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हिमाचल में 9 नवंबर को वोटिंग, लेकिन गुजरात के लिए वेटिंग, क्या मोदी की गुजरात यात्रा का है इंतजार?

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का राग लंबे समय से अलाप रहे हैं, लेकिन सिर्फ दो राज्यों के चुनाव भी एक साथ कराने में लगता है चुनाव आयोग के पसीने छूट रहे हैं। इसीलिए चुनाव आयोग ने गुरुवार को सिर्फ हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया, और गुजरात को टाल दिया। हालांकि इन दोनों ही राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल जनवरी 2018 में खत्म हो रहा है। हिमाचल विधानसभा का कार्यकाल 7 जनवरी तक है,जबकि गुजरात का 23 जनवरी तक। लेकिन फिर भी गुजरात के लिए चुनाव आयोग के पास कोई खबर नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि इसी महीने दिवाली से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा होने वाला है और माना जा रहा है कि इस दौरे में वे गुजरात के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। ऐसे में अगर चुनाव आयोग हिमाचल के साथ ही गुजरात चुनाव की तारीखों का भी ऐलान कर देता तो आचार संहिता लागू हो जाती, और फिर किसी किस्म की कोई घोषणा नहीं हो सकती थी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे और संभावित घोषणाओं के बाद ही गुजरात में चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा। कांग्रेस ने इसे वोटरों को लुभाने की कोशिश बताया है। पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक वीडियो ट्वीट कर इस पर अपना रुख रखा है। आयोग की घोषणा के मुताबिक पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की सभी सीटों पर 9 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, लेकिन वोटों की गिनती करीब डेढ़ महीने बाद 18 दिसंबर को होगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने बाकी दोनों निर्वाचन आयुक्तों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव तारीखों का ऐलान किया। चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस को 36 और बीजेपी को 27 सीटों पर सफलता मिली थी। इसके अलावा 5 सीटों पर अन्य ने जीत हासिल की थी। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में आयोग ने फोटो वोटर पहचान पत्र के उपयोग का ऐलान किया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कुल 7521 पोलिंग स्टेशन हैं, इन सभी में वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग ने कहा कि सभी पोलिंग स्टेशन ग्राउंड फ्लोर पर होंगे और वोटिंग की जगह की ऊंचाई थोड़ी बढ़ाई जाएगी। हिमाचल प्रदेश पहला राज्य होगा जहां पूरी तरह से वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में हर चुनावी रैली की वीडियोग्राफी होगी। इसके अलावा आयोग ने वीवीपाट मशीनों के साइज को 5.6 सेमी से बढ़ाकर 10 सेमी करने की भी घोषणा की। इसके अलावा ‘बल्क मैसेज’ और ‘वॉयस मैसेज’ भी चुनाव प्रचार का हिस्सा माने जाएंगे। इसके अलावा एक और अहम निर्णय की जानकारी देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 136 बूथ ऐसे होंगे जो पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित होंगे। चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि आगामी चुनाव मुख्य रूप से बीजेपी के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, हम उनकी कमजोरी जानते हैं, वह मोदी पर निर्भर कर रहे हैं। हमें खुद पर भरोसा है और हमारा ध्यान विकास पर केंद्रित है।
गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं होने से उठे सवाल 
चुनाव आयोग ने कहा कि पहले ही चुनाव कार्यक्रम के ऐलान में देरी हो चुकी है, इसीलिए गुरुवार को ही ऐलान करने का फैसला किया गया। लेकिन इसके बावजूद आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान नहीं किया। माना जा रहा था कि आज ही आय़ोग एक साथ दोनों राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। पिछली बार भी गुजरात विधानसभा के चुनाव दो चरणों में और हिमाचल प्रदेश में एक चरण में चुनाव हुए थे। गुजरात में 182 विधानसभा सीटें हैं। जिनमें से पिछले चुनाव में बीजेपी ने 116, कांग्रेस ने 60 और अन्य ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बीच केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी ने चुनाव की सभी तैयारियां कर ली हैं। सरकार को जो उद्घाटन, फैसले और शिलान्यास करने थे वे सब हो गए हैं। हाल ही में सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी घटाई है और कुछ बीजेपी शासित राज्यों ने इस पर वैट में कमी की है। पीएम नरेंद्र मोदी भी अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मोदी पिछले कुछ दिनों के दौरान गुजरात के कई दौरे कर चुके हैं। अभी कुछ ही दिन पहले पीएम ने गुजरात में बुलेट ट्रेन की नींव रखी थी। इसके अलावा पिछले महीने ही सरदार सरोवर डैम का उद्घाटन किया और पिछले हफ्ते वह अपने गृहनगर वडनगर के दौरे पर आए थे। इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी गुजरात में पूरा जोर लगा दिया है। राहुल लगातार गुजरात का दौरा कर रहे हैं जिसमें उन्हें अपार जनसमर्थन भी मिल रहा है। बुधवार को ही राहुल गुजरात की अपनी तीनदिवसीय नवसृजन यात्रा खत्म कर दिल्ली लौटे हैं। अपनी यात्रा के दौरान राहुल ने अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी की अकूत कमाई और जीएसटी- नोटबंदी जैसे मुद्दों पर जमकर मोदी सरकार को घेरा। साभार नवजीवन  
गहलोत और पटवारी की रणनीति से छुटे बीजेपी के पसीने
गुजरात में चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के सभी बड़े-छोटे नेता जी-जान से लगे हुए हैं। हर कोई इस बार गुजरात में भाजपा को हराने की रणनीति बना रहा है। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विधायक जीतू पटवारी की जोड़ी द्वारा तैयार की गई गुजरात चुनाव के लिए कूटनीतिक रणनीति ने भाजपा के पसीने छुड़ा दिए हैं। इन नेताओं द्वारा तैयार किए जा रहे पोलिटिकल रूटमैप ने कांग्रेसियों में नई ऊर्जा का संचार किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मंदिर से लेकर भजन, हवन और दर्शन तक की कहानी में जीतू पटवारी की सफल सियासी स्क्रिप्ट ने ही काम किया है। इतना ही नहीं, जीतू पटवारी ने गुजरात की सियासी गणित के मद्देनजर राहुल गांधी से आदिवासियों के बीच ले जाकर आदिवासी नृत्य तक करवाया, जिसका पूरे राज्य में व्यापक असर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि जून माह तक कांग्रेस गुजरात में मैदान से बाहर नजर आ रही थी लेकिन दो महीने में ही गहलोत और पटवारी की जोड़ी की रणनीति ने भाजपा को मैदान से बाहर कर दिया है। जानकार बताते हैं कि जीतू पटवारी टीम राहुल के एक मजबूत योद्धा के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
राजीव रंजन तिवारी (संपर्कः 8922002003)
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