ताज़ा ख़बर

महज ढाई महीने में बीजेपी के हाथ से निकल गईं गुजरात की 53 सीटें


तसलीम खान  
गुजरात विधानसभा चुनावों पर एबीपी न्यूज के लिए सीएसडीएस-लोकनीति के अक्टूबर से अब तक हुए ओपीनियन पोल की आखिरी किस्त से यह स्पष्ट हो गया है कि गुजरात में बीजेपी का जनाधार खिसक चुका है और आम लोग उससे बेहद नराज हैं। सीएसडीएस-लोकनीति ने इस कड़ी का पहला सर्वे अगस्त 2017 में किया था, जिसमें सामने आया था कि बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले काफी बढ़त हासिल है। सर्वे में बताया गया था कि बीजेपी के खाते में 59 फीसदी वोट जाने का अनुमान लगाया गया था। जबकि कांग्रेस के हिस्से में महज 29 फीसदी वोटों के आसार बताए गए थे। बाकी के 12 फीसदी वोट अन्य के खाते में जाना दर्शाया गया था। इस वोट शेयर के आधार पर एबीपी न्यूज ने बताया था कि गुजरात में बीजेपी को 144 से 152 सीटें तक मिल सकती हैं। यानी उसके खाते में कमोबेश 148 सीटें जाने का अनुमान पेश किया था। वहीं इसी वोट शेयर के आधार पर कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 26 से 32 सीटों का अनुमान था। यानी कांग्रेस को सिर्फ 29 सीटों की पेशगोई एबीपी न्यूज ने की थी। यहां यह बताना जरूरी है कि सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे में सिर्फ वोट शेयर का अनुमान लगाता है, और इस वोट शेयर के आधार पर कोई गणितज्ञ सीटों का अंदाजा लगाते हैं। सीएसडीएस की यह परंपरा बहुत पुरानी है और वह इस पर कायम है। सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे की दूसरी कड़ी अक्टूबर 2017 के आखिरी सप्ताह में सामने आई थी। इस सर्वे में बीजेपी का वोट शेयर घटकर 47 फीसदी आने का अनुमान था। यह अगस्त के अनुमान के मुकाबले 12 फीसदी कम था। वहीं कांग्रेस के खाते में 12 फीसदी बढ़त के साथ 41 फीसदी वोट जाने की बात कही गयी थी। अक्टूबर के इस वोट शेयर के आधार पर एबीपी न्यूज ने गणना कर भविष्यवाणी की थी कि गुजरात में बीजेपी को 113 से 121 सीटें मिल सकती हैं। यानी उसके खाते में कमोबेश 117 सीटें आने की संभावना है। यह आंकड़ा अगस्त के मुकाबले सीधे 31 सीटों के नुकसान को दर्शाता है। वहीं इस सर्वे के वोट शेयर के आधार पर कांग्रेस के हिस्से में 58 से 64 सीटों का अनुमान लगाया गया था, यानी उसके विधायकों की संख्या 32 बढ़कर 61 पहुंचने की संभावना जताई गई। सर्वे की इस कड़ी में सीएसडीएस-लोकनीति ने आखिरी सर्वे नवंबर 2017 के आखिरी सप्ताह में किया। यह वह सप्ताह है जब मतदान में महज एक हफ्ते का वक्त बाकी है और ज्यादातर वोटर अपना मन बना चुके होते हैं। चुनाव से ऐन पहले के पखवाड़े में किए गए सर्वे में आमतौर पर कुछ हद तक सही तस्वीर मिलती रही है। बिहार और दिल्ली के मामले में यह साबित भी हुआ है। नवंबर 2017 के आखिरी सप्ताह के सर्वे के नतीजों में सामने आया कि कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर बीजेपी को झटक दिया है। गुजरात के चार में से तीन रीजन कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं और उसका वोट शेयर उछलकर 43 फीसदी पहुंच गया है, जबकि बीजेपी को और 4 फीसदी का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। यानी नवंबर के आखिरी