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भैंसे का मांस महंगा, एक सप्ताह में 14 प्रतिशत चढ़े दाम

मुंबई (दिलीप कुमार झा)। पिछले एक सप्ताह में भैंसे के मांस की कीमतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा तक का इजाफा हो चुका है। सरकार द्वारा बूचडख़ानों के लिए मवेशियों की बिक्री पर प्रतिबंध के बीच आपूर्ति में कमी के कारण ऐसा हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी के आसपास भैंसे का मांस 150-160 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 15-20 रुपये का इजाफा हुआ है। 24 मई को सरकार द्वारा जारी अधिसूचना से पहले भैंसे का मांस 135-140 रुपये के बीच उपलब्ध था। इस अधिसूचना में सरकार ने बूचडख़ानों में वध के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है। हालांकि बूचडख़ानों के लिए मवेशियों की बिक्री पर रोक लगाने का उद्देश्य देश में कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहे अवैध बूचडख़ानों को नियंत्रित करने के अलावा सीमा पार बिक्री को रोकना है लेकिन इससे 10 अरब डॉलर के निर्यात वाले स्थानीय मांस और चमड़ा उद्योग पर बुरी तरह मार पडऩे की आशंका है। इसके अलावा इस एक ही आदेश के जरिये इन दोनों उद्योगों के लाखों कुशल और अकुशल कर्मचारी बेरोजगार होने के कगार पर आ गए हैं। खुदरा मांस विक्रेता और निर्यातक जकारिया एग्रो प्रा.लि. के बुशरान जकारिया ने कहा कि आज यहां भैंसे के मांस के दाम करीब 160 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बोले जा रहे हैं। यह करीब एक हफ्ते पहले के मुकाबले 20 रुपये के इजाफे का इशारा कर रहे हैं। हालांकि अभी आपूर्ति हो रही है लेकिन कम मांग में। कमजोर उपलब्धता की वजह से भैंसे के मांस निर्यात में भी पिछले कुछ हफ्तों में गिरावट आई है। भैंसे के मांस की कीमतों के साथ ही चिकन और भेड़-बकरी के मांस की कीमतों में भी स्थानीय बाजारों में 20-30 रुपये प्रति किलोग्राम की उछाल आई है। भैंसे के मांस के उपभोक्ताओं द्वारा चिकन और भेड़-बकरी के मांस की ओर रुख करने से इसकी मांग बढऩे के कारण दामों में यह उछाल आई है। इस मंद आपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय निर्यातक हाजिर बुकिंग के लिए विदेशी खरीदारों से प्रति टन 50-70 डॉलर ज्यादा की मांग कर रहे हैं। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) से पंजीकृत वाशी स्थित मांस उत्पादक एमयूएन एग्रो इंडस्ट्रीज प्रा.लि. के निदेशक जुबैर नगानी के मुताबिक जब से बूचडख़ानों पर प्रतिबंध की बात शुरू हुई है, तब से सभी मांस उत्पादों के दामों में 20 प्रतिशत तक की उछाल आ चुकी है। राजनीतिक संबंध रखने वाले लोगों द्वारा बूचडख़ानों के पशु खरीदारों की पिटाई की वजह से बुचडख़ानों के लिए पशुओं की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भैंसे और अन्य पशुओं के मांस की कीमतें बढ़ गई हैं। एक माह की डिलिवरी वाले जीवित मवेशियों की वायदा कीमत 24 मई के बाद से 5.2 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। फिलहाल यह प्रति पौंड 126.2 अमेरिकी सेंट पर चल रही है। 2017 के कैलेंडर वर्ष में वायदा कारोबार में 8.7 प्रतिशत की उछाल नजर आई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के निदेशक अजय साही ने कहा कि मांस आपूर्ति की करीब 90 प्रतिशत खरीद बाजार-हाट में की जाती है। हालांकि चमड़ा उद्योग ने बाजार-हाट से अपने कच्चे माल की खरीद के कोई पुख्ता आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए हैं, फिर भी हमारा मानना है कि चमड़ा उपभोग का एक बड़ा हिस्सा कच्चे माल की आपूर्ति के लिए बाजारों पर ही निर्भर रहता है। इस कारण मवेशियों के वध पर रोक का असर दिखने में महीनों लग जाएंगे। हम उद्योग की चिंता के संबंध में सरकार को लिख चुके हैं। हमें भरोसा है कि सरकार का इस पर सकारात्मक रवैया होगा खासतौर पर ऐसे समय में कि जब रोजगार सृजन प्राथमिकता में हो। पिछले साल के मुकाबले अप्रैल में भारत का भैंसे का मांस निर्यात 11.4 प्रतिशत गिरकर 86,119 टन पर आ गया है। एक सरकारी संस्था का कहना है कि मार्च में बूचडख़ानों की हड़ताल और रुपये में मजबूती की वजह से निर्यात पर असर पड़ा है। मुंबई स्थित एक निर्यातक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मार्च में बूचडख़ानों की हड़ताल से आपूर्ति में कमी आई। अप्रैल में भी कई बूचडख़ाने अपनी पूरी क्षमता पर परिचालन करने में नाकाम रहे। उल्लेखनीय है कि भैंसे के मांस निर्यात में भारत विश्व का सबसे बड़ा निर्यातकर्ता है। बिना लाइसेंस वाले बूचडख़ानों पर कानूनी कार्रवाई होने के बाद उत्तर प्रदेश में बूचडख़ाने और मांस विक्रेता मार्च में हड़ताल पर चले गए थे। भैंसे के मांस निर्यात की दृष्टिï से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य माना जाता है। हाल में मोदी सरकार ने वध के लिए पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है। अब इनका व्यापार केवल जुताई और डेयरी उत्पादन के लिए ही हो सकेगा। 2017 में रुपये में पांच प्रतिशत का सुधार हुआ है जिसने निर्यातकों के मुनाफे को कम कर दिया है। उधर, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने एक बयान में कहा है कि अप्रैल में भारत का बासमती चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले 15.6 प्रतिशत बढ़कर 3,89,406 टन हो गया जबकि गैर बासमती चावल का निर्यात 18.5 फीसदी गिरकर 4,75,050 टन पर आ गया।
साभार बीएस हिन्दी
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