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पढ़ें एक साथ पूरी खबरें, गोरखपुर में नौनिहालों की मौत के बाद पसरा हर ओर मातम, जानें किसने क्या कहा, क्या किया और क्या हुआ

मासूमों की मौत पर 28 घंटे बाद योगी ने तोड़ी चुप्पी, जिम्मेदारी के बजाय गिनाए आंकड़े, डिफेंसिव मोड में योगी सरकार, ये दलीलें दे रहे हैं सूबे के मंत्री, मंत्री-मुख्यमंत्री की पीसी के बाद भी कई अनसुलझे सवाल, ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी तो इतनी मौतें कैसे हो गईं, मृतकों के आंकड़ों में अंतर कैसे आ रहा है, सरकार की उदासीनता, गैस सप्लायर की भूमिका की जांच होगी, गोरखपुर में दोनों मंत्रियों की प्रेस कांफ्रेंस की खास बातें, 'एक के ऊपर एक लाशें पड़ी थीं', मासूमों की मौत से त्राहिमाम्, कौन है गुनहगार, क्या है ऑक्सीजन विवाद, कंपनी को किया गया आंशिक भुगतान, लेकिन..., पिछले वर्षों में भी हुई ऐसी मौतें, गंदगी की वजह से हुई मौत, फिर क्या हुआ 'स्वच्छता का शंखनाद' का, बीआरडी मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल सस्पेंड, मरीजों के परिजन मांगते रहे जिंदगी की मन्नत 
संकलन/संयोजन सूरज सिंह
गोरखपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 63 बच्चों की मौत के मामले पर चुप्पी तोड़ी है. योगी ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से मौत का मामला जघन्य है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर दुख जताया है और सभी तरह की मदद का आश्वासन दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और अनुप्रिया पटेल स्थिति पर निगाह रखने के लिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर गोरखपुर आए हैं. योगी ने सात अगस्त से बीआरडी कॉलेज में हुई मौत के आंकड़े भी सामने रखें. बताया कि 7 अगस्त को कुल 9, 8 अगस्त को कुल 12, 9 अगस्त को कुल 9, 10 अगस्त को 23, 11 अगस्त को कुल 11 मौतें हुईं. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जानकारी मिलते ही मैंने मंत्रियों को निरीक्षण के लिए भेजा और कहा कि मामले की पूरी जानकारी जुटाए ताकि चीजें साफ हो सके. योगी ने कहा कि तीन चीजें हमें पता लगानी हैं और इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं. पहला कि क्या सचमुच ऑक्सीजन की सप्लाई रूकने से मौत हुई हैं? और दूसरा कि मौत के सही आंकड़े क्या हैं. तीसरा की घटना के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों के साथ सरकार की संवेदना है. सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और उसकी रिपोर्ट दी गई है. विकास के किसी भी कार्य में कोई अनावश्यक व्यवधान न आने पाए. इसके बारे में विभाग को जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि सप्लायर की भूमिका की जांच के बारे मुख्य सचिव को आदेश दिया गया है. सही तथ्यों को अगर रख पाएंगे तो मानवता के लिए बेहतर होगा. ऑक्सीजन की कमी से अगर मौत हुई है तो ये जघन्य है. 9 अगस्त को मेरे साथ चिकित्सा शिक्षा मंन्त्री भी गए थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बीजेपी सरकार बनते ही हमने आदेश दिया था कि इमरजेंसी सेवाओं में कोई व्यवधान न आने पाए. गोरखपुर कांड बहुत संवेदनशील मसला है. इंसेफ्लाइटिस से लड़ते रहेंगे. उन्होंने कहा कि मैंने 2 बार बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज का दौरा किया और चीजों की जानकारी प्राप्त की. मुख्यमंत्री के बोलने के बाद माइक पकड़ने वाली केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जो घटना बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई है. उससे हम दुखी हैं. प्रधानमंत्री के निर्देश पर आई हूं. गोरखपुर के दौरे से आए दोनों मंत्रियों और मुख्यमंत्री के साथ बातचीत हो गई है. भारत सरकार हर तरह के सहयोग करने को तैयार है. साभार आजतक
डिफेंसिव मोड में योगी सरकार, ये दलीलें दे रहे हैं सूबे के मंत्री 
