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झारखंड भाजपा में घमासान, अपने ही सीएम की कुर्सी हिलाने में जुटे पार्टी सांसद, चल रहा समर्थक विधायकों संग बैठकों का दौर

रांची। भाजपा की सरकार बनने पर 28 दिसंबर, 2014 को रघुबर दास ने झारखंड के पहले गैर आदिवासी मुख्यरमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। झारखंड के 17 वर्षों के इतिहास में रघुवर दास सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले मुख्यमंत्री हैं। वो इस पद पर अब तक 948 दिन रह चुके हैं। हालांकि, जब से रघुवर दास झारखंड के गैर आदिवासी सीएम बने हैं तभी से उन्हे हटाए जाने की भी अटकलें चल रही हैं। इस साल 28 दिसंबर को रघुवर दास को सीएम बने तीन साल हो जाएंगे। इन तीन वर्षों में ऐसे कई मौके आए जब अटकलों ने जोर पकड़ा कि रघुवर दास की कुर्सी जानी तय है। एक बार फिर से अटकलें तेज हैं। इस बार झारखंड के भाजपा सांसद उनके विरुद्ध सक्रिय हैं। रांची से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि भाजपा आलाकमान झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन करने वाला है। लिहाजा, कई सांसद सीएम पद के दावेदारों में अपना नाम शामिल करा रहे हैं। इतना ही नहीं ये सांसद अपने-अपने समर्थक विधायकों के साथ ताबड़तोड़ बैठकें भी कर रहे हैं। कुछ सांसद तो ऐसे हैं जो सीएम पद की रेस में नहीं हैं लेकिन समर्थक विधायकों के साथ बैठक करने में भी पीछे नहीं हैं। पिछले दिनों रांची के सांसद रामटल चौधरी के दिल्ली स्थित आवास पर भी कुछ इसी तरह की बैठक हुई। हालांकि, चौधरी सीएम पद के दावेदारों में शामिल नहीं हैं लेकिन उनकी चाहत है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो। उधर, चर्चा यह भी है कि अगर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो रघुवर दास की पसंद नीलकंठ मुंडा होंगे। रामटल चौधरी द्वारा समर्थकों के साथ बैठक से पहले चतरा सांसद सुनील सिंह ने भी अपने घर पर झारखंड के विधायकों के साथ बैठक की थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुनील सिंह भी सीएम पद के दावेदार हैं। कोडरमा सांसद रविन्द्र राय का भी नाम चर्चा में है। उनके समर्थक उन्हें सीएम पद पर देखना चाहते हैं। राय प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि, जानकार मानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल किसी भी भाजपा शासित राज्य में नेतृत्व परिवर्तन करने को इच्छुक नहीं है। इस साल के आखिर में गुजराच, हिमाचल प्रदेश समेत कुछ राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं। लिहाजा, पार्टी आंतरिक उलझनों से हटकर इन राज्यों के चुनावों पर फोकस कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अगर किसी वजह से झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन होता भी है तो केंद्रीय नेतृत्व किसी सांसद की बजाय किसी विधायक को ही सीएम बनाना चाहेगा। बता दें कि इससे पहले दिनेश उरांव, शिवशंकर उरांव, सरयू राय आदि के नाम की चर्चा भी सीएम पद की रेस में चल रही थी। साभार जनसत्ता
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