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नम आंखों से लेफ़्टिनेंट कर्नल निरंजन की विदाई

बेंगलुरू (इमरान क़ुरैशी)। एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल ईके निरंजन को बेंगलुरु में सोमवार को श्रद्धांजलि देने के लिए हज़ारों की संख्या में पहुंचे लोगों के चेहरे पर गर्व का भाव था. लंबी-लंबी कतारों में खड़े लोगों के दोनों हाथ नमस्ते की अवस्था में जुड़े हुए थे और उनकी आंखें नम थीं.पठानकोट हमले के दौरान रविवार को एक बम निष्क्रिय करते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल ईके निरंजन की मौत हुई थी. जिस भरत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के मैदान पर उनका बचपन बीता था वहीं पर सोमवार को उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा हुआ था. सभी का एक ही कहना था कि, "वो उनके त्याग पर गर्व महसूस कर रहे हैं." निरंजन को दो साल पहले उनकी कोर रेजीमेंट मद्रास इंजीनियर्स ग्रुप (एमईजी) से एनएसजी में शामिल किया गया था जिस पर वो बहुत ज़्यादा ख़ुश थे. इस बारे में उनके छोटे भाई ईके शशांकन कहते हैं, "उन्हें इस बात की बहुत ख़ुशी थी कि एनएसजी के लिए उनको चयनित किया गया है." रूंधे हुए गले और डबडबाती आंखों से शशांकन कहते हैं, "उसने हमें गौरवान्वित किया है. वो राष्ट्र के लिए एक महान संतान की तरह हैं और शायद सभी के मन में इस वक़्त यही भाव है." आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां पहुंचे 10 हज़ार लोगों में से बीईएल द्वारा चलाए जा रहे स्कूल के कक्षा आठ के छात्र दर्शन वहां अपने दोस्तों के साथ आए हुए थे. उन्होंने कहा, "उन्होंने हमारे लिए अपनी जान दे दी, इसीलिए हम यहां आए हैं." वहां उनकी एक स्कूल की बैचमेट अनीता भी थीं. उन्होंने कहा, "हम स्कूल के रियूनियन में मिले थे. वो एक बड़े दिलवाला एक अच्छा इंसान था." लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन बीईएल कॉलेज में 1997-98 के बीच थे. उसी कॉलेज की भौतिक विज्ञान की शिक्षिका फ़ातिमा भी यहां आईं हुईं थीं. उन्होंने बताया, "निरंजन एक बहुत ही होनहार और आज्ञाकारी छात्र था. इस ख़बर से हमारे स्कूल और कॉलेज में सभी को सदमा लगा है." वहां पहुंचे लोगों के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन की मौत देश को हुई क्षति थी. लेकिन उनके छोटे भाई शशांकन ने कहा कि उन्होंने एक दोस्त खोया है. वो कहते हैं, "मेरे साथ उसका रिश्ता एक बड़े भाई जैसा नहीं बल्कि एक दोस्त का था. हम लड़ते थे, मज़ाक करते थे. वो बहुत ही ज़िंदादिल था." उन्होंने कहा, "हम उससे कहा करते थे कि तुम इतने सुंदर और दिखने में अच्छे हो, अगर तुम सेना में नहीं होते तो फ़िल्मों में होते. लेकिन आख़िरी समय में उसकी ऐसी हालत देखना बहुत दर्दनाक है." (साभार बीबीसी हिंदी डॉट कॉम)
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