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देश के इकोनॉमी की हालत ‘बेकार’, अब विपक्ष को मिला हथियार!

यह भी पढ़ेंः शिवसेना का सरकार पर तंज, अगर यशवंत सिन्हा गलत हैं तो साबित करें, पार्टी में नहीं सुनी जाती बात : यशवंत सिन्हा
नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर करारा हमला किया है। ऐसा हमला जिसके आगे शायद विपक्ष भी फीका पड़ जाए। एक न्यूजपेपर आर्टिकल में सिन्हा ने लिखा है कि वित्त मंत्री ने इकोनॉमी को बर्बाद कर दिया है, मगर डर के मारे कोई इसके खिलाफ नहीं बोल रहा है। उन्होंने यहां तक लिख दिया कि चुनाव से पहले हालात में सुधार होना मुश्किल है। इसके पहले बीजेपी नेता सुब्रमणियन स्वामी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और संघ से जुड़े लेखक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति भी इकोनॉमी, जीएसटी और नोटबंदी पर गंभीर सवाल उठा चुके हैं। आवाज़ अड्डा में आज इकोनॉमी और पॉलिटिक्स के हिसाब से यशवंत सिन्हा के इस आर्टिकल पर चर्चा हो रही है, लेकिन उससे पहले देख लेते हैं कि सिन्हा के आर्टिकल का सार क्या है और सरकार और विपक्ष ने इसको किस रूप में लिया है। यशवंत सिन्हा के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली फेल हो चुके हैं, इकोनॉमी की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि अब चुनाव से पहले सुधरने वाली नहीं है। सिन्हा के मुताबिक सरकार ने किस्मत से मिले मौकों का सही इस्तेमाल नहीं किया, विरासत में मिली एनपीए और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याओं का निदान नहीं ढूंढा और गलत समय पर नोटबंदी लागू कर किसान, छोटे व्यापारियों और इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी। गलत तरीके से लागू की गई जीएसटी ने रही सही कसर पूरी कर दी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कहा था कि तकनीकी वजहों से ग्रोथ घटी है। इसपर सिन्हा ने लिखा है कि धोखा देकर थोड़ी देर बचा जा सकता है, लेकिन इससे काम नहीं चलने वाला। वित्त मंत्री पूरे देश को गरीबी का स्वाद चखाने में लगे हैं। इकोनॉमी की बिगड़ी हालत पर बीजेपी के भीतर असंतोष है, लेकिन डर से कोई कुछ नहीं बोलता। पहले से इकोनॉमी को लेकर सवाल उठा रहे बीजेपी नेता सुब्रमणियन स्वामी ने भी सिन्हा की बातों से सहमति जताई है, लेकिन वो उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते। इधर यशवंत सिन्हा के आरोपों से असहज सरकार और बीजेपी इसपर कोई ठोस जबाव या सफाई देने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत की आर्थिक पहचान का हवाला दे रही है। उधर यशवंत सिन्हा के हमले ने कांग्रेस को बैठे-बिठाए बीजेपी को घेरने का सुनहरा मौका दे दिया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि यशवंत सिन्हा ने उन बातों पर मुहर लगाई है जो कांग्रेस के नेता डेढ़ साल से बोल रहे हैं और अब कोई चमत्कार ही अर्थव्यवस्था को बचा सकता है। वहीं गुजरात में चुनाव का माहौल बनाने में लगे राहुल गांधी ने यशवंत सिन्हा के लेख के बहाने मोदी के निरंकुश तौर तरीकों पर सवाल उठाए हैं। यशवंत सिन्हा के लेख ने मंदी की आशंका को बदल देने के साथ-साथ कई नए सवाल भी पैदा कर दिए हैं। पहला सवाल तो ये है कि क्या वाकई बीजेपी के भीतर डर का माहौल है, जिसके चलते कोई कुछ नहीं बोलता और सरकार डिनायल मोड में चल रही है? लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई इकोनॉमी ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि 2019 से पहले उसे पटरी पर लाना मुश्किल है और बीजेपी के भीतर भी इकोनॉमी की हालत को लेकर असंतोष है!
शिवसेना का सरकार पर तंज, अगर यशवंत गलत हैं तो साबित करें 
शिवसेना ने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के आर्थिक हालात के बारे में लिखे गए लेख को गलत साबित करके दिखाए। साथ ही तंज किया कि विचारों को व्यक्त करने के लिए भाजपा नेता को क्या सजा दी जाएगी। शिवसेना ने दावा किया कि भाजपा के कई नेता व्यवस्था के खिलाफ बोलने से डरते हैं। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें ‘अज्ञात खतरों’ का सामना करना पड़ेगा। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा, ‘कुछ लोग यह मान लेते हैं कि चुनाव जीतने और ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ करने से अथवा धन के इस्तेमाल मात्र से ही विकास हो जाएगा, लेकिन अर्थ व्यवस्था की हालत अब बेहद खराब है।’ संपादकीय में कहा गया, ‘जब मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम जैसे विशेषज्ञों ने अर्थव्यवस्था की हालत का खुलासा करना चाहा तो उन्हें खारिज कर दिया दिया। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कुछ खुलासे किए हैं। उन्हें अब बेईमान अथवा राष्ट्र विरोधी करार दिया जा सकता है।’  
पार्टी में नहीं सुनी जाती बात : यशवंत सिन्हा 
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार और पार्टी पर असहमति की आवाज नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का समय मांगा था लेकिन आज तक उन्हें मिलने का मौका नहीं दिया गया. एक निजी टेलीविजन के साथ बातचीत में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि पार्टी में कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था लेकिन एक साल होने के बाद भी उन्हें अभी तक समय नहीं मिला है. उनसे सवाल किया गया था कि अर्थव्यवस्था को लेकर उन्होंने सरकार की आलोचना एक लेख के जरिये क्यों की, क्या उनके पास पार्टी का मंच नहीं था. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी जब कश्मीर जा रहे थे तब उन्होंने उनसे मिलने का अनुरोध किया था. यदि उनकी बात सुन ली जाती तो कश्मीर घाटी में स्थिति इतनी खराब नहीं होती. सिन्हा ने कहा कि वह सरकार और पार्टी की आलोचना करके अपनी हताशा नहीं जता रहे हैं. इस सवाल पर कि क्या वह अब भी अपने को भाजपा में मानते हैं, उन्होंने कहा, तकनीकी रूप से मैं पार्टी के भीतर हूं क्योंकि मैंने इससे बाहर रहने का विकल्प नहीं चुना है और न ही पार्टी ने मुझे निकाला है. सिन्हा ने कहा कि वह पिछले तीन साल से पार्टी में सक्रिय नहीं रहे हैं. वह न तो पार्टी के किसी कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही पार्टी ने उन्हें आमंत्रित किया है. उनके विचारों की उनके पुत्र एवं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा द्वारा एक लेख के जरिए ही आलोचना किए जाने के बारे सिन्हा ने कहा कि सरकार में संबंधित मंत्री या सरकार के प्रवक्ता को ही उनकी बातों का जवाब देना चाहिए था. यदि सरकार मानती है कि जयंत सिन्हा जवाब देने के लिए बहुत सक्षम हैं तो उन्हें वित्त मंत्रालय से क्यों हटाया गया था. साथ ही उन्होंने कहा कि वह तथा उनका पुत्र दोनों ही अपना धर्म निभा रहे हैं. इस मामले को पिता-पुत्र के बीच के मामले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
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