लखनऊ से शि‍वेंद्र श्रीवास्तव ने लिखा है कि गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में पिछले 6 दिनों से भीतर 63 मासूम बच्चों की मौत के बाद घमासान मच गया है. गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज 69 लाख रुपये का भुगतान ना होने की वजह से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई गुरुवार की रात से ठप कर दी थी. इसके बाद यहां ऑक्सीजन की कमी से 63 बच्चों ने दम तोड़ दिया, हालांकि अस्पताल प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी की बात से इनकार किया है. यूपी सरकार के मंत्री में इसे सरकारी लापरवाही का मामला नहीं मान रहे हैं. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने गोरखपुर की घटना पर कहा है कि विपक्षी दल हड़बड़ी में है और प्रदेश की सरकार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ यूपी सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी. यूपी सरकार में मंत्री आशुतोष टंडन का कहना है कि सीएम योगी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं, उन्होंने मुझसे और स्वास्थ्य मंत्री से घटना की पूरी जानकारी भी मांगी है. टंडन ने कहा कि हम गोरखपुर से लौटकर सीएम को पूरे मामले की रिपोर्ट देंगे. वहीं सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह की अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक की है. उन्होंने कहा कि विपक्ष को बच्चों की मौत पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी यूपी सरकार से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को गोरखपुर का दौरा कर मामले की जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं. विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर यूपी सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में गोरखपुर पहुंचा और पीड़ितों से मुलाकात की. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा है कि योगी सरकार मामले की सच्चाई छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक बच्चों का पोस्ट मार्टम किए बिना ही परिजनों को शव सौंप दिए गए ताकि सच सामने ना आ सके. अखिलेश यादव ने सरकार से पीड़ित परिजनों को 20-20 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की है. यूपी की पूर्व सीएम और बीएसपी चीफ मायावती ने गोरखपुर की घटना पर कहा है कि यूपी सरकार की जितनी निंदी जाए उतनी कम है. साभार आजतक
मंत्री-मुख्यमंत्री की पीसी के बाद भी कई अनसुलझे सवाल 
गोरखपुर से बीबीसी हिंदी के लिए समीरात्मज मिश्र ने लिखा है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से तीस से भी ज़्यादा बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने सफ़ाई दी है, लेकिन अब भी कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं. शनिवार को राज्य के चिकित्सा मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री दोनों गोरखपुर पहुंचे, वहां अधिकारियों से मुलाक़ात की. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निलंबित करने का फ़रमान सुनाया. इसके बाद दोनों मंत्री के लखनऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक करने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस को भी संबोधित किया. लेकिन गैस सप्लाई बंद होने संबंधी सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं आ पाया. यही नहीं, ऐसे और भी कई सवाल हैं जो उत्तर की मांग कर रहे हैं.  
ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी तो इतनी मौतें कैसे हो गईं? 
इस बारे में शुरू से सरकारी अधिकारियों की ओर से ही विरोधाभासी बयान आए कि दो दिन के भीतर इतने बच्चों की मौत कैसे हो गई? ज़िलाधिकारी बयान देते हैं कि मौत ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से हुई और ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है. स्वास्थ्य मंत्री ने भी तत्काल ट्वीट कर दिया कि मौत की वजह ये नहीं है लेकिन एक दिन बाद गोरखपुर पहुंचने पर स्वास्थ्य मंत्री ने ही अपने बयान में कुछ नरमी बरती और कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं हुई थी बल्कि कम यानी लो हो गई थी. वहीं गैस सप्लाई करने वाली कंपनी के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने बकाया पैसों के लिए प्राचार्य को पत्र ज़रूर लिखा था लेकिन गैस की सप्लाई बंद नहीं की थी. अधिकारियों का कहना है कि ये वो भी जानते हैं कि इससे क्या हो सकता है. लेकिन सवाल यही कि सब कुछ ठीक था तो बच्चे मरे कैसे?  
मृतकों के आंकड़ों में अंतर कैसे आ रहा है? 
