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एनीमिया से बचने के लिए डॉ.स्वतंत्र जैन ने इजाद किए अचूक फार्मूले, पढ़ें और अपनाएं और बीमारियों से राहत पाएं

नई दिल्ली। विभिन्न असाध्य रोगों का उपचार कर ख्याति हासिल करने वाले डा.स्वतंत्र जैन ने एनीमिया से बचने के कई फार्मूले इजाद किए हैं। डा.जैन के फार्मूलों को अपनाने वाले मरीजों का दावा है कि यदि ख्यातिप्राप्त चिकित्सक डा.स्वतंत्र जैन के बताए मार्गों पर विधिपूर्वक चला जाए तो एनीमिया जैसी घातक बीमारी से बचा जा सकता है। एक सर्वे के अनुसार हमारे देश में 50% से ज्यादा महिलाऐं और बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। एनीमिया के कारण खून की कमी, नई रक्त कोशिकाओं का कम बनना, शरीर से रक्त की निरंतर कमी, खून में लाल कोशिकायें कम होना, नसों की दुर्बलता, कमजोर पाचन, थकावट, कमजोरी, नपुंसकता, टी.बी रोग में अति कमजोरी, ताकत में कमी, भूख न लगना, पेट में दर्द, त्वचा सफ़ेद मोम की तरह चमकदार दिखना, बच्चे का चिड़चिड़ापन और शरीर की रोग प्रतिरोधकता कम हो जाती है। देश के चर्चित चिकित्सक डा.स्वतंत्र जैन ने एनीमिया के लिए कई अहम प्रयोग बताए हैं, जो इस घातक बीमारी से मरीज को निजात दिला सकती है। डा.जैन के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले आप सल्फर 200 को कुल्ला करके 7 बजे, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें। होम्योकाम्ब नं. 10 की दो गोली दिन में तीन से चार बार तक ली जा सकती है। इसके साथ ही बायो काम्बिनेशन नं. 01 की 6 गोली गुनगुने पानी से या चूस कर दिन में 3 बार कम से कम दो से तीन माह तक लेना चाहिये। डा.जैन बताते हैं कि अगर किसी को लम्बे समय तक मलेरिया बुखार रहने और कुनेंन खाने के बाद एनीमिया हो गया हो, तो वह नेट्रम मूर 30 की पांच बूँद आधा कप पानी से दिन में तीन बार ले। साथ ही चाइना Q की दस बूँद आधा कप पानी में खाने के आधा घंटे पहले ले। सरकार को चाहिये कि वह बच्चों और महिलाओं को आयरन की गोली बांटने की जगह बायो काम्बिनेशन नं. 01 की सस्ती, निर्दोष और अहानिकर गोली दे, जो शीघ्र ही पच जाती है और उनकी एनीमिया की समस्या शीघ्र ही दूर करती है। जो भी लोग अन्य रोगों से पीड़ित हैं और अंग्रेजी दवाइयां ले रहे हैं, वे उन्हें एक दम से बंद न करें और उपरोक्त इन दवाइयों को तीन माह तक लेने के बाद अपने डॉक्टर की सलाह से उन्हें धीरे-धीरे कम कर सकते हैं। किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें।  
शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग जरूरी
डा.स्वतंत्र जैन कहते हैं कि हमेशा स्वस्थ रहने के लिए कोई भी व्यक्ति या परिवार अगर निम्न उपचार द्वारा अपने शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग करता है और खान-पान तथा एक्सरसाइज भी निम्न अनुसार लेता है, तो उसे कभी भी कैंसर, डायबटीज, ह्रदय रोग, लिवर रोग, किडनी फेल्यर, टी.बी., फेफड़े के रोग, चर्म रोग आदि कोई भी गंभीर बीमारी नहीं होगी और वह आजीवन सपरिवार स्वस्थ, प्रसन्न और खुशहाल रह सकेगा। सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें। इन दवाइयों को लेने के एक हफ्ते बाद हर 15-15 दिन में सोरिनम 200 का मात्र एक-एक पांच बूँद का डोज चार बार तक ले, ताकि आपके शरीर के अंदर जमा दवाई और दूसरे अन्य केमिकल और पेस्टीसाइड के विकार दूर हो सकें और आपके शरीर के सभी ह्रदय, फेफड़े, लीवर, किडनी आदि मुख्य अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगे। बच्चों और ज्यादा वृद्धों में ये सभी दवा 30 की पावर में दें। अगर कब्ज रहता हो, तो होम्योलेक्स या HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं. 67 की एक या आधी गोली रोज रात एक सफ्ताह तक 9.30 बजे लें। इसके बाद हर व्यक्ति को चाहिए कि वह इसे हर हफ्ते एक या आधी गोली रात्रि 9.30 बजे ले। आप सुबह दो से चार गिलास कुनकुना पानी पीकर 5 मिनिट तक कौआ चाल (योग क्रिया) करें। साथ ही पांच या अधिक से अधिक दस बार तक सूर्य नमस्कार करें। फिर 200 से 500 बार तक कपाल-भांति करें. इसके बाद प्राणायाम करें। रोज सुबह और रात को 15-15 मिनट का शवासन भी करें। फिर एक घंटे बाद अगर सूट करे, तो कम से कम एक माह तक नारियल पानी लें। सुबह और शाम को अगर संभव हो, तो एक घंटा अवश्य घूमें। डा.