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पढ़ें पूरा मामला, अमित शाह के पुत्र जय शाह की बढ़ी अकूत संपत्ति पर छिड़ा सियासी संग्राम


ये भी पढ़ेः जानें, कौन है देश के सबसे ताकतवर नेता का बेटा जय शाह, बचाव में आई केंद्र सरकार, कांग्रेस ने कहा ‘प्रधान सेवक’ कराएं जांच, जय शाह वेबसाइट पर करेंगे 100 करोड़ की मानहानि का केस, 'पता चल गया आख़िर कहां छिपा बैठा है विकास', जय शाह को जिस कंपनी ने दिए 15.78 करोड़ रुपए का लोन, उसकी सालाना आय है केवल सात करोड़ रुपए
नई दिल्ली। वेबसाइट द वायर ने एक खबर में बताया है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी का कारोबार तब से बेतहाशा बढ़ा है जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार सत्ता में आई है। “ऐसा लगता है कि 2014 में केंद्र सरकार बदलने के साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की किस्मत भी बदल गई है।” यह आरोप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने लगाया है। कपिल सिब्बल ने वेबसाइट में छपी खबर के संदर्भ में यह बात कही। खबर में बीजेपी अध्यक्ष के बेटे जय शाह की कंपनी का टर्नओवर महज तीन साल में 16000 गुना बढ़ गया है। वहीं केंद्र सरकार ने इस खबर को भ्रामक बताते हुए वेबसाइट, उसके संपादक और खबर लिखने वाले पत्रकार पर 100 करोड़ रुपए का आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करने का ऐलान किया है। इस बीच बीजेपी अध्यक्ष के बेटे जय शाह ने भी सफाई दी है और कहा है कि उनकी कंपनी का सारा कारोबार कानून के मुताबिक है और उन्होंने किसी से कोई भी नाजायज़ फायदा नहीं लिया है। वेबसाइट पर प्रकाशित खबर को लेकर राजनीतिक बयानबाजियों और आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही धमकी और चेतावनियों का दौर शुरु हो गया है और कहा जा रहा है कि ये चंपू पूंजीवाद यानी क्रोनी कैपिटलिज्म का क्लासिक केस है। खबर में कंपनी की तरफ से सरकारी विभाग में जमा दस्तावेज के हवाले से बताया गया है कि इस बढ़े हुए मुनाफे के पीछे जय शाह की कंपनी को मिला अन-सिक्योर लोन है, जो एक राज्यसभा सांसद के रिश्तेदार की कंपनी ने दिया था। खबर सामने आने के बाद कांग्रेस नेता कबिल सिब्बल ने कहा कि ऐसा लगता है कि 2014 में सरकार बदलने के साथ अमित शाह के बेटे की किस्मत भी बदल गई है। कबिल सिब्बल का कहना था कि अमित शाह के बेटे की कंपनी टेम्पल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड मार्च 2013 में घाटे में थी और ये घाटा 6,239 रुपये था। मांर्च 2014 में भी कंपनी घाटे में रही और घाटा था 1,724 रुपये। लेकिन 2014-15 में ये कंपनी मुनाफे में आ गई। यानि मई 2014 में कुछ बदलाव हुआ और मुनाफे का कारवां चल पड़ा। मुनाफा था 18,728 रुपये और कंपनी का कुल राजस्व था सिर्फ 50,000 रुपये। असल बदलाव 2015-16 में हुआ, जब कंपनी का टर्नओवर 80 करोड़ हो गया। एक साल में टर्नओवर में ये बढ़ोतरी 16,000 गुना रही। इसके साथ ही कपिल सिब्बल ने अमित शाह के बेटे की दूसरी कंपनी कुसुम फिनसर्व को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। इस कंपनी में जय अमितभाई शाह का शेयर 60 फीसदी है। कपिल सिब्बल का कहना था, “गड़बड़ी हुई है या नहीं ये तो जांच से पता चलेगा, हम जांच की मांग कर रहे हैं। क्या पीएम जांच करवाएंगे? मैं पीएम से ये जानना चाहता हूँ कि क्या अब आप सीबीआई को जांच सौपेंगे? जिसके नाम में जय अमित शाह लगा हो उसे कौन गिरफ्तार करेगा?” दूसरी तरफ यह खबर सामने आने के बाद जय शाह के बचाव में केंद्र सरकार उतरी। बीजेपी नेता और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी को लेकर वेबसाइट की रिपोर्ट को गढ़ी हुई स्टोरी करार देते हुए कहा कि इसके जरिए अमित शाह की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है। पीयूष गोयल ने कहा कि वेबसाइट, वेबसाइट के संपादक और रिपोर्टर के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा। जय शाह पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने कहा, “ये झूठ और पूरी तरह से आधारहीन और दुर्भावनपूर्ण भाव से किए गए अपमानजनक आरोप हैं। हम इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन करते हैं, नकारते हैं।” आरोपों को झूठ करार देने के साथ ही पीयूष गोयल ने कहा, “जय शाह कानून का पालन करने वाले बिजनेसमैन हैं। उन्हें बैंक से लोन नहीं मिला, इसलिए अनसिक्योर्ड लोन लिया गया, जो लोन लिया, उसे ब्याज सहित TDS काटकर चुकाया है।” उन्होंने कहा कि जय शाह की कंपनी में ट्रांजेक्शन के सारे हिसाब किताब कानून के मुताबिक किए जाते हैं, उनमें टैक्स भरे जाते हैं। वेबसाइट की तरफ से ग़लत आंकड़े देकर झूठ फैलाने की कोशिश की गई है।” रेल मंत्री ने कहा कि इस खबर को सनसनी बनाने की कोशिश की गई है। उनका कहना था कि कॉमोडिटी मार्केट में नई कंपनी का टर्नओवर बढ़ना कोई बड़ी बात नहीं है। 16 हज़ार गुना क्या 16 लाख गुना भी बढ़ सकता है। उनका कहना था कि भले ही 2015-16 में कंपनी का टर्नओवर 80 करोड़ रुपये था, लेकिन कंपनी को 1.5 करोड़ घाटा हुआ। पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेश खांडवाला और अमित शाह के पारिवारिक संबंधों पर भी सफाई दी। इससे पहले इस खबर के सामने आने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चुटकी ली और सीधे अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि, “आखिर पता चल गया है कि नोटबंदी का फायदा किसको हुआ। न आरबीआई, न गरीब, न किसान. It’s the Shah-in-Shah of Demo. Jai Amit.” सियासी गलियारों में इस खबर की चर्चा और केंद्र सरकार के उनके बचाव में उतरने के बाद अमित शाह के बेटे जय शाह ने भी अपनी तरफ से सफाई दी है और खुद को पाक साफ बताया है। उन्होंने कहा, “आज एक लेख ‘The Golden Touch of Jay Amit Shah’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया, जिसमें झूठ दिखाने की कोशिश की गई है, मेरी प्रतिष्ठा को नीचा दिखाने की कोशिश की गई है, लोगों के मन में ऐसी छवि बनाने की कोशिश की गई है कि मेरे व्यवसाय में मेरी सफलता मेरे पिता की राजनीतिक हैसियत से मिली है। मेरा व्यवसाय पूरी तरह से कानून का पालन करता है। जो मेरे टैक्स रिकार्ड और बैंक ट्रांजेक्शन से पता चलता है। किसी कॉपरेटिव बैंक से लोन नियम कानून के हिसाब से लिए गए.” जय शाह ने आगे कहा, “मैंने लोन पर ब्याज पूरे तय समय के अंदर चेक से लौटाए हैं। मैंने लोन लेने के लिए अपने परिवार की संपत्ति को गिरवी रखा। मेरे वकील ने सारे ट्रांजेक्शन की जानकारी पत्रकारों को दे दी है। मेरे पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है।” इस दौरान दूसरे सियासी दलों ने भी इस मामले की जांच करने की मांग के साथ ही सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी खबर को तथाकथित बड़े न्यूज चैनल और अखबार क्यों नहीं उठा रहे हैं। साभार नवजीवन  
जय शाह करेंगे 100 करोड़ की मानहानि का केस 
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह ने एक वेबसाइट पर 100 करोड़ की मानहानि का केस करने का फैसला लिया है। वेबसाइट ने जय शाह के स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा कथित अनियमितताओं के संकेत दिए थे। इसके बाद सत्तारूढ़ दल और कांग्रेस के बीच तीखा वाकयुद्ध देखने को मिला। बाद में दोनों पार्टियों की इस जुबानी जंग में AAP सहित अन्य पार्टियां भी शामिल हो गईं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज जानकारियों का हवाला देते हुए साइट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि टेंपल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें जय शाह डायरेक्टर हैं, का टर्नओवर 2014-14 की तुलना में 2015-16 में 16000 गुना बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 में कंपनी का टर्नओवर 15000 रुपये था जो 2015-16 में बढ़कर 80.5 करोड़ हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने राज्य सभा सांसद परिमल नाथवाणी के रिश्तेदार राजेश खंडवाल से 15.78 करोड़ का लोन भी हासिल किया। परिमल नाथवाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज में सीनियर एग्जिक्युटिव भी हैं। जय शाह ने बयान जारी कर किसी भी प्रकार की अनियमितिता के आरोप का खंडन किया है। जय शाह ने बयान में लेख को झूठा, अपमानजनक और उनकी बदनामी की