सरकारी और ग़ैर सरकारी आंकड़ों की तो छोड़िए, सरकारी विभागों की ओर से भी बच्चों की मौत के जो आंकड़े अब तक आ रहे हैं, उनमें एकरूपता नहीं है. शुक्रवार को ज़िलाधिकारी की ओर से तीस बच्चों के मरने की ख़बर आई तो सीएमओ की ओर से 21 की. शनिवार को भी ये आंकड़े अपने-अपने तरीक़े से तैरते रहे. हालांकि बाद में ज़िलाधिकारी ने इस बात की पुष्टि की इस वॉर्ड में पिछले तीन-चार दिनों में मरने वालों की संख्या साठ है. लेकिन वहां मौजूद लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा है. सवाल ये है कि आंकड़ों को लेकर सरकार कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रही है?  
प्राचार्य की ग़ैर मौजूदगी पर भी उठ रहे हैं सवाल 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के लिए अगर ऑक्सीजन सप्लाई कटने की बात हो रही है तो इसमें दो अहम किरदार आ रहे हैं. एक तो गैस सप्लाई करने वाली फ़र्म और दूसरे मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आरएन मिश्र. फ़र्म ने प्राचार्य के ही नाम पत्र लिखा कि उन्हें क़रीब सत्तर लाख का भुगतान अब तक नहीं हुआ है और ऐसे में लंबे समय तक ऑक्सीजन की सप्लाई जारी नहीं रखी जा सकती है. बताया जा रहा है कि पत्र पहले ही भेजा गया था लेकिन घटना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी के साथ हुई बैठक में भी प्राचार्य ने इस बारे में कोई चर्चा नहीं की. यही नहीं, इस दौरान प्राचार्य न तो सामने आए और न ही किसी को फ़ोन पर उपलब्ध हो सके. पहले तो बताया गया कि वो छुट्टी पर गए हैं लेकिन उनके निलंबित होने की ख़बर के बाद ही वो कुछ चैनल पर अपना पक्ष रखते दिखाई दिए. प्राचार्य की ग़ैर-मौजूदगी भी कई सवाल खड़े कर रही है, ख़ासकर इसलिए कि मुख्यमंत्री ने जब ज़रूरत पड़ने पर कितनी भी बड़ी धनराशि अस्पताल को देने की बात कही, उस समय उन्होंने साठ-सत्तर लाख रुपये का ये मामला उनके सामने क्यों नहीं रखा?  
सरकार की उदासीनता 
मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इतनी बड़ी घटना हो जाए और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तो छोड़िए, स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी तक ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि आख़िर एकाएक इतनी मौतें कैसे हो गईं. बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से मौत का सिलसिला पिछले तीन दिन से चल रहा था, बावजूद इसके प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन गंभीर नहीं दिखे. आमतौर पर सिद्धार्थ नाथ सिंह उन मंत्रियों में से हैं जो सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस मामले में मृतकों के परिवार वालों के प्रति संवेदना जताने के लिए उन्होंने एक ट्वीट तक नहीं किया. यही मंत्री जी लखनऊ में भी नहीं थे और उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त थे. सवाल ये है कि नौनिहालों की मौत के कारणों को जानने और उन्हें बचाने की कोशिश ज़्यादा ज़रूरी थी या फिर शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत? साभार बीबीसी
गैस सप्लायर की भूमिका की जांच होगी 
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 30 बच्चों की मौत पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सफ़ाई दी है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के साथ लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी पूरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं. उन्होंने अस्पताल के अलग-अलग विभागों में भर्ती बच्चों की मौत के आंकड़े बताए. उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को 23 मौतें हुई हैं और हम तथ्यों को सही रूप में पेश करें तो मानवता की बड़ी सेवा होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही यह ख़बर सामने आई थी, सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे. वह रिपोर्ट आने वाली है. उन्होंने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी से मौत का मतलब जघन्य कृत्य है. कोई दोषी पाया जाता है तो किसी को बख़्शा नहीं जाएगा.' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गठन होने के साथ ही सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इमरजेंसी सेवाओं में कोई व्यवधान न आए. कोई फाइल किसी मेज़ पर तीन दिन से ज़्यादा न रुके. दवा या आवश्यक सुविधाओं के लिए किसी स्तर से धन की कमी न होने पाए. उन्होंने कहा, 'गैस सिलेंडर सप्लायर की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अगुवाई में जांच समिति बनाई गई है जो हफ़्ते भर में रिपोर्ट देगी. इस सप्लायर को पिछली सरकार ने 2014 में उन्हें आठ वर्ष के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया है.' मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 अगस्त को उस अस्पताल मैं इसीलिए गया था कि इंसेफ्लाइटिस से निपटने के इंतज़ाम किए जाने के बावजूद कहीं कहीं ऐसा तो नहीं कि मरीज़ भर्ती न किए जा रहे हों. वहां तीन घंटे अधिकारियों के साथ बैठक ली थी. लेकिन ऑक्सीज़न की कमी पर कोई बात उनके संज्ञान नहीं लाई गई. उन्होंने कहा, 'पूरा पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कुल 34 ज़िले हैं, जहां इन्सेफ्लाइटिस इस सीजन में उभरता है. 9 जुलाई को मैं गया था तो ये व्यवस्था सुनिश्चित की थी इसके उपचार की व्यवस्था हो और इसके लिए बेड आरक्षित हों.' इससे पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने गोरखपुर में अस्पताल का दौरा किया. इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल में गैस सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित ज़रूर हुई थी, लेकिन बच्चों की मौत इस वजह से नहीं हुई. इस बीच प्रधानमंत्री के दफ़्तर से ट्वीट किया गया कि प्रधानमंत्री लगातार इस घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं. वह केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के भी संपर्क में हैं. पीएमओ ने यह भी ट्वीट किया है कि केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और स्वास्थ्य सचिव गोरखपुर की घटना पर नज़र रखे हुए हैं. प्रदेश सरकार ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है. इसकी वजह पूछे जाने पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, 'कुछ तो वजह ही होगी तभी उन्हें निलंबित किया गया है.' उधर निलंबित प्रिंसिपल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने निलंबन से पहले ही घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा लिख लिया था. उन्होंने कहा है कि उनकी कोई ग़लती नहीं है. उन्होंने भी कहा है कि कोई भी मौत ऑक्सीज़न की कमी से नहीं हुई है. आशुतोष टंडन ने बताया कि प्रधान सचिव की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय जांच की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कार्रवाई की जाएगी.
गोरखपुर में दोनों मंत्रियों की प्रेस कांफ्रेंस की खास बातें 
अगस्त के महीने में यहां हर साल बच्चों की मौतें हुई हैं. अगस्त 2014 में यहां 567, अगस्त 2015 में 668 और 2016 में 587 मौतें हुई थीं. यानी हर रोज़ मौतों का आंकड़ा तीनों सालों में क्रमश: 18, 21.5 और 18.9 है.' 'यहां गोरखपुर के अलावा दूर-दूर से, बिहार और नेपाल से भी मरीज़ आते हैं. किसी भी मेडिकल कॉलेज में गांव के लोग आख़िरी स्टेज में ही बच्चों को इलाज़ के लिए लेकर आते हैं.' 'गैस सप्लाई बाधित होने का विषय आ रहा था. हमने जांच शुरू की तो रिकॉर्ड्स में देखा कि बच्चों की मौत किस कारण से हुईं. कुछ मौतें एईएस, इनफेक्शन और कुछ मौतें इसलिए हुईं क्योंकि बच्चे कमज़ोर पैदा हुए थे. एक बच्चे का लीवर फेलियर हुआ था.' 'हमने गैस सप्लाई से जुड़े काग़ज़ भी देखे. लिक्विड गैस सप्लाई कम होने की बीप 10 तारीख़ को साढ़े सात बजे से शुरू हुई. ऐसी स्थिति में व्यवस्था होती है कि गैस सिलेंडरों से सप्लाई ली जाती है. ये व्यवस्था तुरंत शुरू हो गई थी. लेकिन ये व्यवस्था 11.30 बजे तक ही चल सकी, क्योंकि गैस सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. 11.30 से 1.30 बजे तक एम्बुपैड्स पंप करना शुरू किया गया. 