जैन के अनुसार, रात को सोते समय अष्टावक्र गीता में बताये अनुसार दो मिनट के लिए “मैं स्वयं ही तीन लोक का चैतन्य सम्राट हूँ” ऐसा जाप करें। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के चार्ज किये और मिलाकर बने चुम्बकित जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रोज दिन में 3 बार उपयोग करें। रोज सुबह उच्च शक्ति चुम्बकों को हथेलियों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगायें और रात्रि को खाने के दो घंटे बाद पैर के तलुवों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए दक्षिणी चुम्बक को बायीं ओर और उत्तरी चुम्बक को दाहिनी ओर लगाये। गेंहू, जौ, देसी चना और सोयाबीन को सम भाग मिलाकर पिसवा ले और उसकी रोटी सादे मसाले की रेशेदार सब्जी से खाएं। दाल का प्रयोग कम कर दें। बारीक आटे व मैदे से बनी वस्तुएं, तली वस्तुएं एव गरिष्ठ भोजन का त्याग करे। सुबह-शाम चाय के स्थान पर नीबू का रस गरम पानी में मिला कर पिएं। खाने में सिर्फ सेंधे नमक का प्रयोग करें। रात को सोने से पहले पेट को ठण्डक पहुँचायें। इसके लिए खाने के चार घंटे बाद एक नेपकिन को सामान्य ठन्डे पानी से गीली करके पेट पर रखें और हर दो मिनट में पलटते रहें। 15 मिनट से 20 मिनिट तक इसे करें। मैथी दाना 250 ग्राम, अजबाइन 100 ग्राम और काली जीरी 50 ग्राम को पीस कर इस चूर्ण को कुनकुने पानी से रात्रि 9.30 बजे एक चम्मच लें। रात्रि को खाना और जमीकंद खाना, शराब पीना व धूम्रपान अगर करते हों या तम्बाखू खाते हों, तो इन्हें बंद करें। शाकाहारी भोजन ही लें। उन्होंने बताया कि अपने शरीर की सालाना ओवरहालिंग के लिए साल में एक बार अपने आसपास के किसी भी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाकर वहां का दस दिन का कोर्स करें। अपने घर के बुजुर्ग लोगों की रोज एक घंटे के लिये सेवा और मदद करें। अपने आसपास की झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी गरीब व्यक्ति की हर हफ्ते जाकर मदद करें। अध्यात्मिक कैप्सूल के रूप में मेरी पुस्तक मुक्तियाँ की एक-एक मुक्ति तीन माह तक रोज पढ़ें। इससे आपकी नेगेटिव एनर्जी कम होगी और पॉजिटिव एनर्जी बहुत तेजी से बढेगी। मेरी स्वस्थ रहे, स्वस्थ करें, मुक्तियाँ और अन्य कई पुस्तकों को मेरे समाधान ग्रुप से निशुल्क डाउन लोड करें। आप चाहे तो अपना इमेल मेरे मेसेज बाक्स में दे दे, तो मैं आपको डायरेक्ट मेल कर दूंगा। होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब नम्बर से मिलती हैं। इनके नम्बर ध्यान से लिखें। साथ ही होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब में कन्फ्यूज न हों। इन्हें साफ़-साफ़ लिखें। किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें। होम्योपैथी की दवाइयों को मुंह साफ़ करके कुल्ला करके लेना चाहिए। इनको लेते समय किसी भी तरह की सुगन्धित चीजों और प्याज, लहसुन, काफी, हींग और मांसाहार आदि से बचे और दवा लेने के आधा घंटा पहले और बाद में कुछ न लें। हर दिन नई एलोपथिक दवाइयां बन रही हैं और अधिकांश पुरानी दवाइयों के घातक और खतरनाक परिणामों के कारण इन्हें कुछ ही वर्षों में भारत को छोड़ कर विश्व के कई देशों में बेन भी किया जा रहा है। हमें भी चाहिये कि हम मात्र एलोपथिक दवाइयों पर ही निर्भर न रहकर योगासन, सूर्य किरण भोजन, अमृत-जल या सूर्य किरण जल चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, बायोकेमिक दवाइयाँ आदि निर्दोष प्रणालियों को अपना कर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित करें। इस तरह दवा मुक्त विश्व का निर्माण करना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है और इसके लिए आप सभी का सहयोग चाहिये, जो आप मेरे इन सन्देशों को दूर-दूर तक फैला कर मुझे दे सकते हैं।
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