कोशिश करने वाला बताया है। जय ने कहा कि यह लेख लोगों के मन में यह धारणा बनाना चाहता है कि मेरे पिता अमितभाई शाह की राजनीतिक हैसियत की वजह से मेरी कंपनी को सफलता मिली है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि ऐसा लगता है कि सत्ता बदलने के बाद कुछ लोगों का भाग्य भी बदल गया है। सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'आज हम प्रधानमंत्री, प्रधान सेवक से एक सवाल पूछते हैं। अब आपका इस घोर पूंजीवाद पर क्या कहना है? क्या आप सीबीआई को इस मामले की जांच का आदेश देंगे? क्या आप ईडी से इन लोगों को गिरफ्तार करने को कहेंगे? क्योंकि विपक्ष से जुड़े मामलों में ईडी नोटिस देने और गिरफ्तारी करने में काफी तेजी दिखाती है। अगर किसी का नाम जय, अमित और शाह तो उन्हें कौन गिरफ्तार कर सकता है। मैं आपको विश्वासपूर्वक बता सकता हूं कि प्रधानमंत्री खामोश रहेंगे।' मोदी पर हमला करते हुए सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया कि 'मोदी के नेतृत्व में करप्शन का एक नया मामला। बिरला-सहारा डायरी, GSPCL, व्यापम, ललित मोदी, चावल और खनन घोटाला। पीएम क्यों चुप हैं?' येचुरी ने कहा कि एलके आडवाणी ने जैन हवाला डायरी एपिसोड के बाद इस्तीफा दिया था। भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद बंगारू लक्ष्मण ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ा था। येचुरी ने पूछा कि क्या अब ऐसा मोदी सरकार में होगा। सीपीआई के नेता डी राजा ने इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय SIT से कराने की मांग की है। वहीं AAP ने आरोपों के संबंध में आपराधिक जांच की मांग की है। साभार एनबीटी
जानें, कौन है देश के सबसे ताकतवर नेता का बेटा जय शाह? 
प्रशांत दयाल बीबीसी गुजराती के लिए लिखते हैं कि वह साल 2010 की बात है, 20 साल का एक युवा लड़का देश के जाने माने वकील राम जेठ मलानी के साथ गुजरात हाई कोर्ट आया करता था. कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वह वकीलों के पीछे वाली दूसरी कतार में बैठा रहता. कोर्ट की बहस में एक तरफ जहां राम जेठमलानी मुद्दे से जुड़े अपने तर्क पेश करते, वहीं दूसरी तरफ से केटीएस तुलसी उन तर्कों को काटने की कोशिश करते. वह लड़का वकीलों की दलीलों की बजाय जज के चेहरे पर चढ़ते-उतरते भावों को समझने की कोशिश किया करता. कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करता रहता. 2010 तक शायद ही कोई इस लड़के को जानता था, इस लड़के का नाम था जय शाह- बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह का इकलौता बेटा. साल 2010 में ही सीबीआई ने अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में गिरफ़्तार किया था. उस वक्त जय शाह अपने पिता की जमानत के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रहे थे. यही वो वक्त था जब वे पहली बार मीडिया और जनता की नज़रों में आए. गुजरात हाईकोर्ट ने अमित शाह को जमानत दे दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके गुजरात में प्रवेश करने पर रोक लगा दी, इसके बाद अमित शाह दिल्ली रवाना हो गए. उस समय अमित शाह नारनपुरा से गुजरात विधानसभा के सदस्य थे. लेकिन उनके दिल्ली चले जाने के बाद उनकी विधानसभा में लोगों की समस्याएं सुनने की जिम्मेदारी जय ने उठाई. इसके साथ ही उनपर अपने पिता के शेयर मार्केट से जुड़े बिजनेस को संभालने की जिम्मेदारी भी आ गई. जो लोग जय को करीब से जानते हैं और जिन्होंने जय को अपने पिता का व्यापार संभालते देखा है, वे इस युवा लड़के में आए बदलावों को भी अच्छे से पहचानते हैं. अपने पिता के नक्शे-कदम पर चलते हुए जय गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन यानी जीसीए के साथ जुड़ गए. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन का पद खाली हो गया था, जिसे अमित शाह ने संभाला. अमित शाह के बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन की लगभग पूरी जिम्मेदारी जय के हाथों में सौंप दी, उन्होंने जय को जीसीए का संयुक्त सचिव नियुक्त कर दिया. गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अधिकारी हितेश पटेल ने बीबीसी न्यूज़ गुजराती को बताया कि अमित शाह और जय शाह की आपस में तुलना नहीं की जा सकती. जय हमेशा ही लो-प्रोफाइल रहना ही पसंद करते हैं. पटेल बताते हैं कि जय की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे जीसीए प्रशासन की रोज होने वाली गतिविधियों के लिए समय नहीं निकाल पाते, साथ ही उनके अंदर अपने पिता के जैसी समझ भी नहीं है. जय ने निरमा इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. तीन साल पहले उन्होंने अपनी क्लासमेट रुशिता पटेल के साथ शादी की थी. पिता और पुत्र में यह खास गुण है कि वे अपनी निजी ज़िंदगी को कभी भी सार्वजनिक नहीं होने देते. अमित शाह के करीबी दोस्त कमलेश त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया, ''अमित शाह ने शुरुआत से ही इस बात का ख्याल रखा कि उनके बेटे पर अपने पिता के रुतबे का असर न दिखे.'' त्रिपाठी कहते हैं कि जय के स्वभाव में कोई भी इस बात का घमंड नहीं पाएगा कि उनके पिता देश के इतने बड़े नेता हैं. एक और समानता जो जय और अमित शाह में देखने को मिलती है, वह यह है कि दोनों ही भव्यता और दिखावे में विश्वास नहीं रखते. वे किसी को भी अपने परिवार और निजी दोस्तों की मंडली में आसानी से जगह बनाने नहीं देते. जैसे कि जब जय की बेटी का जन्म हुआ तो उस कार्यक्रम में बहुत कम रिश्तेदारों और दोस्तों को बुलाया गया. बताया जाता है कि अमित शाह ने जय को साफतौर पर यह निर्देश दिए हैं कि वे राज्य व केंद्र सरकार के अधिकारियों से किसी भी मुद्दे पर सीधे बात नहीं करेंगे. जय एक साधारण जीवन जीने वाले व्यक्ति लगते हैं, उन्हें महंगे होटलों में डिनर करते या महंगे कपड़े पहने कभी नहीं देखा गया. जय का बस एक लक्ष्य है अपने व्यापार को आगे बढ़ाना और ज़्यादा से ज़्यादा पैसा बनाना. कई बार उन्हें क्रिकेट स्टेडियम में मैच देखते हुए फोन पर ही शेयर खरीदते व बेचते देखा गया है. साभार बीबीसी
'पता चल गया आख़िर कहां छिपा बैठा है विकास' 
न्यूज़ वेबसाइट 'द वायर' की ख़बर में दावा किया गया कि भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह की कंपनी का टर्न-ओवर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और उनके पिता के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बेतहाशा बढ़ा है. ये ख़बर सोशल मीडिया में बहुत तेज़ी से फैली और ट्विटर और फ़ेसबुक पर टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गई. ख़बर को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने ट्वीट करके सवाल किया कि प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं. उन्होंने लिखा, ''अब ये भ्रष्टाचार आख़िरकार पीएम मोदी के कथित रडार पर क्यों नहीं है.'' येचुरी ने रोज़गार के मुद्दे पर भी बीजेपी सरकार को घेरा. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, ''जय का 'विकास'! शायद ये वही विकास है जिसके बारे में बीजेपी लंबे समय से बात कर रही थी.'' महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिव शहज़ाद पूनावाला ने लिखा, ''अमित शाह के बेटे की फ़र्म की कमाई एक साल में 50 हज़ार से बढ़कर 80 करोड़ रुपये हो गई. हैरानी की बात नहीं है, मोदी जी मानते हैं कि अर्थव्यवस्था अच्छा काम कर रही है.'' ट्विटर हैंडल @freespeechin से सवाल पूछा गया है कि आख़िर 16000 के आंकड़े का आधार क्या है? क्या आपको लोन के बारे में कुछ भी पता है? असित आर पाणिग्रही लिखते हैं कि आप कार्ति चिदंबरम और रॉबर्ट वाड्रा के समय पर कहां थे. @AiyoSaar नाम के हैंडल ने लिखा, ''भक्त अमित शाह की लूट को एक्सेस नहीं है बताकर इसे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. वे क्या सोचते हैं? ये इंटरनेट है.'' @ishar_adv नाम के हैंडल ने लिखा, ''बीजेपी ने अपना स्लोगन बदल लिया है. विकास की जय के बजाय जय का विकास. कोई ज्यादा अंतर नहीं है. अब हमें समझ आया कि आख़िर विकास कहां छिपा बैठा है.'' फ़ेसबुक पर एक यूजर ने लिखा कि अगर मंदी होती तो शाह के बेटे की संपत्ति इतनी कैसे बढ़ जाती. साभार बीबीसी  
जय शाह को जिस कंपनी ने दिए 15.78 करोड़ रुपए का लोन, उसकी सालाना आय है मात्र 07 करोड़ रुपए! 