सप्ताह में कांग्रेस और बीजेपी बराबरी के वोट शेयर के साथ आमने-सामने हैं। लेकिन, चैनल ने बराबर के वोट शेयर और गुजरात के प्रभावशाली तबके की कांग्रेस को समर्थन मिलने की संभावना जताने के बावजूद बीजेपी को ज्यादा सीटें देने का अनुमान लगाया। जो भी गणना की गई है उसके आधार पर बीजेपी के लिए 91 से 99 सीटों और कांग्रेस के लिए 78 – 86 सीटों का अनुमान पेश किया गया है। यानी बीजेपी के हिस्से में कमोबेश 95 और कांग्रेस के खाते में 82 सीटें जा सकती है। चैनल की गणना को ही आधार माने तो बीते तीन महीने में बीजेपी को गुजरात में 53 सीटों का नुकसान हुआ है, जबकि कांग्रेस को 53 सीटों का फायदा। सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे में एक और दिलचस्प आंकड़ा है। इसके मुताबिक जिन लोगों से सर्वे के दौरान बात की गई है उनमें से 70 फीसदी से ज्यादा का कहना है कि वे मतदान के दिन उसी पार्टी को वोट देंगे, जिसके बारे में उन्होंने सर्वे करने वाले को बताया है। इसी सर्वे के मुताबिक गुजरात के प्रभावशाली तबकों में शामिल पाटीदार, दलित और कारोबारी, खुलकर कांग्रेस के साथ हैं। इसके अलावा किसान और आदिवासी भी कांग्रेस के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। साथ ही महिलाओं की पहली पसंद भी कांग्रेस ही है। सर्वे के मुताबिक अगस्त में बीजेपी की रूपाणी सरकार से संतुष्ट होने वालों की तादाद 69 फीसदी थी जो नवंबर के अंत तक 53 फीसदी रह गई। वहीं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से संतुष्टि जताने वालों की संख्या में भी एक तिहाई की कमी आई है और इनकी संख्या 67 फीसदी से घटकर 47 फीसदी रह गई। यानी आधे से ज्यादा गुजरात नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार से संतुष्ट नहीं है। एक और रोचक तथ्य इस सर्वे से सामने आया है। वह यह कि गुजरात के 60 फीसदी लोग मानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने अच्छे दिनों का झूठा वादा किया था। और ऐसा मानने वालों की तादाद में अगस्ते मुकाबले 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा आधे से ज्यादा गुजराती यानी 56 फीसदी का कहना है कि मौजूदा सरकार के दौर में उनकी आमदनी घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। नोटबंदी और जीएसटी को लेकर भी गुजरात के लोग केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और विजय रूपाणी सरकार से नाराज हैं। पुरानी कहावत है कि राजनीति अवधारणाओं का खेल है। यानी जिसकी हवा ज्यादा चलती है आमतौर पर उसके पक्ष में माहौल सकारात्मक बनता है। सर्वे में भी यह सवाल पूछा गया था कि किसकी हवा है और कौन जीत सकता है। इसके जवाब में कांग्रेस और बीजेपी बराबरी पर हैं। 37 फीसदी गुजरात का मानना है कि इस बार हवा कांग्रेस की है और लगभग इतने ही लोग बीजेपी की बात करते हैं। साभार नवजीवन 
राजीव रंजन तिवारी (संपर्कः 8922002003)
  • Blogger Comments
  • Facebook Comments

0 comments:

Post a Comment

आपकी प्रतिक्रियाएँ क्रांति की पहल हैं, इसलिए अपनी प्रतिक्रियाएँ ज़रूर व्यक्त करें।

Item Reviewed: महज ढाई महीने में बीजेपी के हाथ से निकल गईं गुजरात की 53 सीटें Rating: 5 Reviewed By: न्यूज़ फ़ॉर ऑल