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गुजरात में बीजेपी का संकट गहराया, केंद्रीय नेतृत्व ने की सीएम से बात, नितिन पटेल समर्थकों का बंद का ऐलान

यह भी पढ़ेः हार्दिक ने नितिन पटेल को दिया ऑफर, 10 विधायकों को लेकर छोड़ दें पार्टी, कांग्रेस से बात कर दिलाएंगे अच्छा पद, गुजरात में नितिन पटेल की नाराज़गी बीजेपी को पड़ेगी भारी? 
नई दिल्ली। गुजरात बीजेपी में शुरु हुए घमासान से केंद्रीय नेतृत्व परेशान है। उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल के बगावती तेवरों और मनमाफिक मंत्रालय न मिलने की नाराजगी खुलकर जाहिर करने के बाद बीजेपी के बड़े नेता माथा-पच्ची करने में जुटे हुए हैं। सुत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से बात की है, और इस संकट को अपने स्तर पर सुलझाने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी इस मामले पर बयान देना चाहते थे, लेकिन उन्हें पार्टी अध्यक्ष ने फिलहाल इस पर चुप रहने को कहा है। कहा जा रहा है कि बीजेपी के गुजरात राज्य प्रभारी भूपेंद्र यादव छुट्टी पर बाहर गए हैं, और उनके आने से पहले केंद्रीय नेतृत्व इस पूरे मुद्दे पर कोई पहल नहीं करना चाहता। हालांकि माना जा रहा है कि यह तात्कालिक और अस्थाई संकट है, जिसे आसानी से खत्म कर दिया जाएगा। बीजेपी अध्यक्ष के कुछ करीबी सूत्रों का कहना है कि नितिन पटेल को शहरी विकास मंत्रालय की पेशकश की जा सकती है, लेकिन वित्त मंत्रालय उन्हें नहीं दिया जाएगा। इस बीच नितिन पटेल ने गुजरात संदेश से बातचीत में कहा है कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन फैसला हाईकमान को करना है। उधर पाटीदार आंदोलन में सरदार पटेल गुट के नेता लालजी भाई पटेल ने एक नई मांग सामने रख दी है। लालजी भाई ने नितिन पटेल को सीधे मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई है। लालजी भाई पटेल ने शनिवार को नितिन पटेल से उनके निवास पर मुलाकात की। बाद में उन्होंने नितिन पटेल की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि नितिन पटेल एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। गुजराती समाचार चैनल टीवी9 गुजराती के मुताबिक लालजी भाई ने बीजेपी नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी आलाकमान नितिन पटेल के साथ नाइंसाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। अपनी मांग को मजबूती देने के लिए उन्होंने सोमवार को बंद का भी आव्हान किया है। इससे पहले पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को खुली पेशकश करते हुए कहा था कि अगर नितिन पटेल अपने साथ 10 विधायकों को लेकर बीजेपी छोड़ दें तो वे उन्हें कांग्रेस में अहम पद दिलवा सकते हैं।  
हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को दिया ऑफर, 10 विधायकों को लेकर छोड़ दें पार्टी, कांग्रेस से बात कर दिलाएंगे अच्छा पद
ऐसा लग रहा है कि गुजरात में बीजेपी की सरकार बनने के बाद ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कैबिनेट में दरार पड़ गई है। खबर आ रही है कि वित्त मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय नहीं मिलने से नाराज राज्य के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने इस्तीफा देने की धमकी दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हार्दिक पटेल ने कहा है कि अगर बीजेपी गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल का सम्मान नहीं करती तो उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए। हार्दिक ने यह भी कहा कि अगर नितिन पटेल अपने 10 विधायकों के साथ बीजेपी छोड़ने के लिए तैयार हैं तो वह कांग्रेस से उन्हें अच्छा पद देने की बात करेंगे। गुजरात कैबिनेट के कई मंत्री अपना कार्यभार संभाल चुके हैं, लेकिन नितिन पटेल ने अभी तक अपना कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इतना ही नहीं, नितिन पटेल ने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है और वे अपनी निजी गाड़ी से आ-जा रहे हैं। साभार नवजीवन
गुजरात में नितिन पटेल की नाराज़गी बीजेपी को पड़ेगी भारी?
