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घटना के दो दिन बाद गोरखपुर पहुंचे सीएम योगी, बोले- मुझसे ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं

गोरखपुर। गोरखपुर के बीआरडी सरकारी हॉस्पिटल में पांच दिनों के भीतर 68 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। यह सिलसिला आज भी जारी है। तेज दिमागी बुखार से आज भी एक चार साल के बच्चे की मौत हो गई। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज गोरखपुर पहुंच गए हैं। उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा अस्पताल पहुंचे हैं। इस दौरान मीडिया द्वारा सवाल करने पर सीएम कहा कि मुझसे अधिक संवेदनशील कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी भी इस घटना से चिंतित हैं और उन्होंने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि पीएम ने ही मेरे साथ स्वास्थ्य मंत्री को गोरखपुर भेजा है। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री बनने के बाद अब तक 4 बार BRD अस्पताल आ चुका हूं। योगी आदित्यनाथ ने आगे बताया कि मैं 9 अगस्त को भी BRD अस्पताल आया था। मैं 1996-97 से इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं। उन बच्चों के लिए मुझसे ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं हो सकता। मैं इंसेफेलाइटिस के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ा। योगी ने कहा कि चीफ सेकेट्री की अध्यक्षता में जांच हो रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि घटना के बाद सीएम ने कहा था कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की वजह से नहीं बल्कि गंदगी और बीमारियों की वजह से हुई है। मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता को भुगतान में विलंब के लिए कॉलेज के प्रिसिंपल को दोषी ठहराते हुए कहा कि 9 अगस्त को गोरखपुर प्रवास के दौरान उन्होंने इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनिया, स्वाइन फ्लू और कालाजार जैसे मुददों पर अधिकारियों से बातचीत की थी और उनसे पूछा था कि उनकी आवश्यकता क्या है और क्या उन्हें किसी तरह की कोई समस्या है लेकिन आक्सीजन आपूर्ति से जुड़ा मुद्दा उनके संज्ञान में नहीं लाया गया। उन्होंने कहा, बैठक में मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल भी मौजूद थे। मैंने पूछा कि कोई मुद्दा हो या समस्या हो तो बताएं, लेकिन वहां ऑक्सीजन को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया। हम लोगों की जानकारी में नहीं लाया गया। इससे पहले यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ ने कहा था कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है। आपको बता दें कि पिछले करीब 20 वर्षों से योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चों के मौत की घटना ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने की वजह से हुई थी। अस्पताल पर 68 लाख रुपये की बकायेदारी होने के बाद ठेकेदार ने सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए थे। इस वजह से अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई बाधित हो गई थी। इस मुद्दे पर अभी तक पीएम मोदी का कोई बयान नहीं आया है, न ही घटना को लेकर उन्होंने कोई ट्वीट किया है।  
मीडिया कवरेज पर नाराज दिखे सीएम, पत्रकारों को लगाई फटकार 
गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में पांच दिन के अंदर 60 से अधिक बच्चों की मौत के बात सरकार नींद से जाग चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (13 अगस्त) केंद्रीय स्वाहस्य्ा मंत्री जेपी नड्डा के साथ बीआरडी अस्पताल पहुंचे। सीएम योगी ने प्रशासनिक अधिकारियों से हालात का जायजा लिया और इंसेफेलाइटिस वार्ड का दौरा किया। अस्पताल का जायजा लेने के बाद योगी आदित्यनाथ पत्रकारों से मुखातिब हुए और मीडिया पर गलत रिपोर्टिंग का आरोप मढ़ दिया। सीएम ने पत्रकारों को सही से रिपोर्टिंग करने की नसीहत दी। जनसत्ता में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा ‘आप सभी लोग सरकारी अस्प तालों में जाइए। बाहर से रिपोर्टिंग नहीं, मौके पर जाइए वार्ड में। मैं आपको इस बात की सुविधा देने जा रहा हूं। प्रत्येाक पत्रकार को कैमरा के साथ भीतर जाने की इजाजत होगी।’ सीएम योगी ने आगे कहा, ‘केंद्र व राज्यत के कई अधिकारी गोरखपुर में मौजूद हैं। प्रधानमंत्री जी ने पूरी मामले की जानकारी लेने के लिए कुछ स्तसरीय चिकित्सपकों की टीम यहां भेजी हैं। उन्होंीने अपना कार्य भी प्रारम्भस कर दिया है। इंसेफेलाइटिस के खिलाफ शुरू से हम लोग लड़ते रहे हैं। सरकार बनने के बाद हमने जेई वैक्सीतनेशनल ड्राइव चलाकर लाखों बच्चोंा को इंजेक्शीन लगाए गए। सीएम बनने के बाद यह बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मेरा चौथा विजिट है। मैं हर बार इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करता हूं।’ जैसा की मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी बीआरडी अस्पताल में कई बच्चों की मौत ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हई है लेकिन आज सीएम योगी और उनके स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मीडिया के सामने यह बात जोर देकर कही कि गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किसी बच्चे की मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते नहीं हुई। योगी आदित्यनाथ और सिद्धार्थनाथ सिंह ने बीते तीन वर्षो के दौरान अगस्त महीने में होने वाली बच्चों की मौतों का आंकड़ा देते हुए दावा किया कि ये मौतें जापानी इनसेफलाइटिस जैसी मच्छर जनित बीमारियों के कारण हुई हैं।
