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मोदी की तारीफों के पुल बांधते हुए कांग्रेस छोड़ भाजपा में पहुंची रीता जोशी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सबसे बड़ी नेताओं में शुमार रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस को तलाक देकर बीजेपी से रिश्ता जोड़ लिया है. रीता बहुगुणा जोशी ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थामा. बीजेपी में शामिल होन के साथ ही रीता बहुगुणा जोशी ने सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े खून की दलाली वाले राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए और पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की. मोदी की तारीफ करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़़ा करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, “खून दलाली जैसे शब्द का उपयोग किया गया. उससे मैं काफी दुखी हो गई. जब सारी दुनिया ने सर्जिकल स्ट्राइक को स्वीकार किया तो कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को इसपर सवाल नहीं उठाना चाहिए.” जोशी ने कहा, “27 साल बाद मेरे लिए ये निर्णय लेना कठिन था. 27 साल के राजनीतिक जीवन में 24 साल कांग्रेस को दिए.” रीता बहुगुणा जोशी के साथ उनके बेटे मयंक जोशी ने भी बीजेपी का दामन थामा है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुलदस्ता और पार्टी का पट्टा पहनाकर रीता को पार्टी में शामिल कराया. रीता बहुगुणा जोशी अभी लखनऊ से कांग्रेस की विधायक भी हैं. कांग्रेस छोड़ते हुए रीता बहुगुणा जोशी ने राहुल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए. कांग्रेस ने रीता को दगाबाज कहा है. रीता बहुगुणा जोशी के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें बीते कुछ दिनों से लगाई जा रही थीं और उसपर मुहर लग गई.  
कौन हैं रीता बहुगुणा जोशी? 
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहीं. 67 साल की रीता बहुगुणा का ताल्लुक बड़े सियासी परिवार से रहा है. रीता यूपी के पूर्व सीएम हेमवंती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं. रीता के भाई उत्तराखंड के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा हैं. रीता बहुगुणा महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं. रीता यूपी कांग्रेस की कमान भी संभाल चुकी हैं. रीता अभी लखनऊ विधानसभा सीट से विधायक हैं. 
पहले से ही बगावती रहा है बहुगुणा का परिवार, पिता और भाई के बाद रीता बहुगुणा जोशी का कांग्रेस छोड़ना कोई खास बात नहीं 
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के मद्देनजर नेताओं ने अपनी जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजदूगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। यूपी विधानसभा की सदस्य 67वर्षीय रीता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की बहन है। बहुगुणा परिवार की रीता पहली ऐसी सदस्य नहीं है जिन्होंने कांग्रेस से बगावत की है। उनसे पहले भी उनके पिता दो बार कांग्रेस छोड़ चुके थे। वहीं इसी साल मार्च महीने में उनके भाई विजय बहुगुणा बीजेपी में शामिल हुए हैं। बीजेपी में शामिल होने के बाद रीता बहुगुणा ने सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को दिया। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। रीता बहुगुणा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ठेके पर उठा दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक पर राहुल गांधी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। रीता बहुगुणा ने आगे कहा कि अमित शाह खुले दिमाग के इंसान है और बीजेपी विकास की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का नेतृत्व किसी को स्वीकार नहीं है। रीता बहुगुणा ने कहा कि बीजेपी को स्पष्ट बहुमत दिलाने के लिए पूरी कोशिश करुंगी। उन्होंने कहा कि विधायक के पद से इस्तीफा पोस्ट से भेज दिया है और लखनऊ पहुंच पर स्पीकर से मिलकर भी इस्तीफा सौंपेंगी। 22 जुलाई 1949 को आगरा में जन्मीं रीता बहुगुणा जोशी ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफेसर रह चुकी हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से वह 1995 से 2000 तक इलाहबाद की मेयर भी रहीं। राष्ट्रीय महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकीं रीता ने उन्होंने अखिल भारतीय महिला कांग्रेस और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी की कमान भी संभाली। वह 2007 से 2012 के बीच यूपी कांग्रेस अध्यक्ष रहीं और इसी दौरान बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ टिप्पणी करने के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 2012 में उन्होंने लखनऊ कैंट से विधानसभा चुनाव जीता। 2014 में उन्होंने लखनऊ सीट से लोकसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमाया लेकिन एक बार फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। स्वतंत्रता सेनानी रहे हेमवती नंदन बहुगुणा को 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कैबिनेट में शामिल किया। इसके दो सालों बाद ही वह भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। कहा जाता है कि 1975 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मतभेद होने के चलते उन्हें यूपी के सीएम पर से इस्तीफा देना पड़ा। जब 1977 में लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई तो उन्होंने पहली बार कांग्रेस से बगावत की। बहुगुणा ने पूर्व रक्षा मंत्री जगजीवन राम के साथ 'कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी' पार्टी बनाई। उस चुनाव में इस दल को 28 सीटें मिली जिसका बाद में जनता दल में विलय हो गया। इसी पार्टी के बैनर तले बहुगुणा ने पहाड़ की चार लोक सभा सीटें जीती। चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री रहते बहुगुणा देश के वित्त मंत्री भी रहे। हालांकि जनता पार्टी के बिखराव के बाद बहुगुणा 1980 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में दोबारा शामिल हो गए। चुनाव के बाद केंद्र में कांग्रेस की सरकार आने के बाद कैबिनेट में नहीं लिए जाने के चलते उन्होंने छह महीने के अंदर ही कांग्रेस पार्टी के साथ ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी। पौढ़ी-गढ़वाल में जन्मे बहुगुणा 1980 के लोकसभा चुनाव में यही से जीते थे और 1982 में इसी सीट पर हुए उप चुनाव में जीतकर दोबारा संसद पहुंचे। बहुगुणा का जादू हालांकि 1984 के चुनाव में नहीं चला। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ इलाहाबाद संसदीय सीट से बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने चुनाव लड़ा। बहुगुणा को इस बार करीब 1 लाख 87 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
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