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उग्र हुआ किसानों का आंदोलन, मंदसौर की आग में झुलसा एमपी, 100 ज्यादा गाड़ियों को आग में झोंका

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मंदसौर में पुलिस फायरिंग में छह किसानों के मारे जाने के बाद बवाल थमने के बजाए और बढ़कर राज्य के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया। मंदसौर और पिपलिया मंडी में कर्फ्यू के बावजूद आंदोलन कर रहे किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। मंदसौर में डीएम से मारपीट की गयी, पत्रकारों पर भी हमला हुआ। उस फैक्ट्री को जलाया गया जहां कुछ दिन पहले कुछ किसानों के साथ हाथापाई हुई तो देवास में थाने में आगजनी की कोशिश हुई है। कई जगह हाइवे पर जा रही गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया। कुल मिलाकर अब 100 से ज्यादा गाड़ियों को जलाया गया है। नीमच, उज्जैन, देवास और मंदसौर भी स्थिति पर काबू पाने के लिए राज्य के गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षाबलों की मांग की है। अब केंद्र सुरक्षाबलों की पांच बटालियन भेज रहा है। इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच आज सुबह मृतक किसानों का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान लोगों का भारी हूजूम उमड़ा हुआ था। यहां एक किसान की शवयात्रा भी निकाली गई थी, इस दौरान उसके शव को तिरंगे से लपेट कर रखा गया था। हालात बिगड़ने के बाद कल देर रात प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतक किसानों के परिवार वालों को एक-एक करोड़ रुपए देने का एलान किया। पहले ये राशि केवल 10 लाख रुपए थी। वहीं गंभीर रुप से घायल लोगों को पांच-पांच लाख रुपए की मदद देने का भी सीएम ने एलान किया। मध्य प्रदेश में दो जून से किसान आंदोलन कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के किसानों की मांग है कि उन्हें उनकी फसलों की सही कीमत मिले और कर्जमाफी हो। तीन जून को शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मिलकर मामला सुलझने का दावा किया था। जिसके बाद एक धड़े ने आंदोलन वापस भी ले लिया था। लेकिन बाकी किसान विरोध प्रदर्शन पर अड़े रहे। कल प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबल आमने-सामने आए। इसके बाद दोनों ओर से पथराव हुआ और फिर गोलियां चली, जिसमें पांच किसानों की मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गोलियां सीआरपीएफ की तरफ से चलीं वहीं राज्य सरकार कह रही है कि उसने गोली चलाने के आदेश ही नहीं दिए।  
सरकार के गले की हड्डी बना कर्ज माफी! 
कर्जमाफी की मांग को लेकर शुरू हुआ किसानों का आंदोलन और उग्र हो गया है। राज्य सरकार इसे विपक्ष की साजिश बता रही है। तो दूसरी तरफ विपक्ष इस आंदोलन को मौके की तरह देख रहा है। उधर महाराष्ट्र में चार किसानों की आत्महत्या की खबरों के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़णवीस सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। मध्य प्रदेश के मंदसौर में गोली लगने से 6 किसानों की मौत ने किसान आंदोलन को और भड़का दिया है। गुस्साए किसानों ने पिपलिया मंडी में फाइबर फैक्ट्री को आग के हवाले कर दिया। किसानों को समझाने बुझाने पहुंचे मंदसौर कलेक्टर के साथ भी धक्कामुक्की की गई। राज्य सरकार की ओर से एक करोड़ के मुआवजे का एलान भी किसानों के गुस्से को शांत करने में नाकाम रहा है। मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दे की तलाश कर रहे विपक्ष को किसान आंदोलन में बड़ा मौका दिख रहा है। कांग्रेस ने आज मध्यप्रदेश बंद किया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंका। विपक्ष शिवराज सिंह से इस्तीफा मांग रहा है। सरकार को मंदसौर में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गोलीबारी में राजनीतिक साजिश की बू आ रही है। वहीं सरकार ने न्यायिक जांच का ऐलान