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सियासत में ‘हार्दिक, नीतीश, कन्हैया’ की ‘हनक’ वाली तिकड़ी बिगाड़ेगी इस पार्टी की ‘हेकड़ी’!

राजीव रंजन तिवारी 
‘हनक’ यानी हार्दिक पटेल, नीतीश कुमार और कन्हैया कुमार। यदि सबकुछ सामान्य रहा तो इन नामों वाली तिकड़ी भारतीय सियासत में यूपी से लेकर गुजरात तक अच्छे-अच्छों की हेकड़ी बिगाड़ने वाली है। सबको पता है कि किसी भी देश की प्रजातांत्रिक सियासत पूरी तरह संभावनाओं पर टिकी हुई रहती है। चूंकि भारत की सियासत प्रयोगधर्मी भी है, इसलिए यहां संभावनाओं की राजनीति कुछ ज्यादा ही प्रभावी रही है। देश की लोकतांत्रिक राजनीति में आजादी के बाद से अब तक कई सारे प्रयोग हुए। विचारधाराओं की नींव पर टिके ये प्रयोग सफल भी रहे। यह अलग बात है कि प्रयोगधर्मी सियासत की अवधि लम्बी नहीं रही। इसी क्रम में केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद ढाई साल में हुए अनेक अच्छे-बुरे फैसलों के कारण एक और सियासी प्रयोग मूर्त्तरूप लेता दिख रहा है। हालातों के संकेत हैं कि इस बार की प्रयोगधर्मी सियासत की धुरी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, गुजरात के चर्चित पटेल नेता हार्दिक पटेल और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार होंगे। बताते हैं कि इस नई सियासत की बीज अंकुरित हो चुकी है, जो धीरे-धीरे अपना आकार ले रही है। राजनीति के ज्ञानी मानते हैं कि अपनी अक्रामक छवि की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे दोनों युवा नेताओं (कन्हैया कुमार और हार्दिक पटेल) को लेकर नीतीश कुमार यदि आगे बढ़ते हैं तो यूपी से लेकर गुजरात तक राजनीति का राग बदल सकता है। बीजेपी के संग बढ़ती नजदीकियों की अफवाहों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही गुजरात में एक रैली करने वाले हैं। नीतीश कुमार अगले महीने हार्दिक पटेल की अखिल भारतीय पटेल नवनिर्माण सेना के साथ गुजरात में कई संयुक्त रैलियां कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेता मेहसाना, राजकोट और सूरत में होने वाली रैलियों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की विजय रुपानी सरकार को चुनौती देंगे। बताते हैं कि हार्दिक पटेल हाई कोर्ट के आदेश पर 17 जुलाई उदयपुर चले गए थे। अदालत ने उन्हें छह महीने गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया था। जनवरी में हार्दिक के राज्य से बाहर छह महीने पूरे हो जाएंगे। माना जा रहा है कि उसके बाद हार्दिक राज्य में जोरदार वापसी करेंगे। सूत्रों के अनुसार हार्दिक पटेल की इस संदर्भ में नीतीश कुमार से बात भी हो चुकी है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताते हैं कि आरक्षण का लाभ नहीं पाने वाले अति-पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के नेताओं और दलित नेताओं को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है ताकि गुजरात में बीजेपी का एक भरोसेमंद विकल्प तैयार किया जा सके। उना आंदोलन के बाद दलित नेता के रूप में उभरे राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के जिग्नेश मेवानी की भी हार्दिक पटेल से निकटता बढ़ी है। नीतीश इस एकता के सूत्रधार हो सकते हैं। नीतीश के लिए उत्तर प्रदेश से ज्यादा महत्वपूर्ण गुजरात है। इससे नीतीश के बीजेपी के करीब आने की अफवाहें भी खत्म हो जाएंगी। पिछले साल सितंबर में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हार्दिक ने नीतीश कुमार को अपना समर्थन दिया था। नीतीश ने भी हार्दिक की पेटल समुदाय को ओबीसी में शामिल करने की मांग का समर्थन किया था। अब चर्चा जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की। आपको बता दें कि कन्हैया कुमार बिहार के बेगुसराय के रहने वाले हैं। इस साल की शुरूआत में जब दिल्ली पुलिस द्वारा कथित रूप से देशद्रोही नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया गया था तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस घटना की तीखी आलोचना की थी। यद्यपि कन्हैया कुमार वाम विचारधारा के हैं, बावजूद इसके ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है’ की तर्ज पर नीतीश कुमार और कन्हैया कुमार को मंच साझा करने में शायद कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जानकार बताते हैं कि हार्दिक पटेल गुजरात में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने के लिए जिस तरह नीतीश कुमार के संपर्क में हैं उसी तरह वे कन्हैया कुमार के निकट जाने की भी कोशिश में हैं। ताकि नीतीश कुमार और कन्हैया कुमार को लेकर गुजरात में एक बड़ा जन-उभार पैदा किया जा सके। इसमें कोई शक नहीं है कि गुजरात में भाजपा सरकार द्वारा हार्दिक पटेल के आंदोलन को कथित रूप से दबाने के लिए हर