बच्चों की मौत को भाजपा सांसद ने बताया नरसंहार 
उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने अपनी ही सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत सिर्फ मौत नहीं बल्कि नरसंहार है। साक्षी महाराज ने कहा कि मासूमों की मौत ऑक्सीजन सप्लाई न होने की वजह से हुई। उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को पेमेंट न करने पर भी सवाल उठाए। साक्षी महाराज ने कहा कि बच्चों की मौत सामान्य नहीं मानी जाएगी। सरकार को दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त एक्शन लेना चाहिए। वहीं यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह प्रेस कांफ्रेंस में बच्चों की मौत के लिए ऑक्सीजन को जिम्मेदार मानने से पल्ला झाड़ते नजर आए। पत्रकारों के जवाब देते हुए वे थोड़ा भी परेशान होने के बजाय मुस्कुराते और पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के लिए सिर्फ गैस सप्लाई जिम्मेदार नहीं है। बच्चों की मौत का कारण अलग-अलग है। साथ ही उऩ्होंने कहा कि 11.30 से 1.30 बजे तक गैस पर्याप्त नहीं थी हालांकि इस बीच किसी बच्चे की मौत नहीं हुई। इसके अलावा मामले में कार्रवाई करते हुए बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल आरके मिश्रा को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। सिद्धार्थनाथ ने कहा, ‘यूपी की सरकार संवेदशनील सरकार है। गैस सप्लाई बाधित होने के कारणों की जांच की जा रही है। सरकार ने मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक जांच दल का गठन किया गया है। रिपोर्ट के बाद हम और लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ बच्चों की मौत पर बचपन बचाओ आंदोलन चलाने वाले नोबल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ”ये हत्या है, नरसंहार है. क्या आजादी के 70 साल का मतलब बच्चों के लिए यही है. बसपा नेता सुभिन्द्र भदौरिया ने कहा, ”ये यूपी सरकार के लिए बहुत ही शर्म की बात है। अगर सरकार में थोड़ी भी नैतिकता है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उम्मीद है कि योगी आदित्यनाथ को खुद से ही शर्म आएगी और वो उन बच्चों के माता-पिता के पास जाकर अफसोस जताएंगे।”  
बोली माया, प्रिंसिपल को बलि का बकरा बना जिम्मेदारी से न भागे 
बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर सरकारी स्तर पर उदासीनता और लापरवाही का आरोप लगाया। मायावती ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से दिए गए बयान ‘‘अगस्त के महीने में काफी बच्चों की मौत होती है” को अत्यन्त ही दुःखद, संवेदनहीन व गै़र-ज़िम्मेदाराना बताया। स्वास्थ्य मंत्री के बयान की कड़ी निन्दा करते हुये कहा कि कम-से-कम अब मुख्यमंत्री को जरूर सतर्क व सख़्त हो जाना चाहिये और इस गम्भीर घटना के लिये प्रथम दृष्टया दोषियों के खिलाफ सख़्त से सख़्त कार्रवाई करना चाहिये ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलायी गयी प्रेस कान्फ्रेंस में दी गयी सफाई पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने आज अपने बयान में कहा, ”दोषियों को बख़्शेंगे नहीं” तथा ”अपराधियों को बख़्शेंगे नहीं” आदि उपदेश सुनते-सुनते अब प्रदेश की जनता काफी ऊब चुकी है, क्योंकि ऐसी घोषणाओं के बाद ना तो कोई सख़्त कार्रवाई दोषियों के खिलाफ हो रही है और ना ही शर्मनाक व दुःखद आपराधिक घटनायें ही रूक रही हैं।” मायावती ने कहा, ”इस प्रकार प्रदेश बीजेपी सरकार अपराध-नियन्त्रण व कानून-व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा व सुरक्षा आदि जैसे आवश्यक बुनियादी जनसेवा के मामले में भी अब तक विफल ही साबित होती चली जा रही है।” बीएसपी सुप्रीमो ने कहा, ”गोरखपुर के ही बच्चों के मौत के लापरवाही के संगीन मामले में भी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल को बलि का बकरा बनाकर प्रदेश सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से भागने का ही प्रयास किया है जबकि पीड़ित परिवारों में न्याय का एहसास दिलाने के लिये यह आवश्यक था कि तत्काल सख्त से सख्त कदम उठाया जाये जो कि नहीं किया जा रहा है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के सम्बंध में केवल लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है।” मायावती ने आगे कहा, ”जैसाकि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री स्वयं ही कह रहे हैं कि ‘अगस्त महीने में बड़ी संख्या में बच्चों की मौतें होती रहती हैं‘‘, जिस कारण प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य मंत्री को कम से कम मुख्यमंत्री के ज़िले में और भी ज्यादा सतर्क रहना चाहिये था अर्थात कोई भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिये थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिस कारण स्वयं बीजेपी के सांसद के शब्दों में बच्चों का ‘‘नरसंहार‘‘ किया गया है और माताओं की गोद उजड़ गयी हैं। इस जघन्य अपराध के पीछे जैसाकि मीडिया बार-बार उजागर कर रहा है, सरकारी लापरवाही के साथ-साथ विभागीय भ्रष्टाचार का भी मामला है जिसके प्रति भी व्यापक जनहित के मद्देनज़र प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री को फौरन ही काफी गम्भीर व सख़्त होने की ज़रुरत है। यह बीएसपी की मांग भी है।” उन्होने आगे कहा, ”देर से ही सही पर मुख्यमंत्री द्वारा इस सम्बंध में गोरखपुर मेडिकल कालेज का दौरा करना अच्छी बात है, परन्तु इसके बाद आपेक्षित सख्त कार्रवाई से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी सुधरेगी, विभाग में हर स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार कितना कम होगा तथा प्रदेश में अन्य माताओं की कितनी गोद सरकारी लापरवाही से बच पायेगी, यह आगे देखने वाली बात होगी। केन्द्र व प्रदेश की बीजेपी सरकार को यह नहीं समझना चाहिये कि प्रदेश व देश की जनता की उन पर कड़ी निगाह नहीं है।”  
चर्चा में आए डॉ. कफील पर गिरी गाज 
गोरखपुर हादसे के बाद सीएम योगी के दौरे के साथ ही इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीआरडी हॉस्पिटल दौरे के तुरंत बाद अस्पताल के वाइस प्रिंसिपल और सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर कफील खान को ड्यटी से हटा दिया गया है। बता दें कि इसके पहले मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर के प्रिंसिपल डॉ पीके सिंह को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। डॉ कफील इंसेफिलाइटिस वार्ड के इंचार्ज थे। आज जब सीएम योगी ने विजिट किया तो उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल चलाने और काम में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हटा दिया गया। गोरखपुर हादसे में शनिवार तक मिले आकड़ों में मरने वालों की संख्या 62 हो गई है। वहीं, दौरे पर पहुंचे सीएम योगी ने कहा कि इस प्रकरण की जांच मुख्य सचिव को सौंपी गई है। 19 अगस्त को रिपोर्ट आने के बाद ऐसी कार्रवाई होगी कि बाकी लोगों के ‌लिए मानद साबित होगी। जिलाधिकारी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आज ही सौंपी है। सीएम योगी ने इस बात का जिक्र तो किया लेकिन इस रिपोर्ट से संबंधित तथ्यों पर बात नहीं की।  
डॉक्टरों की बदसलूकी और सरकार की बेरुखी से लोगों में ग़ुस्सा 
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हालात तकलीफ़ पहुंचाने वाले हैं. यहां के बीआरडी अस्पताल में इंसेफ़ेलाइटिस और कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से कई बच्चों की मौत हो गई है. पिछले 24 घंटे में भी यहां 12 नवजात शिशु अपनी जान गंवा चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रविवार दोपहर में अस्पताल का दौरा किया और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही. मासूमों की मौत पर स्थानीय लोगों में नाराज़गी और गुस्सा है. बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने सहयोगी समीरात्मज मिश्र के साथ बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कैंपस में मौजूद लोगों से फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए बात की. वहां मौजूद एक शख़्स का कहना था कि पिछले कई सालों से पूर्वांचल में इंसेफ़ेलाइटिस की समस्या रही है. उसने कहा,''1995 से ही मैं ऐसी मौतों के बारे में सुनते आ रहा हूं. योगी आदित्यनाथ तब सांसद थे और इंसेफ़ेलाइटिस का मुद्दा उछालते रहते थे.'' लोगों ने अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों पर मरीजों और उनके परिवार से बदसलूकी का आरोप भी लगाया. इन लोगों के दावों के मुताबिक डॉक्टर कई बार मरीजों को भर्ती ही नहीं करते. अस्पताल के पास रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा,''यहां इलाज कराने गरीब तबके के लोग आते हैं और अस्पताल का स्टाफ़ उनसे जानवरों जैसा बर्ताव करता है.'' यहां पूर्वांचल के अलग-अलग हिस्सों से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं और सर्दियों में उन्हें बाहर ही सोना पड़ता है.'' अस्पताल में सुविधाओं के अभाव और अनियमितता को लेकर भी लोग खासे नाराज़ दिखे. गोरखपुर के ही एक व्यक्ति ने कहा,''यहां एक-एक बिस्तर पर चार-चार मरीज हैं. नर्सों और बाक़ी स्टाफ़ को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाता है. उन्हें कभी सैलरी मिलती है, कभी नहीं मिलती. ऐसे में उनके लिए भी काम करना मुश्किल होता है. यहां बच्चों के मरने की घटनाएं आम हैं लेकिन एक साथ 30-40 बच्चों के मौत की ख़बर पहले कभी नहीं आई.'' हालांकि इस त्रासदी के दौरान कुछ डॉक्टरों ने लगातार काम करते हुए मानवता की मिसाल भी पेश की. समीरात्मज मिश्र के मुताबिक डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद अपनी गाड़ियों में सिलिंडर भरकर लाए और इलाज की कोशिशों में लगे रहे. स्थानीय लोगों की यह शिकायत भी है कि यहां रिपोर्टिंग करने पत्रकारों को मेडिकल कॉलेज के कैंपस में घुसने तक नहीं दिया जाता.  
