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धर्म से परे है गौरक्षा, ‘पवित्र गो रक्षकों’ को सरकार से डरने की जरूरत नहीं: मोहन भागवत

नई दिल्ली। गौरक्षा मसले की पृष्ठभूमि में जाते हुए भागवत ने कहा कि कम खर्चे में विषमुक्त खेती करने का सहज सुलभ उपाय गौ आधारित खेती ही है। गौरक्षा के नाम पर लोगों की कथित रूप से पीट पीट कर हत्या किए जाने की हालिया घटनाओं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को स्पष्ट रूप से गौरक्षकों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं है। भागवत ने इसके साथ ही कहा कि गौरक्षकों और गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। चिंतित आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को होना चाहिए, गौरक्षकों को नहीं। उन्होंने साथ ही ऐलान किया कि गौरक्षा व गौसंवर्धन का वैध व पवित्र परोपकारी कार्य चलेगा और बढ़ेगा और यही इन परिस्थितियों का उत्तर भी होगा। विजयदशमी के पर्व पर आरएसएस मुख्यालय में यहां एक घंटे के अपने संबोधन में भागवत ने अवैध शरणार्थियों, गौ रक्षकों, जम्मू कश्मीर की स्थिति और आर्थिक हालात जैसे कई विषयों का जिक्र किया। मोहन भागवत ने कहा कि गौरक्षा से जुड़े हिंसा व अत्याचार के बहुर्चिचत प्रकरणों में जाँच के बाद इन गतिविधियों से गौरक्षक कार्यकर्ताओं का कोई संबंध सामने नहीं आया है। इधर के दिनों में उलटे अहिंसक रीति से गोरक्षा का प्रयत्न करनेवाले कई कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं। उसकी न कोई चर्चा है, न कोई कार्रवाई। उन्होंने कहा कि वस्तुस्थिति न जानते हुए अथवा उसकी उपेक्षा करते हुए गौरक्षा व गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना व सांप्रदायिक प्रश्न के नाते गौरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाना ठीक नहीं है। गौरक्षा मसले की पृष्ठभूमि में जाते हुए उन्होंने कहा कि कम खर्चे में विषमुक्त खेती करने का सहज सुलभ उपाय गौ आधारित खेती ही है। इसलिये गौरक्षा तथा गौ संवर्धन की गतिविधि संघ के स्वयंसेवक, भारतवर्ष के सभी संप्रदायों के संत, अनेक अन्य संगठन संस्थाएँ तथा व्यक्ति चलाते हैं। गाय अपनी सांस्कृतिक परंपरा में श्रद्धा का एक मान बिंदु है। गौरक्षा का अंतर्भाव अपने संविधान के मार्गदर्शक तत्वों में भी है। कई राज्यों में उसके लिए कानून विभिन्न राजनीतिक दलों के शासन काल में बन चुके हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और विशेषकर बांग्लादेश के सीमा पार से गौधन की तस्करी एक चिंताजनक समस्या बनकर उभरी है। गौधन के उपरोक्त लाभों में ये गतिविधियाँ और अधिक उपयुक्त हो जाती हैं। ये सभी गतिविधियाँ, उनके सभी कार्यकर्ता कानून, संविधान की मर्यादा में रहकर करते हैं। उन्होंने कहा कि अनेक मुस्लिम भी गौरक्षा, गौपालन व गौशालाओं का उत्तम संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौरक्षा के विरोध में होने वाला कुत्सित प्रचार बिना कारण ही विभिन्न संप्रदायों के लोगों के मन पर तथा आपस में तनाव उत्पन्न करता है। यह मैंने कुछ मुस्लिम मतानुयायी बंधुओं से ही सुना है। संघ नेता ने कहा,‘‘ ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से, सात्विक भाव से, संविधान कानून की मर्यादा का पालन कर चलने वाले गौरक्षकों को, गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं। यह हिंसा में लिप्त आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए चिन्ता का विषय होना चाहिए।’’ मोहन भागवत ने गौरक्षा के अलावा भी कई विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर राज्य में बिना किसी भेदभाव के तथा पारदर्शी एवं स्वच्छ शासन के जरिए जनता को विकास के लाभ पहुंचाने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य में शरणार्थियों की समस्या अब तक नहीं सुलझी है। भारत में रहने तथा हिंदू बने रहने के अपने फैसले के कारण शरणार्थी के तौर पर दशकों से उनकी पीढ़ियां खराब हालत में जी रही हैं।’’ भागवत ने कहा, ‘‘भारत के नागरिक होने के बावजूद उनके पास शिक्षा, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं एवं लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘1947 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से आने वाले तथा 1990 में कश्मीर घाटी से विस्थापित हुए राज्य के स्थाई लोगों की समस्याएं वैसी की वैसी ही हैं।’’ भागवत ने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा की जानी चाहिए कि समान लोकतांत्रिक अधिकार सुनिश्चित करते हुए उनकी धार्मिक एवं राष्ट्रीय पहचान सुरक्षित रखी जा सके ‘‘ताकि हमारे भाई खुशी के साथ, गौरवपूर्व तरीके से तथा सुरक्षित जीवन जी सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और केवल इस काम के लिए जरूरी संवैधानिक संशोधन करने होंगे तथा पुराने प्रावधान बदलने होंगे। इसके बाद ही जम्मू और कश्मीर के लोगों का बाकी भारत से पूरी तरह से सम्मिश्रण हो सकता है तथा राष्ट्रीय प्रगति में उनका समान सहयोग एवं हिस्सा संभव होगा।’’ भागवत ने ‘‘सीमा पार से होने वाली अंधाधुंध गोलीबारी तथा आतंकियों के घुसपैठ के बीच बहादुरी एवं पूरी दृढ़ता से अपनी जगह कायम रहने वाले’’ सीमाई इलाकों के नागरिकों का समर्थन करते हुए सरकार, प्रशासन तथा विभिन्न सामाजिक समूहों से उनके लिए राहत एवं मदद की मांग की। उन्होंने डोकलाम गतिरोध पर कहा, ‘‘पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान तथा उत्तरी मोर्चे पर चीन की गतिविधियों के जवाब में भारत का मजबूत एवं दृढ़ रूख सीमाओं पर डोकलाम जैसी घटनाओं तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में दिखता रहा है। साभार जनसत्ता
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