1.30 बजे बाक़ी गैस सिलेंडर की सप्लाई आ गई थी. अब भी सिलेंडरों से सप्लाई चल रही है.' 'लेकिन 7.30 से लेकर 10.05 बजे के बीच सात बच्चों की मौतें हुईं, मगर उस वक़्त गैस सप्लाई की कमी नहीं थी. अगली मौत 11 तारीख को सुबह 5.30 बजे हुई. जब सप्लाई बाधित थी और अम्बु सिस्टम से पंप किया जा रहा था, तब मौतें नहीं हुईं. ये बातें हमने रिकॉर्ड में पाई हैं.' स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 जुलाई और 9 अगस्त को इस अस्पताल के दौरे पर गए थे. उनके सामने बातचीत में ऑक्सीज़न सप्लाई का मामला आना चाहिए था, लेकिन किसी ने इस बारे में बात नहीं की. आशुतोष टंडन ने कहा, 'गैस सप्लाई करने वाले डीलर का कुछ भुगतान बाक़ी था. एक अगस्त को इस बारे में चिट्ठी लिखी गई थी. 5 तारीख को लखनऊ में डीजी के दफ़्तर से भुगतान भेजा गया था. 7 तारीख को भुगतान कॉलेज के खाते में आया, लेकिन डीलर का कहना है कि उसको भुगतान 11 तारीख को मिला. भुगतान में देरी की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है.'  
'एक के ऊपर एक लाशें पड़ी थीं' 
गोरखपुर से बीबीसी हिंदी के लिए समीरात्मज मिश्र ने लिखा है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 100 नंबर वार्ड को कौन नहीं जानता. इंसेफ़ेलाइटिस के मरीजों के लिए बनाया गया यह वार्ड साल भर ख़ासकर बरसात के मौसम में खबरों में बना रहता है. 30 बच्चों की मौत की घटना के बाद शनिवार की सुबह जब हम अस्पताल पहुंचे तो वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजन फ़र्श और सीढ़ी पर लेटे नजर आए. जिनके बच्चों की हालत गंभीर थी और जिन्हें गहन चिकित्सा कक्ष यानी आईसीयू में रखा गया था, उनके चेहरे मुर्झाए हुए थे. शायद वे रातभर सोए नहीं थे. इस वार्ड में बाहर से लेकर भीतर तक इमरजेंसी तक, जिनसे भी मेरी बात हुई, सभी ने दबी जुबान से यहां होने वाली गंभीर लापरवाहियों का ज़िक्र किया. कुशीनगर से आईं समीना अपने नाती को लेकर चार दिन से अस्पताल में हैं. वह बताने लगीं, "बंबई से आई है बेटी. उसका तीन साल का बेटा अचानक बीमार हो गया. यहां लाए तो पता चला कि मस्तिष्क ज्वर हो गया है. चार दिन से मुंह में और नाक में नली लगी है. क्या इलाज हो रहा है, कोई बताने वाला नहीं." अकेली समीना ही नहीं, बल्कि इस तरह की शिकायत करने वाले कई और लोग मिले. शुक्रवार को यह वार्ड उस समय सुर्खियों में आया जब कथित प्रशासनिक लापरवाही के चलते 30 बच्चों की मौत की ख़बरें आईं. बताया जा रहा है कि अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन ख़त्म हो गई और अस्पताल प्रशासन ने ये बात जानते हुए भी अतिरिक्त ऑक्सीजन का कोई इंतज़ाम नहीं किया था. मौत का आंकड़ा 30 बताया जा रहा है जबकि स्थानीय अख़बार यह संख्या 50 तक बता रहे हैं. एक बुज़ुर्ग महिला स्थानीय भोजपुरी भाषा में बताने लगीं कि वैसे तो रोज़ यहां दस-बीस बच्चे मरते हैं, लेकिन शुक्रवार को तो एक के ऊपर एक लाशें पड़ी थीं. महिला के साथ खड़े लोगों ने दबी आवाज़ में बताया, "पचासों बच्चे मर गए कल, कोई पूछने वाला नहीं." वहीं, अस्पताल प्रशासन बच्चों की मौत के लिए ऑक्सीजन की कमी को वजह नहीं बता रहा है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने मीडिया में आ रही इस ख़बर को सीधे तौर पर भ्रामक बताया है. जबकि मीडिया के पास ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को लिखा वो पत्र भी है जिसमें बक़ाया भुगतान करने की बात कही गई है. कंपनी ने बकाया भुगतान न होने के कारण और ऑक्सीजन देने में असमर्थता जाहिर की थी. मुन्नी देवी शुक्रवार की सुबह अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची थी. उनके बच्चों को डायरिया हो गया है. उन्होंने बताया, "बच्चे की हालत गंभीर है. उसे नली के ज़रिए ऑक्सीजन दिया जा रहा है." फ़िलहाल मुन्नी देवी को इस बात का संतोष ज़रूर है कि उनके बच्चे की हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन शुक्रवार की हृदय-विदारक घटना को याद कर वह रो पड़ीं.साभार बीबीसी  
मासूमों की मौत से त्राहिमाम्, कौन है गुनहगार? 
