया। इस बीच पटेल अनामत आंदोलन समिति के नेता 22 वर्षीय हार्दिक ने हिंसा के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। कल रात प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा भड़काने के आरोपों को खारिज करते हुए हार्दिक ने पुलिस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक तंत्र के इशारे पर आंदोलन को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। पटेल समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी देने वाले हार्दिक पटेल को कल रात हिरासत में लिये जाने के बाद भड़की हिंसा की आग गुजरात के कई हिस्सों में सुलगती रही। हार्दिक द्वारा बंद के आह्वान के बाद आज कई जगहों पर सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त रहा और स्कूल, कॉलेज, व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बैंक और सार्वजनिक परिवहन के साधन भी बंद रहे। पुलिस ने कहा कि आंदोलनकारियों ने राज्य में कम से कम आठ स्थानों पर रेल पटरियों को उखाड़ दिया। एक व्यक्ति अपराह्न में उत्तरी गुजरात के महेसाणा कस्बे के बाहरी क्षेत्र में मोधेरा चौराहे पर पथराव कर रही भीड़ पर गोलीबारी में मारा गया। पुलिस अधिकारी रतन सिंह ने कहा, ‘‘23 राउंड गोली चलाई गयीं. नीलेश पटेल नामक शख्स मारा गया।’’ पुलिस ने कहा कि पालनपुर कस्बे के पास गढ़ गांव में एक थाने में आग लगाने की कोशिश कर रही भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी में तीन लोग मारे गये। बनासकांठा के जिला कलेक्टर दिलीप राणा ने कहा, ‘‘दोपहर करीब एक बजे उग्र भीड़ गढ़ थाने में घुस आई और उसे जलाने का प्रयास किया। स्थानीय पुलिसकर्मियों ने अपने बचाव के लिए कुछ राउंड गोलियां चलाईं जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी। पालनपुर में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए कफ्र्यू लगा दिया गया है।’’ अहमदाबाद की सड़कों पर सेना की गाड़ियां गुजरात के लिए राहत से पहले किसी अपशकुन की आहट की तरह हैं। 2002 के बाद पहली बार अहमदाबाद की सड़कों पर लौटी सेना की ये तस्वीरें बता रही हैं कि 25 अगस्त से लेकर 26 अगस्त की शाम के बीच गुजरात की पुलिस ने इतना कुछ गंवा दिया है कि अब मामला उससे संभलने वाला नहीं है। दिल्ली ने भी सेना और अर्धसैनिक बल भेजने में ज़रा भी देरी नहीं की। एक महीने से गुजरात में रैलियों का सिलसिला चल रहा है मगर स्थिति तभी क्यों नियंत्रण से बाहर गई जब 25 तारीख की रैली में लाखों की संख्या आ गई। एक ऐसे समय में जब पूरे देश में बीजेपी का राजनैतिक नियंत्रण दिख रहा है, गुजरात तो उसके नियंत्रण की बेहतर प्रयोगशाला है, वहां क्यों सब कुछ नियंत्रण से बाहर जाता दिखाई दे रहा है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि हार्दिक पटेल के पीछे कौन है तो इस सवाल का अगर ठोस जवाब होता तो अब तक तो मिल ही गया होता। हार्दिक पटेल कहते हैं कि उनके पीछे कोई नहीं है। उनके पीछे गांवों की गरीबी और पटेलों की बेरोज़गारी है। अटकलों से जवाब मिलना होता तो मिल चुका होता। इसलिए हार्दिक के पीछे कौन है की जगह फिलहाल यह देखने की ज़रूरत है कि हार्दिक के कारण जो गुजरात हमारे सामने है वो क्यों हैं, वो क्या है। मुंबई से सूरत पहुंचे हमारे सहयोगी प्रसाद काथे ने जब जली हुई बसों को गिनना शुरू किया तो एक ही जगह पर 14 बसें जली हुईं मिली। इस पुल के नीचे क्रेन और दूध के टैंकर को फूंक दिया गया। प्रसाद काथे जब शूट कर रहे थे तब भी कुछ वाहनों से धुआं निकल ही रहा था। रात को सहमे लोग इन जली हुई बसों के साथ सेल्फी लेने आ चुके थे। सूरत के कपोदरा, सरसाना थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा रहा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भागा भागी चलती रही। इसी सूरत में कुछ दिन पहले पटेल युवाओं की रैली में लाखों लोग आए तब तो कोई हिंसा नहीं हुई थी। सूरत में पटेलों की आबादी दस लाख बताई जाती है। यहां के पटेल बहुल इलाकों में लड़के सड़कों पर निकल आए। बसों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाने लगे। ज्वाइंट कमिश्नर और दो सिपाहियों को भी चोट आई। सूरत के स्कूल बुधवार को भी बंद रहे, गुरुवार को भी बंद रहेंगे।
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