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यूपी में बतौर मुख्यमंत्री योगी ने ली शपथ, जानें किस-किसको मिली कैबिनेट में जगह

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्नाथ योगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नई कैबिनेट ने शपथ ले ली है। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट व राज्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लखनऊ के पूर्व मेयर दिनेश शर्मा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथग्रहण समारोह लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्रियों सहित एनडीए के कई अन्य मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। परंपरा निभाते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी नई सरकार के शपथग्रहण समारोह में शिरकत की। मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री को शामिल कर कुल 17 ओवीसी, 6 अनुसूचित जाति, 7 ठाकुर, 8 ब्राह्मण, 8 कायस्थ-वैश्य, 2 जाट और 1 मुस्लिम की मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी है।

जानें, योगी कैबिनेट में और किन-किन चेहरों को जगह मिली है: 

मुख्यमंत्री- योगी आदित्यनाथ

उप मुख्यमंत्री- केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा

कैबिनेट मंत्री  

सूर्य प्रताप शाही
सुरेश खन्ना
स्वामी प्रसाद मौर्य
सतीश महाना
राजेश अग्रवाल
रीता बहुगुणा जोशी
दारा सिंह चौहान
धर्मपाल सिंह
एस. पी. सिंह बघेल
सत्यदेव पचौरी
रमापति शास्त्री
जय प्रकाश सिंह
बृजेश पाठक
ओम प्रकाश राजभर
लक्ष्मी नारायण चौधरी
चेतन चौहान
श्रीकांत शर्मा
सिद्धार्थ नाथ सिंह
मुकुट बिहारी वर्मा
आशुतोष टंडन
नंद गोपाल गुप्ता नंदी

राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार

अनुपमा जायसवाल
सुरेश राणा
उपेंद्र तिवारी
महेंद्र सिंह
स्वतंत्रदेव सिंह
भूपेंद्र सिंह चौधरी
धरम सिंह सैनी
स्वाति सिंह
अनिल राजभर  

राज्य मंत्री 

गुलाब देवी
 बलदेव औलख
अतुल गर्ग
संदीप सिंह
मोहसिन रजा
अर्चना पाण्डे
राघवेन्द्र प्रताप सिंह (घुन्नी सिंह)
मन्नु कोरी
ज्ञानेंद्र सिंह
जय प्रकाश निषाद
गिरीश यादव
संगीता बलवंत
नीलकंठ तिवारी
जयकुमार सिंह
जैकी सुरेश पासी