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग व मेडिसिन के वार्डों में ऑक्सीजन की कमी से 48 घंटे में 48 की मौत से कोहराम मच गया। खबर और भी हृदय विदारक इसलिए हो जाती है क्योंकि मरने वालों में बाल रोग वार्ड के 30 मासूम भी शामिल हैं। बता दें कि गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है और दुर्घटना से सिर्फ दो दिन पहले उन्होंने इस अस्पताल का दौरा भी किया था। लेकिन उस वक्त मुख्यमंत्री को ऑक्सीजन से संबंधित विवाद के बारे में जानकारी नहीं दी गई।  
क्या है ऑक्सीजन विवाद? 
खबरों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में मौतों के लिए ऑक्सीजन की कमी कारण है, लेकिन अस्पताल और जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी को सिरे से खारिज किया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विभिन्न चिकित्सीय कारणों से ज्यादातर मरीजों की मृत्यु हुई है। अस्पताल को ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स ने पिछले बकाए को लेकर अस्पताल प्रशासन को चिट्ठी लिखी थी। कंपनी की ओर से एक अगस्त को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया कि 'उस तिथि तक 6365702 रुपया बकाया है।' चिट्ठी में यह भी कहा गया कि उक्त कंपनी INOX कंपनी से गैस की आपूर्ति ले रही है और उन्होंने भी भुगतान न होने पर भविष्य में सप्लाई करने में असमर्थता जतायी है। चिट्ठी में निवेदन भी किया गया कि भुगतान अविलंब सुनिश्चित करें, भुगतान न होने की स्थिति में भविष्य में ऑक्सीजन सप्लाई करने में असमर्थ होंगे। इस चिट्ठी की प्रतिलिपि अस्पताल प्रशासन के अलावा जिलाधिकारी, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश को भी भेजी गई थी।  
कंपनी को किया गया आंशिक भुगतान, लेकिन... 
