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ये हैं महानुभाव, जिन्होंने मुलायम परिवार में लगाई आग, अखिलेश ने किया शिवपाल सहित चार मंत्रियों को बर्खास्त

अखिलेश यादव सपा के अंतिम शासक होंगे, नेताजी की दूसरी पत्नी ने भी रचा सीएम अखिलेश के खिलाफ साजिश! 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को वरिष्ठ मंत्री व सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया। अखिलेश ने रविवार को ही पार्टी के विधायकों की एक बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इसके जरिये अपने समर्थक विधायकों की थाह लेना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस कदम के पीछे अमर सिंह को लेकर अखिलेश की नाराजगी हो सकती है। वह अपनी सरकार में ऐसे किसी भी मंत्री को नहीं चाहते, जो अमर सिंह के समर्थक हों। इस ताजा घटनाक्रम को सपा के दो धड़ों में जारी टकराव को समाप्त करने के प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अखिलेश ने रविवार को ही पार्टी के विधायकों की बैठक अपने आधिकारिक आवास पर बुलाई है। सूत्रों के अनुसार, इसमें शिवपाल व उनके समर्थक विधायकों को नहीं बुलाया गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यह पार्टी में किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत है।  
अखिलेश सपा के अंतिम शासक होंगे
यूपी में पारिवारिक कलह से जूझ रही समाजवादी पार्टी की छवि को तो नुकसान पहुंचा ही है, साथ ही सूबे में कानून व्यवस्था भी चरमरा गई है। न कानून का डर रह गया है, न ही पुलिस का खौफ।बदमाश दिन-दहाड़े वारदातों और गुडागर्दी को अंजाम देते हुए देखे जाते हैं। सूबे के बिगड़े हालातों पर बीजेपी ने सपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और भविष्यवाणी कर डाली। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव सपा के आखिरी शासक होंगे। हैरत की बात यह है कि बीजेपी की इस भविष्यवाणी से ज्यादातर पाठक भी इत्तेफाक रखते हैं। दरअसल, सपा में चल रहे घमासान को लेकर अमर उजाला ने पाठकों से पार्टी के बारे में प्रतिक्रिया लेनी चाही। पाठकों ने अमर उजाला पोल में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और पूछे गए सवाल पर अपनी राय दी। सवाल था ''क्या अखिलेश 'सपा के अंतिम शासक होंगे'?'' इस पर सबसे ज्यादा 63.95 फीसदी पाठकों ने बीजेपी की भविष्यवाणी को सही ठहराया यानी अखिलेश को सपा का आखिरी शासक माना। वहीं, 31.39 फीसदी पाठकों की राय इससे अलग है, वे नहीं मानते है कि अखिलेश सपा के आखिरी शासक बनकर रह जाएंगे। 4.66 फीसदी लोग ऐसे भी है जो न इस तरफ हैं औप न ही उस तरफ, यानी वे कह नहीं सकते हैं कि परिणाम क्या होगा। पोल में कुल 6693 लोंगों ने हिस्सा लिया।
नेताजी की दूसरी पत्नी ने भी रचा अखिलेश के खिलाफ साजिश! 
मुलायम सिंह ने एमएलसी उदयवीर को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है. शुक्रवार को ही खबर आई थी अखिलेश के करीबी माने जेने वाले उदयवीर सिंह ने मुलायम को चिट्ठी लिखकर अखिलेश और मुलायम के बीच मतभेदों के पीछे अखिलेश की सौतेली मां साधना गुप्ता को ज़िम्मेदार ठहराया था. यहां यह साफ कर दिया गया है कि अनुशासनहीनता को पार्टी में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस फैसले पर सपा नेता अंबिका चौधरी ने कहा कि 'पार्टी पच्चीस सालों में जहां तक पहुंची है, अपने अनुशासन की वजह से पहुंची है. इसलिए किसी भी तरह का अमर्यादित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उदयवीर सिंह के आचरण के कारण पार्टी से उनको छह सालों के लिए निष्कासित कर दिया गया है.' बता दें कि उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर इस बात की मांग की है कि वे खुद पार्टी के संरक्षक बनें और अपनी कुर्सी (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष) अपने बेटे सीएम अखिलेश को सौंप दें. उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में यह भी लिखा कि परिवार के भीतर से भी अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश हो रही है और शिवपाल यादव इसमें शामिल हैं. यही नहीं इस खत में सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना अपने सौतेले बेटे अखिलेश यादव के प्रति द्वेष की भावना रखती हैं और शिवपाल यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पॉपुलेरिटी से जलते हैं. उदयवीर सिंह ने शिवपाल यादव और साधना पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा इन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नुकसान पहुंचाने के लिए काले जादू का सहारा लिया. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादव परिवार के झगड़े में बीच-बचाव के लिए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आगे आए हैं. शनिवार को ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने नरेश अग्रवाल, बेनी प्रसाद वर्मा, विधानसभा स्पीकर माता प्रसाद पांडे उनके घर पहुंचे जहां पार्टी के मौजूदा हालात पर बैठक हुई जिसके बाद बेनी प्रसाद ने कहा कि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है ऐसे में परिवार में मौजूदा मतभेद जल्द खत्म हो जाना चाहिए. शनिवार को ही लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें अखिलेश यादव और उनके समर्थक नेता, राम गोपाल यादव और मुलायम सिंह यादव भी शामिल भी नहीं हुए।
(साभार- अमर उजाला, एनडीटीवी, इंडिया टीवी)
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