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केदारनाथ से सुरक्षित निकाले गए सभी फंसे यात्री

देहरादून। उत्तराखंड में पहली बार आधिकारिक तौर पर कुदरत के कहर में 5000 लोगों के मारे जान की संभावना जताई गई है। वहीं बचाव दल की कड़ी मशक्कत के बाद केदारनाथ में फंसे सभी लोगों को निकाल लिया गया है। केदारनाथ के बाद अब गौरीकुंड, हर्षिल आदि जगहों पर हवाई राहत पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। जहां अभी भी कई लोग फंसे हैं। उत्तराखंड में घुमड़ते बादलों ने रेस्क्यू अभियान पर असर डालना शुरू कर दिया है। खराब मौसम के कारण रुद्रप्रयाग और जोशीमठ से लोगों को हेलिकॉप्टरों से निकालने का काम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। मौसम के तेवर और तीखे होने की आशंका है, ऐसे में रेस्क्यू मिशन की स्ट्रैटिजी थोड़ी बदल दी गई है। अब पैदल रास्ते और पुलों को बनाने का काम तेज कर दिया गया है ताकि खराब मौसम के कारण अगर हेलिकॉप्टर उड़ न पाएं, तब भी लोगों को सड़क के रास्ते सुरक्षित जगहों तक लाया जा सके। तबाही के शिकार लोगों को सुरक्षित निकालने में कितना वक्त लग सकता है, कोई भी अथॉरिटी इसका सही जवाब नहीं दे पा रही है। वहीं, उत्तराखंड के सीएम विजय बहुगुणा का कहना था कि सभी बाढ़ पीडि़तों को निकालने में 15 दिन से ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और हेलिकॉप्टरों की अपनी लिमिट है। हालांकि यह एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर से अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान है। वायुसेना के ही करीब 30 हेलिकॉप्टर दिन-रात उड़ान भर रहे हैं। उत्तराखंड में आई 'हिमालयन सूनामी' ने पहाड़ों में टूरिजम का कारोबार भी चौपट कर दिया है। बहुत से पर्यटकों ने मसूरी, नैनीताल जैसे तमाम शहरों में घूमने का प्रोग्राम ही कैंसल कर दिया है। राज्य में टूरिजम 20-30 पर्सेट कम होने की आशंका है। भारी मात्रा में बुकिंग कैंसल होने से टूर एंड ट्रैवल एजेंसियां भी परेशान हो गई हैं।
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