10 और 11 अगस्त को कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के कारण 48 की जान चली गई। 33 मौत के बाद कंपनी को 53 लाख का भुगतान किया गया है। अस्पताल प्रशासन और सरकार की तरफ से बार-बार कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण यह हादसा नहीं हुआ है। उधर पुष्पा सेल्स की एचआर मीनू वालिया ने भी ऑक्सीजन की सप्लाई रोके जाने के कारण हादसे की बात से इनकार किया है। उन्होंने ऑक्सीजन की सप्लाई रोके जाने से इनकार करते हुए यह भी शिकायत की बार-बार बकाया भुगतान के लिए कहे जाने के बावजूद बात को नहीं सुना गया। बता दें कि पुष्पा सेल्स को राज्य की पिछली अखिलेश सरकार ने ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए 8 साल का कॉन्ट्रेक्ट दिया था।
पिछले वर्षों में भी हुई ऐसी मौतें 
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ऑक्सीजन की कमी से मौत होने की बात से तो इनकार करते हैं। लेकिन साथ ही यह याद दिलाना नहीं भूलते कि पिछले सालों में भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह से मौतें होती रही हैं। उन्होंने बताया 'साल 2014 में इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 19 मौतें हुई थीं। साल 2015 में 22 मौत प्रतिदिन और 2016 में भी 19 मौत प्रतिदिन इस अस्पताल में हुई थीं।' उन्होंने बताया कि यह इसलिए होता है, क्योंकि अस्पताल ऐसे मरीजों को भर्ती करता है, जिनकी स्थिति नाजुक होती है। यहां गोरखपुर से ही नहीं नेपाल और बिहार से भी मरीज आते हैं।
गंदगी की वजह से हुई मौत! 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इस मामले पर बोलते हुए कहा कि बच्चों की मौत गंदगी की वजह से हुई है। जबकि पिछले दो दिन से बच्चों की मौत का विलन ऑक्सीजन की कमी को बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बच्चों की मौत के लिए गंदगी को विलेन बना दिया और कहा कि स्वच्छता की जिम्मेदारी सरकार के साथ ही समाज की भी है। बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन दिनों इंसेफ्लाइटिस का प्रकोप है और जिनकी मौत हुई है उनमें से ज्यादातर इसी बीमारी से ग्रसित थे। दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को बर्खास्त कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार जब 9 अगस्त को मुख्यमंत्री इस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दौरे पर गए थे तो उन्हें किसी तरह की परेशानी के बारे में नहीं बताया गया था। भले ही ऑक्सीजन की कमी से मासूमों की जान गई हो या 'गंदगी' के कारण, स्पष्ट है कि लापरवाही तो हुई है। अगर लापरवाही हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।
फिर क्या हुआ 'स्वच्छता का शंखनाद' का...? 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' को आगे बढ़ाते हुए पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'स्वच्छता का शंखनाद' नाम से एक सफाई अभियान की शुरुआत की। लेकिन आज जब उनके गृह जनपद के एक अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा 50 के पार पहुंचा तो वे गंदगी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वह भी इसी 'स्वच्छता का शंखनाद' कार्यक्रम में। इंसेफ्लाइटिस जैसी बीमारी मानसून के मौसम में ज्यादा फैलती है, इसके चलते राज्य सरकार ने प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून सफाई योजना तैयार की थी। 'स्वच्छ ग्राम, स्वच्छ प्रदेश' नाम से यह कार्यक्रम सभी 75 जिलों के करीब एक लाख गांवों में यह अभियान चलाया जा रहा है। सरकार योजनाएं तो बना सकती है, लेकिन अपने आसपास सफाई रखने की जिम्मेदारी हम सबकी भी है। भले ही गंदगी हो या ऑक्सीजन की कमी, लेकिन इन मौतों के लिए जिम्मेदारी तो तय करनी ही होगी। इस पूरे मामले में Jagran.Com ने पुष्पा सेल्स से बात करने की कोशिश की। कंपनी की वेबसाइट पर उसके लखनऊ दफ्तर का फोन नंबर 9794300999 दिया गया है, जिस पर घंटी तो जा रही है, लेकिन कोई फोन नहीं उठा रहा। कंपनी के दिल्ली दफ्तर के फोन नंबर 9810269435 पर भी हमने कॉन्टेक्ट किया, लेकिन यहां भी किसी ने फोन नहीं उठाया। यहां तक कि जिस लैटर हेड के माध्यम से ऑक्सीजन के भुगतान के लिए कंपनी ने प्रशासन को चिट्ठी लिखी, उसमें दर्ज फोन नंबर बंद पड़े हैं और एक लैंडलाइन तो मौजूद ही नहीं है। हमने इस बारे में गोरखपुर के डीएम से भी बात करने की कोशिश की लेकिन कॉल लगने के बावजूद हमें डीएम तक नहीं पहुंचने दिया गया। कभी बताया गया कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं तो कभी कुछ और। गैर आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बीआर कॉलेज के प्रिंसिपल की पत्नी पुष्पा सेल्स से कमीशन के तौर पर पैसे की मांग कर रही थी। जिसके चलते भुगतान को लेकर मामला अटका हुआ था। प्रिंसिपल की जगह अनौपचारिक तौर पर सारा कॉलेज का सारा ट्रांसफर और पोस्टिंग उनकी पत्नी ही देख रही थीं। By Digpal Singh (साभार जागरण)