हथकंडे अपनाए गए। हार्दिक पटेल को जेल तक जाना पड़ा। जबकि एक कथित फर्जी सीडी के आधार पर जेएनयू छात्र संघ के पूर्व प्रमुख कन्हैया कुमार को दिल्ली पुलिस ने ‘देशद्रोही’ बताते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया। बाद में सीडी की फोरेंसिक जांच पर में पता चला कि सीडी डाक्टर्ड (छेड़छाड़ वाली) थी। बताते हैं कि दिल्ली पुलिस द्वारा कन्हैया कुमार के खिलाफ कोर्ट में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिया जा सका। फलस्वरूप आरोपों को फर्जी करार देते हुए कन्हैया कुमार को कोर्ट द्वारा नियमित जमानत दे दी गई है। अब बारी नीतीश कुमार की। यह सबको पता है कि 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार के डीएनए (एक गाली की तरह) पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। जिसका पूरे बिहार में जबर्दस्त विरोध हुआ था। आखिरकार भाजपा की वहां हार हुई। राजनीति के जानकार मानते हैं कि नोटबंदी की वजह से पूरे देश में बन रहे कथित भाजपा विरोधी माहौल को भुनाने के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के अलावा नीतीश कुमार, हार्दिक पटेल और कन्हैया कुमार की तिकड़ी भी बांहें चढ़ा रही है। बताते हैं कि राजनीतिक रूप से भाजपा को शिकस्त देने के लिए उक्त लोग संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप कुछ भी कर सकते हैं। दो माह बाद देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कहा जा रहा है कि यहां भी भाजपा की बढ़त को रोकने के लिए रणनीतियां बननी शुरू हो गई हैं। यदि सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो यूपी के पूर्वांचल में नीतीश कुमार, कन्हैया कुमार और हार्दिक पटेल बहुत जल्द मंच साझा करने वाले हैं। बताते हैं कि सर्वधर्म समभाव के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली सामाजिक संस्था ‘धरा धाम’ गोरखपुर जनपद के ग्राम भस्मा में एक ही चाहरदीवारी के भीतर मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, गिरिजाघर आदि का निर्माण कराने जा रही है, जिसका शिलान्यास शीघ्र होना है। ‘धरा धाम’ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने के लिए संस्था के प्रमुख सौरभ पाण्डेय एंड़ी-चोटी एक किए हुए हैं। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उक्त तिकड़ी को ही बनाने की चर्चा है। सच्चाई क्या है, ये तो ‘धरा धाम’ के लोगों को ही पता होगा। कहा तो यहां तक जा रहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कन्हैया कुमार और हार्दिक पटेल से संपर्क किया गया है। इन युवा नेताओं ने अपनी सहमति दी है अथवा नही, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। बताते हैं कि कन्हैया कुमार और हार्दिक पटेल की सहमति मिलने के बाद नीतीश कुमार को भी शायद इन्हीं के सहारे जोड़ लिया जाए। बहरहाल, हालातों और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अनुमान की बात करें तो लगता है कि यह तिकड़ी ‘हनक’ (हार्दिक पटेल, नीतीश कुमार और कन्हैया कुमार) राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने को बेकरार है। कहा जा रहा है कि यदि ‘धरा धाम’ के शिलान्यास समारोह में उक्त नेताओं ने मंच साझा कर लिया तो बेशक यह भारतीय राजनीति का एक अलग सुर होगा, जिसकी गूंज दूर तलक जाएगी। खैर, अब देखना यह है कि ‘धरा धाम’ प्रमुख सौरभ पाण्डेय अपने संभावित शिलान्यास कार्यक्रम में इन्हें एक मंच तक ला पाते हैं अथवा नहीं?
निर्माण के लिए शिलान्यास की तैयारी जोरों पर है, किन्तु मुख्य अतिथि का नाम अभी तक तय नहीः सौरभ पाण्डेय 
सर्वधर्म समभाव के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली संस्था ‘धरा धाम’ के प्रमुख सौरभ पाण्डेय से शिलान्यास कार्यक्रम में नीतीश कुमार, हार्दिक पटेल और कन्हैया कुमार के शामिल होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी स्पष्ट रूप से बताने से मना कर दिया। हां, इतना जरूर कहा कि शिलान्यास की तैयारी जोरों पर चल रही है, पर अभी अतिथि का नाम फाइनल नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बेशक उनकी कन्हैया कुमार जी और हार्दिक पटेल जी से बात हुई है, पर कौन अतिथि होगा अथवा कौन-कौन होगा, इस संदर्भ में अभी कोई खुलासा नहीं कर पाऊंगा। वक्त आने पर सब पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि धरा धाम एक सामाजिक संगठन है। इस संगठन के माध्यम से राजनीति की बात करना ठीक नहीं, लेकिन धरा धाम किसे किस तरह का राजनीतिक लाभ दिला पाएगा, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा।  
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व स्तंभकार हैं, इनसे फोन नं.- 08922002003 पर संपर्क किया जा सकता है.)
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