बच्चों की मौत पर विदेशी मीडिया का नजरिया 
गोरखपुर के एक अस्पताल में 30 से ज़्यादा बच्चों की मौत की ख़बर विदेशी मीडिया में भी छाई हुई है. दुनियाभर के अहम मीडिया संस्थानों ने ख़बर को प्राथमिकता दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत का भी ज़िक्र किया है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ''इंसेफेलाइटिस हर साल भारत के लिए सामान्य सी बात हो गई है. मॉनसून के वक़्त इससे सैकड़ों जानें जाती हैं. इस बीमारी की मुख्य वजह दूषित खाना और पानी के साथ मच्छर का काटना है. इसके साथ ही यह संक्रमण की तरह फैलता है.'' न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे लिखा है, ''भारत लोगों की सेहत पर मुश्किल से अपनी जीडीपी का एक फ़ीसदी हिस्सा खर्च करता है. इस मामले में भारत का शुमार स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करने वाले देश के रूप में है. भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की भारी कमी है.'' इस ख़बर को वॉशिंगटन पोस्ट ने भी प्रमुखता से जगह दी है. वॉशिंगटन पोस्ट ने शांति के नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के बयान के हवाले से इसे सामूहिक हत्या करार दिया है. वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडिंग में ही सामूहिक हत्या की बात लिखी है. कैलाश सत्यार्थी ने कहा है, ''30 बच्चों की मौत ऑक्सीजन नहीं होने की वजह से हुई है. यह कोई त्रासदी नहीं बल्कि सामूहिक हत्या है. आज़ादी के 70 साल होने का मतलब हमारे बच्चों के लिए क्या है?'' मध्य पूर्व के अलजज़ीरा ने भी गोरखपुर में बच्चों की मौत और भारत में सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी प्रतिक्रिया को जगह दी है. अलजज़ीरा ने समाचार एजेंसी एपी को दिए एक पीड़ित के बयान को छापा है. इसमें गौतम नाम के एक पीड़ित ने कहा है, ''हमलोगों ने अपने बच्चों को देखा कि वो सांस नहीं ले पा रहे थे. ऐसा देखते हुए भी हम कुछ कर नहीं पाए.'' अलजज़ीरा ने इस मामले में पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ के ट्वीट को छापा है. कैफ़ ने ट्वीट कर कहा था, ''गोरखपुर में बेगुनाह बच्चों की मौत काफ़ी दुखद है. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है. ऐसे मामलों में लापरवाही ही मुख्य वजह होती है.'' इसके साथ ही अलजज़ीरा ने हार्ड न्यूज़ के संपादक संजय कपूर के ट्वीट का भी हवाला दिया है जिसमें उन्होंने बच्चों की मौत को सामूहिक हत्या बताया है. संजय कपूर ने अलजज़ीरा से कहा, ''ऐसे वाक़ये भारत के अलग-अलग हिस्सों से अक्सर आते हैं. भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार है.'' पाकिस्तानी मीडिया में भी गोरखपुर में बच्चों की मौत की ख़बर को जगह मिली है. पाकिस्तान के अहम अख़बार डॉन ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ट्वीट को भी अपनी ख़बर में शामिल किया है. राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा है कि बच्चों की मौत के लिए उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ज़िम्मेदार है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बच्चों की मौत पर लिखा है ऑक्सीजन की कमी के कारण पिछले 6 दिनों में कम से कम 64 बच्चों की मौत हो चुकी है. साभार
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