बीआरडी मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल सस्पेंड 
यूपी के गोरखपुर में बीआरडी अस्पताल में 36 बच्चों की दर्दनाक मौत पर यूपी सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि ऑक्सिजन सप्लाइ की कमी के कारण बच्चों की मौत नहीं हुई है। यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने शनिवार को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कुछ घंटों के लिए ऑक्सिजन की सप्लाइ जरूर बाधित हुई थी, लेकिन मौत का कारण गैस सप्लाइ में बाधा नहीं है। उन्होंने साथ ही कहा कि मामले में लापरवाही बरतने के कारण कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि वह गोरखपुर की घटना पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'वह केंद्र और यूपी सरकार के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव गोरखपुर में मामले पर नजर रखेंगे।'  
मरीजों के परिजन मांगते रहे जिंदगी की मन्नत 
गोरखपुर से नवभारत टाइम्स के लिए दिनेश मिश्र ने लिखा है कि मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होने से मौत का सिलसिला जो शुरू हुआ वह शुक्रवार की शाम को भले ही थम गया, लेकिन जिनके अपने चले गए उनके आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। मौत होने के बाद शवों को अंतिम-संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया, वहीं मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों के परिजनों का बुरा हाल है। पूर्वांचल के मासूमों को निगल रहे जापानी बुखार के शिकार बच्चों को गोद में लेकर जिंदगी की आस में रोते-बिलखते परिजनों के आने का क्रम शुक्रवार रात भी जारी रहा। जब एनबीटी के संवाददाता ने शुक्रवार रात मेडिकल कॉलेज के जापानी बुखार वार्ड का दौरा किया जहां लिक्विड ऑक्सीजन के खत्म होने के बाद चार मासूमों की सबसे पहले मौत हुई। इस वार्ड में मातमी सन्नाटे के बीच मन्नत का दौर चलता दिखा। मेडिकल कॉलेज के 100 नंबर वार्ड में गंभीर मरीजों को देखते हुए ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने का काम जारी थी। वार्ड में एक साथ 16 ऑक्सीजन सिलिंडर लगे जो चंद घंटों में ही खत्म हो गए। एक बार फिर डॉक्टर और स्टाफ ने सिलिंडर के जुगाड़ में इधर-उधर दौड़ लगाना शुरू करदिया। यह सब देखकर जापानी बुखार वार्ड के बाहर भर्ती मरीजों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। उन्हें यह डर सता रहा था कि कहीं मौत उनके बच्चे को भी न डस ले। गुलरिहा इलाके नरकटवां गांव के निवासी चुनमुन ने बताया कि दो दिन पहले उनके 3 वर्षीय बेटे सुजीत की तबीयत अचानक खराब हो गई। पहले वह उसे पीपीगंज इलाज के लिए ले गए। जहां पर आराम न मिलने पर बच्चे को भटहट स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। डाक्टरों ने उसे बीआरडी रेफर कर दिया। यहां के जापानी बुखार वार्ड में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को जब यह पता चला कि लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो गया है तो परिजन बच्चे की चिंता में रोने लगे। ऐसा ही हाल सिरसिया कुशीनगर से आए मनोज गौड़ का भी था। एक साल की बेटी आर्या को लेकर आए मनोज और उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। कुशीनगर जिले के कप्तानगंज निवासी बृजेश भी 3 साल की बेटी सरोज को लेकर 8 दिन पहले मेडिकल कॉलेज में हैं। अभी तक उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ है। वह लगातार ऑक्सीजन के भरोसे जिंदा है। शुक्रवार को पता चला कि यहां पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने की वजह से कई मौते हुई हैं। तभी से पूरा परिवार सरोज की सलामती की दुआएं मांग रहा है। साभार एनबीटी
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Item Reviewed: पढ़ें एक साथ पूरी खबरें, गोरखपुर में नौनिहालों की मौत के बाद पसरा हर ओर मातम, जानें किसने क्या कहा, क्या किया और क्या हुआ Rating: 5 Reviewed By: न्यूज़ फ़ॉर ऑल