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की नवगठित सरकार में अंदरूनी मतभेदों की ख़बर है. उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने अभी तक अपना कार्यभार नहीं संभाला है. कहा जा रहा है कि नितिन पटेल मंत्रालयों के बंटवारे से ख़ुश नहीं हैं और वो वित्त मंत्रालय नहीं मिलने से भी नाराज़ हैं. राज्य की पिछली सरकार में पटेल के पास वित्त और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे लेकिन इस बार उन्हें सड़क एवं भवन और स्वास्थ्य जैसे विभाग आवंटित किए गए हैं. गुजरात में बीजेपी सरकार के गठन के बाद गत 28 दिसंबर को विभागों के बंटवारे में पटेल को इन दो विभागों के अलावा चिकित्सा शिक्षा, नर्मदा, कल्पसर और राजधानी परियोजना का प्रभार भी दिया गया है. नितिन पटेल की नाराज़गी की इन ख़बरों के बीच पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को बातों ही बातों में न्यौता दे दिया है कि वे अपने समर्थक विधायकों के साथ हमारे साथ या फिर प्रतिपक्ष के साथ जुड़ सकते हैं. नितिन पटेल अब क्या करेंगे और नवगठित सरकार पर कोई संकट है कि नहीं इन सब बातों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषक अजय उमट का कहना है, ''उत्तर गुजरात के पाटीदार नेता उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल से निजी मुलाक़ात कर अपना समर्थन दे रहे हैं, एक तरह से यह शक्ति प्रदर्शन ही है.'' ''हालांकि वे विद्रोह करके हार्दिक पटेल से जुड़ जाएं ऐसी संभावनाएं बहुत कम हैं.'' अजय उमट आगे कहते हैं, ''इन सब घटनाओं से भाजपा सरकार किसी तरह के संकट में है या वह किसी संकट का सामना कर रही है ऐसा फिलहाल नहीं लगता, लेकिन पार्टी को एक शर्मनाक स्थिति का सामना ज़रूर करना पड़ रहा है.'' राजनीतिक विश्लेषक हरि देसाई मानते हैं, ''नितिन पटेल इस बार मुश्किल से 7000 की बढ़त से अपनी सीट बचा पाए थे, इसके लिए भी उन्हें चौधरी पटेलों का समर्थन लेना पड़ा था.'' देसाई कहते हैं, ''वर्तमान हालात में शांति से बैठकर राजनीतिक कार्यभार संभालने के अलावा और नितिन पटेल के पास और कोई विकल्प नहीं है.'' ''हार्दिक पटेल ने नितिन पटेल को कोई बड़ी उम्मीद नहीं दी है. कांग्रेस भी अपना संगठन ज़्यादा मजबूत करने में लगी है. नितिन पटेल कोई शंकर सिंह वाघेला नहीं है जो बहुत बड़ा विरोध कर सकें.'' अजय उमट का मानना है कि वर्तमान स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गुजरात के बारे में कोई बड़ा कदम उठाए ऐसी संभावनाएं कम ही हैं. संघ सिर्फ नीति निर्धारित सूचनाएं देता है और पार्टी का मार्गदर्शन करता है, रोजमर्रा के काम में वह दखलअंदाजी नही करते. हरि देसाई का मानना है कि संघ ने इस चुनाव में कोई भूमिका न निभाई होती तो शायद ही भाजपा इस बार गुजरात चुनाव जीत पाती. आज के दौर में संघ ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगा जो मोदी को पसंद न हो. एक जमाने में संघ के करीबी रहे लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और नितिन गडकरी के आज क्या हाल हैं वो हम अच्छी तरह जानते हैं. इन सब घटनाक्रम के लिए भाजपा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया जो विफल रहा. वहीं गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा, ''ये भाजपा का अंदरूनी मामला है, फिर भी पार्टी वर्तमान स्थिति पर नज़र रखे हुए है''. उन्होंने कहा, ''पाटीदार नेताओं की राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर चुनाव जीतना और बाद में उन्हें अपमानजनक स्थिति में डालना भाजपा की नीति-नियती रही है. केशुभाई पटेल, डॉक्टर ए के पटेल, डॉक्टर वल्लभ कथेरिया और आनंदीबेन पटेल के बाद अब नितिन पटेल की बारी आई है.'' कहा तो ये भी जा रहा है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उन्हें बातचीत की मेज पर लाने की कोशिशें कर रहा है. बहरहाल, नितिन पटेल की नाराज़गी ने गुजरात में बीजेपी के असंतुष्टों, कांग्रेस नेताओं और हार्दिक पटेल को फ्रंट फुट पर खेलने का मौका तो दे ही दिया है. साभार बीबीसी 
राजीव रंजन तिवारी (संपर्कः 8922002003)
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