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गोरखपुर में टूटे 2 बांध, 400 गांवों में घुसा पानी, हर ओर हाहाकार के हालात

सूरज सिंह
गोरखपुर। गोरखपुर में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रोजना कोई एक बांध टूट रहा है। रविवार सुबह झंगहा-बोहरा बांध और बिनहा रिंग बांध भी टूट गया। इससे करीब 400 गांव में पानी घुस गया है। गोरखपुर में ही रेलवे पुल के पास मिट्टी बैठ गई है। इस कारण गोरखपुर-बढ़नी रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया है। गोरखपुर में खनहा बांध टूटने से रोहिन का पानी शहर के उत्तरी इलाके राजेंद्रनगर पश्चिमी से बरगदवा होते हुए कालोनियों में पहुंच गया। राप्ती का पानी बढ़ता ही जा रहा है। वह एक सेंटीमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से बढ़ रही है। इससे लोगों की चिंता और डर और बढ़ रहा है। शनिवार पूरी रात लोगों ने तरह-तरह की आशंकाओं के बीच काटी। चौरीचौरा क्षेत्र में नई बाजार में भी बांध कट गया है। कई गांवों में पानी घुसने से परेशानी बढ़ती जा रही है। कसिहार के पास बंधे में रिसाव होने के कारण बड़ी गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी और लखीमपुर से 20 नावें और स्टीमर मंगाए गए हैं। एनडीआरएफ के 30 और जवान गोरखपुर पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने आसपास के अन्य जिलों से भी मदद मांगी है। रेलवे ने गोरखपुर से जगतबेला तक ऐतिहातन पेट्रोलिंग शुरू करा दी है। मखनहा बांध टूटने से रोहिन का पानी शहर के उत्तरी इलाके राजेंद्र नगर पश्चिमी से बरगदवा होते हुए कालोनियों में पहुंच गया। राप्ती का पानी बढ़ता ही जा रहा है। वह एक सेंटीमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से बढ़ रही है। इससे लोगों की चिंता और डर और बढ़ रहा है। शनिवार पूरी रात लोगों ने तरह-तरह की आशंकाओं के बीच बिताई। गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे बना गाहासाड़ उत्तरी कोलिया बांध सुबह 5 बजे मंझरिया गांव के सामने कट गया। इससे दस गांवों की आबादी बुरी तरह प्रभावित है। घुनघुन , मंझरिया , उतरासोत , टिकरिया , गोविन्दपुर , मझिगावा , बेला , जमुआड़ ,खरबुजहवा, डुहियां और मोहम्मदपुर सहित कई गांवों में पानी भर रहा है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति को जल्द ही कंट्रोल कर लिया जाएगा। बात दें कि नौसड़ बांध से शुक्रवार से ही रिसाव हो रहा था। गोरखपुर से लखनऊ जाने वालों को बाघागाड़ा होकर फोरलेन के रास्ते आना जाना पड़ रहा था। नौसड़ में बालू की बोरियों और अन्य उपायों से पानी रोकने की सभी कोशिशें बेकार हो रही हैं। गोरखपुर-बस्ती मंडल में बाढ़ से हालात अब बेकाबू होते जा रहे हैं। बीते 24 घंटे में चार लोगों की मौत हो गई है। गोरखपुर जिले में सवा लाख लोग संकट में हैं। उनकी मदद के लिए सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। एयरफोर्स की हेलीकॉप्टर टीम गुरुवार से ही मदद में लग गई है। सोनौली रोड पर शुक्रवार को भी रोडवेज बसें नहीं चलीं। वहीं मानीराम-पीपीगंज रेल मार्ग पर पानी लग गया है।
सेना ने 450 बाढ़ पीड़ितों को निकाला बाहर 
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बाढ़ की भीषण समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए भारतीय सेना ने भी कमान संभाल रखी है। सेना ने रविवार को उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित शहर गोरखपुर में फंसे लोगों को बचाया। सेना ने बाढ़ में फंसे 450 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया और पीड़ितों को खाने के पैकेट और राशन वितरित किए। मध्य कमान के जन संपर्क अधिकारी गारगी मलिक सिन्हा ने बताया, “सेना ने बाढ़ राहत कार्य के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष राव, मेजर विशाल, कैप्टन विशाल सिंह तथा कैप्टन संदीप पांडेय के नेतृत्व में तीन पार्टियों का गठन किया है। सेना ने गोरखपुर में मोहारीपुर, मनीराम और गई घाट में बाढ़ में फंसे लगभग 250 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।” उन्होंने कहा कि इस दौरान सेना ने लगभग एक हजार खाने के पैकेट और 500 किलोग्राम राशन सहित पानी और दवाओं का वितरण किया। उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को भी बाढ़ में फंसे 200 लोगों को सेना ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था और एक हजार खाने के पैकेट वितरित किए थे। एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार के आग्रह पर सेना की तीन टीमों को राहत और बचाव कार्यो में लगाया गया है। तीनों टीमें “बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।” तीनों टीमें साथ ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में लोगों को खाने के पैकेट, पानी, दवाइयां और राशन भी वितरित कर रही हैं। पिछले 24 घंटों में गोरखपुर के मोहरिपुर, मनिराम और गौ घाट इलाकों में 250 से अधिक लोगों को बचाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि 500 किलो राशन, बड़ी संख्या में पानी की बोतलें, दवाइयां और 1,000 खाने के पैकेट वितरित किए गए हैं। भारी बारिश और पड़ोसी देश नेपाल द्वारा छोड़े गए पानी के कारण आई बाढ़ से गोरखपुर, बलिया, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले कुछ दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं और राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं।
बिहार में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 200 के पार 
बीबीसी हिंदी के लिए मनीष शांडिल्य ने पटना से जानकारी दी है कि बिहार में बाढ़ से मरने वालों की संख्या दौ सौ का आंकड़ा पार कर गई है। बाढ़ से प्रभावित आबादी का आंकड़ा भी करीब एक करोड़ बीस लाख पहुंच गया है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने आंकड़े जारी किए जिनके मुताबिक बीते चैबीस घंटों में इस आपदा से 49 और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस साल की बाढ़ से बिहार में मरने वालों की संख्या बढ़कर 202 हो गई है। बीते चैबीस घंटों में सबसे ज्यादा मौतें सीतामढ़ी, अररिया, पश्चिम चंपारण और दरभंगा जिलों में हुईं. सीतामढ़ी में अठारह, अररिया में बारह जबकि पश्चिम चंपारण और दरभंगा में छह-छह लोगों की मौत बाढ़ के चपेट में आने से हुई। अभी सूबे के आधे से अधिक 20 जिले बाढ़ की चपेट में है। बाढ़ से करीब चैदह हजार मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य सरकार की तरफ़ से अभी तक करीब छह लाख पच्चीस हजार प्रभावित लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार अभी 1336 राहत शिविर चला रही है जिसमें करीब सवा चार लाख लोगों ने शरण ली है। साथ ही पांच जिलों में वायु सेना के हेलीकॉप्टर भी सूखा राशन गिरा रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मुआयना करने के बाद अररिया और पूर्वी चंपारण के कई हिस्सों में खाद्य सामग्री को हेलीकॉप्टर के ज़रिए पहुंचाने का आदेश दिया है। बाढ़ से प्रभावित इलाक़ों में लोगों की संपत्ति के हुए नुकसान का अभी कोई अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
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