किया है। हालांकि पुलिस ने माना उसकी तरफ से गोली चली है। बीजेपी की परेशानी मध्यप्रदेश ही नहीं है। किसान आंदोलन महाराष्ट्र में भी जारी है। खबर है कि महाराष्ट्र में 4 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान आंदोलन से केंद्र सरकार के माथे पर भी बल पड़ गए हैं। किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक बैठक की है। इस बैठक में हालाक का जायजा लिया। किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार की नजर है और पीएम मोदी ने इसके लिए मंत्रियों के साथ बैठक की है। बैठक में राजनाथ, सुषमा, गडकरी समेत कई मंत्री शामिल थे। वहीं शिवराज सरकार ने भीइस मामले पर इमरजेंसी बैठक बुलाई थी। जहां शिवराज सरकार ने किसानों के लिए कई ऐलान किए। शिवराज सरकार के एलान के तहत किसानों को बाजार से लाभकारी मूल्य दिलाने का वादा करते हुए फसल के मूल्य के लिए 1000 करोड़ का कोष दिया है। साथ ही किसानों को आश्वासित किया गया है कि सरकार दवारा कर्ज का समाधान कुछ ही दिनों के भीतर किया जाएगा। इतना ही नहीं शिवराज सरकार ने यह भी एलान किया है कि कर्ज ना चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ होगा औऱ फसल के लिए कर्ज एकमुश्त दिया जाएगा। साथ ही किसानों के लिए कृषि विपणन आयोग के गठन का ऐलान किया गया है। किसानों को भुगतान के लिए बैंक में नकदी सुनिश्चित की जाएगी। कृषि मंडी में किसानों को 50 फीसदी नकद भुगतान और बाक़ी आरटीजीएस से की जाने की बात कहीं है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र में कर्जमाफी की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल 7वें दिन भी जारी है। शिवसेना ने भी कहा कि वो किसानों के साथ है और कर्ज माफी के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाएगी। लेकिन लगातार 7 दिनों से हड़ताल के चलते सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। किसान की मुख्य मांग है कि उनका पूरा कर्ज माफ किया जाए। साथ ही किसान फसलों की बेहतर कीमत, सस्ती बिजली और स्वामीनाथ कमिटी की सिफारिशें लागू करने जैसी मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश दोनों में राज्य सरकारों ने किसानों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें थी कि चकबंदी के बाद बची और बंजर जमीन किसानों में बंटी जाएं। गैर कृषि कार्यों के लिए खेती और जंगल की जमीन कॉरपोरेट्स को ना दी जाएं। खेती की जमीन की बिक्री रेगुलेट करने के लिए सिस्टम बनें। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने एलान किय़ा था कि किसानों का 30,000 करोड़ का कर्ज माफ होगा और इस कर्ज माफी से 34 लाख किसानों को कर्ज माफी का फायदा मिलेगा। मराठवाड़ा, विदर्भ के 80 फीसदी किसानों को फायदा मिलेगा और ऋण माफी के लिए एक समिति के गठन का फैसला हुआ है। गौरतलब है कि 2008-09 के बजट में किसानों के कर्ज माफ किए गए है। 3 करोड़ छोटे, सीमांत किसानों का पूरा कर्ज माफ किया है। पूरे कर्ज माफ करने में 50,000 करोड़ खर्च हुआ था। बाकी किसानों के लिए 25 फीसदी छूट के साथ सेटलमेंट स्कीम लाई गई थी और इस सेटलमेंट स्कीम पर 10,000 करोड़ का खर्च आया था। हालांकि आरबीआई ने कर्ज माफी की योजना का विरोध किया था। बैंकों पर बोझ डालने के बजाए बजट में कई सालों तक अलग से फंड लाए गए। सरकार पर बोझ कम करने के लिए आरबीआई ने सरकार को ज्यादा कर्ज दिया। वहीं साल 1990 में वीपी सिंह ने किसानों का 10,000 रुपये तक का कर्ज माफ किया था। किसानों की कर्ज माफी पर 10,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था और बैंकों को किसानों को कर्ज माफी की चोट सहनी पड़ी थी। सवाल है कि क्या विपक्ष किसान आंदोलन को एक बड़ा मुद्दा बनाने में कामयाब हो रहा है। और क्या आंदोलन मोदी सरकार के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। साभार एबीपी/आवाज
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