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विदेश सचिव की बात से झूठ साबित हुआ बीजेपी का दावा

नई दिल्ली। आर्मी ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) पार करके ‘सीमित क्षमता, लक्ष्य विशिष्ट, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई’ पहले भी की है लेकिन यह पहली बार हुआ कि 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पूरे देश को जानकारी दी गई। यह बात विदेश मंत्रालय द्वारा मंगलवार (18 अक्टूबर) को संसदीय पैनल को बताई गई। पैनल में कांग्रेस पार्टी से सांसद शशि थरूर भी शामिल थे। पैनल को ब्रीफ करने का काम विदेश सचिव एस जयशंकर, डिफेंस सेक्रेटरी जी मोहन कुमार, आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत और गृह मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी एमके सिंगला ने किया। इन लोगों द्वारा बताया गया कि सर्जिकल स्ट्राइक की बात को सार्वजनिक करने के पीछे एक ‘रणनीति’ थी। सूत्रों के मुताबिक, ब्रीफिंग में कांग्रेस के सदस्य सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पूछा था कि क्या पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक्स पहली बार हुए हैं? इसके जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि ‘सीमित क्षमता, लक्ष्य विशिष्ट, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई’ पहले भी होती रही हैं। लेकिन कभी उनका जिक्र नहीं किया गया। हालांकि, पहले हुई कार्रवाई को उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक का नाम नहीं दिया। विदेश सचिव ने यह भी बताया कि स्ट्राइक के बाद 29 सितंबर को पाकिस्तान मिलिट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल को सूचना भी दे दी गई थी। सेना सबूत जुटाने नहीं गई थी: इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रीफिंग में सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत के बारे में भी सवाल किया गया। उसपर सरकार की तरफ से जवाब आया कि स्पेशल फोर्स स्ट्राइक करने गई थी सबूत जुटाने के लिए नहीं। सरकारी प्रतिनिधियों से सवाल पूछने वालों में कांग्रेस के करण सिंह, सत्यव्रत चौधरी, CPI(M) के मोहम्मद सलीम और एनसीपी के डीपी त्रिपाठी शामिल थे। मीटिंग में राहुल गांधी भी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा। कांग्रेस के लोगों ने यह भी पूछा कि क्या ऐसे स्ट्राइक आगे भी किए जाएंगे? इसपर सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि फिलहाल के स्ट्राइक का मकसद सफल रहा है। आगे वक्त पड़ने पर देखा जाएगा। शशि थरूर ने जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर चीन द्वारा डाले जाने वाले अडंगे के बारे में भी सवाल पूछा। इसपर कहा गया कि सरकार इस मसले पर काम कर रही है।
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