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सपा कुनबे के झगड़े में नया मोड़, झुके मुलायम, अखिलेश-रामगोपाल का निष्कासन वापस

स्टीव जॉर्डिंग को जानते हैं आप? 'लीक ईमेल' से उठे सवाल, मुलायम-अखिलेश का झगड़ा फिक्स तो नहीं? 
लखनऊ। समाजवादी कुनबे में मचे घमासान में नाटकीय मोड़ आ गया है। पार्टी से सीएम अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव के निष्कासन को रद्द कर दिया गया है। एसपी नेता शिवपाल यादव ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है, वहीं सूत्र बता रहे हैं कि विधायकों के अप्रत्याशित समर्थन से गदगद अखिलेश खेमा आगे की सुलह के लिए अमर सिंह के निष्कासन पर अड़ गया है। अखिलेश समर्थक चाहते हैं कि अमर सिंह को पार्टी से बाहर किया जाए, साथ ही अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो। मुलायम को अखिलेश खेमा संरक्षक की भूमिका में देखना चाहता है। बताया जा रहा है कि शनिवार को आजम खान पहले मुलायम से मिले और फिर अखिलेश से मिलने गए। इसके बाद अखिलेश विधायकों के साथ चल रही बैठक बीच में छोड़कर आजम खान के साथ मुलायम से मुलाकात करने पहुंचे। बाद में मुलायम ने शिवपाल यादव को भी अपने आवास पर बुला लिया। यह बैठक करीब एक घंटे चली जिसके बाद अखिलेश वापस अपने आवास 5 कालीदास मार्ग पहुंच गए। शिवपाल भी बैठक के बाद वहां से निकल गए। बैठक के बाद शिवपाल ने ट्वीट कर बताया, 'नेताजी के आदेश अनुसार अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का पार्टी से निष्कासन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। सब साथ मिलकर सांप्रदायिक ताकतों से लड़ेंगे और पुनः उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे।' सूत्र बता रहे हैं कि मुलाकात में अखिलेश ने मुलायम को 207 विधायकों की लिस्ट सौंपी है जो उनके समर्थन में हैं। अखिलेश ने मुलायम के सामने अपनी सभी शर्तें रख दी हैं। अखिलेश खेमे की पहली शर्त यह है कि अमर सिंह को पार्टी से बाहर किया जाए। बताया जा रहा है कि इस शर्त को मनवाए बिना अखिलेश खेमा किसी तरह सुलह के लिए राजी नहीं है। इसके अलावा अखिलेश खेमा चाहता है कि अखिलेश को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए और मुलायम पार्टी के संरक्षक की भूमिका में रहें। सुलह के फॉर्म्युले में रविवार को रामगोपाल यादव की ओर से बुलाए गए आपातकालीन सम्मेलन को रद्द किए जाने की बात भी शामिल है। शिवपाल ने भी कहा कि रविवार को कोई सम्मेलन नहीं होगा, पर अखिलेश खेमा सम्मेलन करने की बात पर अड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि अखिलेश से मुलाकात के दौरान मुलायम भावुक हो गए। इसके पहले अखिलेश भी विधायकों के साथ बैठक में पिता का नाम लेकर भावुक हो गए थे और कहा था कि वह यूपी चुनाव जीतकर अपने पिता को तोहफा देंगे।
'लीक ईमेल' से उठे सवाल, बाप-बेटा का झगड़ा फिक्स तो नहीं? 
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के राजनीतिक रणनीतिकार प्रफेसर स्टीव जार्डिंग का एक कथित ईमेल सामने आने के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या समाजवादी पार्टी में चल रहा झगड़ा फिक्स है? शुक्रवार को मुलायम द्वारा अखिलेश को पार्टी से बाहर किए जाने के कुछ ही देर बाद यह कथित मेल सामने आया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दावा किया जा रहा है कि यह ईमेल 24 जुलाई को भेजा गया था। हालांकि इसकी प्रामाणिकता की अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस कथित ईमेल के स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में शेयर किया गया। ईमेल में जो बातें लिखी गई हैं, उससे यह पता चलता है कि समाजवादी पार्टी में चल रहा झगड़ा फिक्स है। यह एक सोची समझी रणनीति है जिसके तहत चाचा (शिवपाल यादव) की कीमत पर अखिलेश की साफ छवि को और मजबूत बनाया जा रहा ताकि उन्हें भविष्य में पार्टी के नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया जा सके। इस कथित ईमेल में ID नजर नहीं आ रही, बाईं ओर कोने में समाजवादी पार्टी का झंडा लगा हुआ है, यह बताते हुए कि यह एक आधिकारिक ईमेल है जो सीएम अखिलेश को भेजा गया है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने जब स्टीव एंड पार्टनर्स कंपनी के डिप्टी डायरेक्टर अद्वैत विक्रम सिंह से बात की तो उन्होंने ऐसा कोई ईमेल भेजे जाने की बात से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह ईमेल फर्जी है जो पहले से झगड़े में उलझी पार्टी को और मुसीबत में डालने के लिए रिलीज किया गया है। पहली बात यह कि स्टीव ने सीएम अखिलेश के लिए इसी साल अगस्त से काम करना शुरू किया है, जबकि यह ईमेल 24 जुलाई को लिखा गया लगता है। साथ ही, मैं और स्टीव एसपी में किसी से संपर्क में नहीं हैं। हम सोशल मीडिया में इस जानकारी को रिलीज करने वाले वाले शख्स को कानूनी नोटिस देंगे और इस तस्वीर का स्रोत बताने को कहेंगे।' सोशल मीडिया पर यूं तो कई फर्जी तस्वीरें और स्क्रीनशॉट वायरल होते रहते हैं, हालांकि इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राहुल कंवल के ट्वीट के बाद ईमेल से जुड़ी अटकलों को और हवा मिल गई। उनका ट्वीट सोशल मीडिया पर कुछ ही देर में वायरल हो गया।  
कौन हैं स्टीव जॉर्डिंग? 
स्टीव जार्डिंग हावर्ड में पॉलिटिकल सांइस और पब्लिक पॉलिसी के सीनियर प्रफेसर हैं। प्रफेसर जार्डिंग अमेरिका के सीनियर नेताओं हिलरी क्लिंटन और अल गोरे के लिए चुनाव प्रचार का काम संभालने के अलावा स्पेट के प्रधानमंत्री का चुनावी प्रचार संभाल चुके हैं। माना जा रहा है कि सीएम अखिलेश यादव की 'बगावत' के पीछे जार्डिंग का ही दिमाग है। अखिलेश ने अगस्त में अपनी चुनावी कैंपेन में मदद देने के लिए उन्हें अमेरिका से बुलाया था। अब जार्डिंग अखिलेश के सबसे करीबियों में हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ अखिलेश की बात भी उन्होंने ही चलवाई।
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