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी विवादों में है। उनकी कंपनी टेम्पल इन्टरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का टर्नओवर साल 2015-16 में 16 हजार गुना बढ़ा है। यह बढ़ोत्तरी तब हुई जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी और उनके पिता अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। इससे पहले टेम्पल इन्टरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का टर्नओवर न के बराबर था। ‘द वायर’ के मुताबिक जय की कंपनी के टर्नओवर में उछाल की वजह 15.78 करोड़ रुपये का अनसेक्योर्ड लोन है जिसे राजेश खंडवाल की KIFS फिनांशियल सर्विसेज फर्म ने उपलब्ध कराया है लेकिन हैरत की बात ये है कि लोन देनेवाली KIFS फिनांशियल सर्विसेज ने जिस साल जय की कंपनी को लोन दिया उस साल उसकी कुल आय ही 7 करोड़ रुपये थी। दूसरी बड़ी बात आरओसी के दस्तावेज से यह सामने आई है कि KIFS फिनांशियल सर्विसेज की एनुअल रिपोर्ट में टेम्पल इन्टरप्राइजेज को दिए गए 15.78 रुपये के अनसेक्योर्ड लोन का कोई जिक्र नहीं है। बता दें कि राजेश खंडवाल भाजपा के राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज के टॉप एग्जिक्यूटिव परिमल नथवानी के समधी हैं। जय की कंपनी की बैलेंस शीट में बताया गया है कि मार्च 2013 और मार्च 2014 तक उनकी कंपनी में कुछ खास कामकाज नहीं हुए और इस दौरान कंपनी को क्रमश: कुल 6,230 रुपये और 1,724 रुपये का घाटा हुआ लेकिन जैसे ही केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी और उनके पिता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जय शाह की कंपनी के टर्नओवर में आश्चर्यजनक रूप से इजाफा हुआ है। साल 2014-15 के दौरान उनकी कंपनी को कुल 50,000 रुपये की इनकम पर कुल 18,728 रुपये का लाभ हुआ। मगर 2015-16 के वित्त वर्ष के दौरान जय की कंपनी का टर्नओवर लंबी छलांग लगाते हुए 80.5 करोड़ रुपये का हो गया। यह 2014-15 के मुकाबले 16 हजार गुना ज्यादा है। जय शाह के वकील ने द वायर को बताया है कि राजेश खंडवाल शाह परिवार के पुराने मित्र हैं। इसके अलावा वो पिछले कई सालों से शाह परिवार के शेयर ब्रोकिंग का कामकाज देख रहे हैं। इसके अलावा उनकी एनबीएफसी फर्म पिछले कई सालों से जय शाह और जीतेंद्र शाह के बिजनेस को लोन देते रहे हैं। दस्तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि साल 2015 में राजेश खंडवाल और जय शाह ने मिलकर सत्वा ट्रेडलिंक नाम का लिमिटेड लायबलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) बनाया था लेकिन जल्द ही उसे बंद कर दिया गया। जय शाह की तरफ से उनके वकील ने द वायर को बताया कि दोनों ने मिलकर एलएलपी खोला था लेकिन बाजार में विपरीत परिस्थितियों की वजह से उसमें कोई कारोबार नहीं हो सका। इसके बाद उसे बंद कर दिया गया और आरओसी के रिकॉर्ड से भी हटवा दिया गया। आरओसी के दस्तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि जय की कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसकी आय का 95 फीसदी कृषि उत्पादों की बिक्री से आया है, जबकि उनकी कंपनी का न तो कोई स्टॉक की डिटेल है और न ही इन्वेंटरीज। इसके अलावा उनकी कंपनी की कोई चल-अचल संपत्ति का भी कोई विवरण नहीं है। साभार जनसत्ता
राजीव रंजन तिवारी (संपर्कः 8922002003)
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