इस अवसर पर कुल 11 मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की। मुलायम सिंह यादव, नितिन गडकरी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, चंद्रबाबू नायडू और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। 70,000 से भी ज्यादा लोग नई सरकार का शपथग्रहण देखने पहुंचे। कांशीराम स्मृति उपवन, जहां यह शपथग्रहण हुआ, उसके बाहर कई किलोमीटर तक गाड़ियों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में आम लोग भी इस कार्यक्रम को देखने और नेताओं की एक झलक पाने के लिए यहां पहुंचे। ना केवल लखनऊ, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी आम लोग इस अवसर के साक्षी बने। भाजपा ने 14 साल बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की है। 403 सीटों की उत्तर प्रदेश विधानसभा में अकेले भाजपा को 312 सीटें मिली हैं। भाजपा गठबंधन को कुल मिलाकर 325 सीटें हासिल हुई हैं। इतना बड़े जनमत हासिल करने के बाद यूपी में बीजेपी की सरकार बनी है। इस ऐतिहासिक मौके की भव्यता को ध्यान में रखते हुए ना केवल भाजपा, बल्कि एनडीए और कई विपक्षी दलों के नेताओं को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और अरुणाचल के सीएम भी इस समारोह में शरीक होने पहुंचे।
सीएम बनते ही एक्शन में आए योगी आदित्यनाथ, मंत्रियों से कहा- 15 दिनों में दें संपत्ति का ब्योरा, ना दें अनाप-शनाप बयान  
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने रविवार को अपने कैबिनेट सहयोगियों को निर्देश दिया कि वे 15 दिन के भीतर अपनी आय और चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्यौरा पार्टी एवं सरकार को उपलब्ध करायें। योगी ने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक की, जिसमें सदस्यों ने एक दूसरे को परिचय दिया। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘भ्रष्टाचार’ को समाप्त करने के संकल्प के तहत मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को अपनी आय और चल अचल संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया, ‘सभी मंत्रियों को आय, चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्यौरा15 दिन में संगठन को और मुख्यमंत्री के सचिव को देना है।’ दोनों मंत्रियों ने बताया कि नये विधायकों के प्रशिक्षण के लिए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के नेतृत्व में एक कमेटी बनेगी, जिसमें प्रयास होगा कि सभी विधायकों की भलीभांति ‘ट्रेनिंग’ हो। केंद्र के भी कुछ बडे नेता आ सकते हैं। वे कक्षाएं लेंगे।’ उन्होंने बताया कि एक और कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जो देखेगी कि 325 विधायकों के साथ मंत्रिपरिषद के लोग किस प्रकार संपर्क में रहें और उनके क्षेत्र में जाकर किस तरह संपर्क रख सकें। संगठन और सरकार के तालमेल पर भी चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावी रैलियों में भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में पहली कैबिनेट बैठक में ही कुछ फैसले करने के उल्लेख पर दोनों मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि आज की बैठक औपचारिक कैबिनेट बैठक नहीं बल्कि ‘परिचय बैठक’ थी। ‘जो कहा गया है, पहली ही कैबिनेट में फैसला होगा।’ शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी कैबिनेट सदस्यों से आग्रह किया कि ‘जनादेश’ विकास के लिए मिला है। ये जनादेश बिजली, पानी, सडक, कानून व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान की बदहाली दूर करने तथा विकास और सुरक्षा के लिए मिला है। साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों को नसीहत दी कि वे अनावश्यक टिप्पणी से बचें ताकि किसी की भावना आहत न हो। उत्तर प्रदेश ‘उत्तम प्रदेश’ बने, यही हम सबका संकल्प है।  
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, बोले- संकल्प पत्र का हर वादा होगा पूरा, किसी से कोई भेदभाव नहीं
 उत्तर प्रदेश को ‘विकास और खुशहाली’ के रास्ते पर ले जाने में कोई ‘कोर कसर’ बाकी नहीं रखने का ऐलान करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा कि शासन और प्रशासन को ‘संवेदनशील एवं जवाबदेह’ बनाया जाएगा। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हम प्रदेश की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश को विकास और खुशहाली के रास्ते पर तेजी से आगे बढाने के लिए जो भी प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पडेगी, राज्य सरकार उसमें कहीं भी कोई कोर कसर नहीं छोडेगी।’ उन्होंने विकास और सुशासन के लिए भाजपा को भारी समर्थन देने के लिए प्रदेश की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘लोक कल्याण के प्रति समर्पित ये सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से कार्य करेगी। शासन और प्रशासन को संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाया जाएगा।15 वर्षों में उत्तर प्रदेश विकास की दौड में काफी पिछड गया है। इस अवधि में यहां सत्ता पर काबिज रही सरकारों ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद के साथ साथ कानून व्यवस्था की बदहाल स्थिति से जनता को भारी नुकसान पहुंचाया है, इसलिए हमारी सरकार आम जनता के कल्याण के लिए और उनके उत्थान के लिए अविलंब प्रभावी कार्रवाई शुरू करेगी।’ योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तर प्रदेश ‘एकात्म मानववाद’ के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। उनके ‘अंत्योदय’ के सपने को साकार करने के लिए हमारी सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र 2017 के सभी वायदों को पूरा करने के लिए कृतसंकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन््रद मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार ने विकास और सुशासन के माध्यम से ‘सबका साथ सबका विकास’ का जो संकल्प लिया है, उसका पूरी तरह अनुसरण करते हुए प्रदेश सरकार राज्य की जनता की सेवा करेगी।’ योगी ने कहा कि आवास, भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ साथ कानून व्यवस्था चाक..चौबंद रखने के लिए सरकार निरंतर सजग तरीके से कार्य करेगी। प्रदेश में शिक्षा का उन्नयन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि, आम जनता को स्वास्थ्य और परिवहन की अच्छी सुविधा प्राप्त हो, भाजपा सरकार इस दिशा में ठोस प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि समाज के गरीब, दलित, पिछडे वर्ग के कल्याण के लिए विशेष प्रयास किये जाएंगे। प्रदेश की आबादी का एक बडा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है। अपनी आजीविका के लिए उन्हें खेती पर निर्भर रहना पडता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार सुनिश्चित करेगी कि कृषि ही प्रदेश के विकास का आधार बने। ‘कृषि, किसान और खेतिहर मजदूर तीनों के विकास के हर स्तर पर प्रयास किये जाएंगे।’ योगी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के साथ साथ उनकी सरकार उन्हें समान अवसर देने के हरसंभव प्रयास करेगी। ‘‘महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण और सम्मान के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेंगे।’ उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के बदहाल शासन का खामियाजा युवा पीढी को भुगतना पडा है। गुणात्मक शिक्षा सुलभ हो और कौशल विकास के जरिए रोजगार के अवसर मिलें, इस दिशा में उनकी सरकार पूरी संवेदनशीलता से काम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार विहीन और पारदर्शी बनाया जाएगा। निवेश को बढावा देते हुए राज्य का संतुलित औद्योगिक विकास भी किया जाएगा। जहां एक ओर आर्थिक विकास होगा, वहीं दूसरी ओर नौजवानों को राज्य में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे। उत्तर प्रदेश में परिवर्तन लाने का जो जनादेश भाजपा की सरकार को प्राप्त हुआ है, उसके सकारात्मक परिणाम जल्द दिखने लगेंगे। भाजपा ने चुनाव के पूर्व संकल्प पत्र रखा था और उसमें जो वायदे किये हैं, उनको पूरा करने के लिए हम कृतसंकल्प हैं।’  
सरकार में एक मुस्लिम भी, मोहसिन रजा राज्य मंत्री बने 
यूपी विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे के समय मुस्लिमों से पूरी तरह दूर रहने वाली बीजेपी ने सरकार गठन में थोड़ा बदला हुआ रूप दिखाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में एक मुस्लिम चेहरे की भी एंट्री हुई है। पूर्व क्रिकेटर और यूपी में बीजेपी के पोस्टर बॉय मोहसिन रजा को राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई है। हर किसी की रुचि अब इस बात को जानने में है कि आखिर यह मोहसिन रजा कौन हैं? मोहसिन रजा 2013 से राजनीति में सक्रिय हैं। मणिपुर के गवर्नर नजमा हेपतुल्ला के दामाद हैं। 2014 में मोहसिन ने बीजेपी के समर्थन में पोस्टर लगाए थे। इसकी वजह से अचानक उन्हें काफी चर्चा मिली। बीजेपी ने उन्हें यूपी में प्रवक्ता बनाया था। मोहसिन तीन राज्यों की ओर से कई रणजी मैच भी खेल चुके हैं। इस तरह से मोहसिन रजा ऐसे दूसरे क्रिकेटर हैं जो योगी सरकार में मंत्री बने हैं। इनके अलावा पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मोहसिन ने जुबली इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। मोहसिन रजा फिलहाल टीवी पर बीजेपी के जाने-माने मुस्लिम चेहरा बन चुके हैं। हालांकि यह उनके लिए आसान नहीं था। वह इसे स्वीकार करते हुए कहते हैं, 'मुझे जान से मारने की धमकी मिली, हर तरह के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा जिनमें उत्पीड़न से लेकर जमीन कब्जाने तक के आरोप शामिल हैं। मुझे अपने बारे में ऐसी बातों का पता दूसरों से चलता है।' सवाल यह है कि आखिर ऐसा कौन सा राजनीतिक गणित है जिसकी वजह से मोहसिन रजा को योगी की मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। यूपी में कई ऐसे विभाग और निगम हैं जिनका नेतृत्व मुस्लिम के ही हाथ में रहता आया है। इनमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और वक्फ बोर्ड जैसी चीजें शामिल हैं। बीजेपी के पास यूपी में एक भी मुस्लिम विधायक नहीं है। ऐसी स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि मोहसिन रजा को सूबे की नई सरकार के मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है। फिलहाल रजा यूपी के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। उन्हें अब 6 महीने के भीतर किसी भी सदन का सदस्य बनना पड़ेगा। रजा खुद के बीजेपी में होने को भी काफी सहजता से जस्टिफाई करते हैं। रजा के मुताबिक, 'कांग्रेस जैसी पार्टियों ने बीजेपी का डर दिखाकर मुसलमानों को उससे दूर रखा। उसे मुसलमानों के खिलाफ बताया, पर ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम दूसरों की तरह वोट बैंक की राजनीति में यकीन नहीं रखते।' संयोग से मोहसिन के भाई अर्शी रजा स्थानीय कांग्रेस नेता हैं। मोहसिन कहते हैं कि वे दोनों एक दूसरे के लिए 'मरने को भी तैयार' रहते हैं और घर पर राजनीति के बारे में बात नहीं करते।
लखनऊ से राजीव रंजन तिवारी की रिपोर्ट
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