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आरुषि हत्याकांड में तलवार दंपति बरी

रियल लाइफ मर्डर मिस्ट्री बनी फिल्मों की स्क्रिप्ट 
नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजेश और नुपुर तलवार को बरी कर दिया है, उन्हें स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 2008 में अपनी बेटी आरुषि और घर के नौकर हेमराज के कत्ल में दोषी ठहराया था. तलवार दंपति ने 2013 में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें तलवार दंपति को दोनों हत्याओं के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इस फैसले के बाद से तलवार दंपति गाजियाबाद के डासना जेल में बंद थे. नुपुर और राजेश तलवार इस फैसले को सुनकर रो पड़े. उन्होंने टेलिविजन पर कहा कि उन्हें न्याय मिला. डासना जेल के जेलर दाधी राम मौर्य ने समाचार चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "तलवार दंपति को टेलिविजन के माध्यम से खबर मिल गई है. वे खुश हैं वे संतुष्ट हैं." जस्टिस एके मिश्रा और बीके नारायण की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि तलवार दंपति ने बेटी आरुषि को नहीं मारा. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में तलवार दंपति को रिहा करते हुए कहा कि दोनों को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिेए. तलवार दंपति के वकील ने टेलिविजन इंटरव्यू में बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है और कल दोपहर तक दोनों दंपति जेल से बाहर आ सकते हैं. कोर्ट ने माना है कि उनके खिलाफ सारे पर्याप्त सबूत नहीं थे. केवल इस आधार पर कि वे हत्या की रात घर पर थे, उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इस आधार पर सजा देना अन्याय है. 16 मई 2008 को आरुषि तलवार और उसके नौकर हेमराज की हत्या हुई थी. लगभग 10 साल चले इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरुषि के माता पिता को रिहा किया है. इस मामले में सीबीआई ने कहा है कि अगला कदम उठाने से पहले वे फिलहाल फैसले की कॉपी मिलने का इंतजार कर रही है.
रियल लाइफ मर्डर मिस्ट्री बनी फिल्मों की स्क्रिप्ट 
बॉलीवुड में ऐसी तमाम फिल्में बनीं जो असल जिदंगी की किसी मर्डर मिस्ट्री को दिखाती हैं. इनमें कुछ घटनाओं का रहस्य तो सुलझ गया लेकिन कुछ पर अब भी सवाल हैं. एक नजर ऐसी फिल्मों पर, जो असली घटनाओं पर आधारित हैं.  
तलवारः साल 2008 के चर्चित आरुषि हत्याकांड पर बनी फिल्म है, तलवार. नोएडा में रहने वाले तलवार परिवार की बेटी आरुषि और उनके नौकर हेमराज की हत्या की गुत्थी अब तक सुलझ नहीं सकी है. निचली अदालत ने आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के लिए आरुषि के माता-पिता को दोषी ठहराया था. लेकिन उच्च न्यायालय ने माता-पिता को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है.  
नो वन किल्ड जेसिकाः साल 1999 में कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा ने मॉडल जेसिका लाल की गोली मार कर हत्या कर दी थी. जेसिका की हत्या और न्याय पाने के लिए जेसिका के परिवार के संघर्ष को इस फिल्म में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है.
मद्रास कैफेः 1980 के दशक में श्रीलंकाई गृहयुद्ध में भारतीय हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि पर बनी मद्रास कैफे को आलोचकों ने बेहद सराहा. फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े पूरे घटनाक्रम को दिखाया गया है.  
नॉट ए लव स्टोरीः मुंबई के एक मशहूर टीवी प्रोडक्शन हाउस सिनर्जी एडलैब्स के अधिकारी नीरज ग्रोवर की हत्या कर दी गई थी. हत्याकांड की इसी पृष्ठभूमि पर रामगोपाल वर्मा ने यह फिल्म बनायी. असल मामले में ग्रोवर की हत्या के आरोप में अभिनेत्री मारिया सुसाइराज और उनके प्रेमी लेफ्टिनेंट एमएल जेरोम मैथ्यू को गिरफ्तार भी किया गया था.
वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबईः यह फिल्म कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और हाजी मस्तान के संबंधों को प्रतीकात्मक ढंग से दिखाती है. फिल्म 70 के दशक के उस मुंबई को दिखाती है जब शहर में अंडरवर्ल्ड का दबदबा हुआ करता था. हालांकि विवादों से बचने के लिए फिल्म में चरित्रों और जगहों के नाम बदले गये हैं.
शूटआउट एट लोखंडवालाः यह फिल्म साल 1991 में एसीपी एए खान की अगुवाई में मुंबई पुलिस और गैंगस्टर माया डोलास के बीच हुई मुठभेड़ पर आधारित है. यह मुठभेड़ मुंबई के लोखंडवाला परिसर में हुई थी, जिसमें डी कंपनी के लिए काम करने वाले 25 साल के डोलास की मौत हो गयी थी.  
फिराकः यह अभिनेत्री नंदिता दास की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी. साल 2008 में आई यह फिल्म 2002 के गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि पर बनायी गयी थी. इसमें दंगों की बजाय आम लोगों पर इन दंगों का क्या असर हुआ उसको दिखाया गया था.
ब्लैक फ्राइडेः निर्देशक अनुराग कश्यप की यह फिल्म साल 1993 के मुंबई बम धमाकों पर आधारित है. यह बॉलीवुड की सबसे विवादित फिल्मों में से एक है. फिल्म को साल 2004 में रिलीज किया जाना था लेकिन विवादों के चलते फिल्म 2007 में रिलीज हो सकी.  
हे रामः कमल हासन अभिनीत यह फिल्म भारत विभाजन और नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि पर आधारित है. इस फिल्म पर काफी विवाद रहा लेकिन बाद में इसे भारत की ओर से ऑस्कर में भी भेजा गया. साभार डीडब्ल्यू
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