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सिद्धू दंपति ने किया पंजाब में भाजपा-आकाली दल की नाक में दम, विधानसभा से इस्तीफा न देने पर अड़ी नवजोत कौर सिद्धू

पंजाब में माफिया पर भाजपा की चुप्पी पर उठाए सवाल से प्रदेश की आकाली दल सरकार की पस्त हुई हालत, नेता परेशान
अमृतसर। भाजपा से इस्तीफा देने के एक दिन बाद नवजोत कौर सिद्धू ने रविवार को आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा उनसे ‘चुप’ रहने को कहा और जब भी अकाली दल के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई तो पार्टी नेता कभी उनके साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा से इस्तीफा नहीं देंगी और अपने क्षेत्र में विकास कार्य करती रहेंगी।अमृतसर में विकास परियोजनाओं को लेकर राज्य की अकाली दल-भाजपा नीत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली नवजोत ने दावा किया कि अकाली दल के इशारे पर भाजपा कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा से इस्तीफा नहीं देंगी और अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य करना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई। जब मैंने अपने क्षेत्र के लिए धन मांगा तो कोष जारी नहीं किया गया। मुझसे कहा गया कि राजनीति में ऐसी चीजें होती रहती हैं। कौर ने कहा कि – मैंने अपनी पार्टी और नेताओं से कई बार बात की और कोष के लिए कहा। उन्होंने मुझसे कहा कि अपना मुंह बंद रखो। मुझसे कहा गया कि कुछ गलत होता है तो मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए। गठबंधन है, आप इसके खिलाफ मत बोलिए। उन्होंने कहा कि अकाली दल के इशारे पर भाजपा कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के संज्ञान में यह लेकर आईं कि अकाली दल हमारे कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है और विकास परियोजनाओं के लिए कोष जारी नहीं किया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने इसे हल्के में लिया और कभी मेरे साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने भ्रष्टाचार में शामिल भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की। नवजोत ने कहा कि पार्टी को हमें पहले बताना चाहिए था कि चाहे घोटाला, माफिया राज और किसी भी तरह का घोटाला हो, हमें चुप रहना होगा। उन्होंने कहा कि वह राज्य में हो रही गड़बड़ियों पर चुप रहने के लिए राजनीति में नहीं आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने विकास कार्यों के लिए कोष की मांग की तो उन्हें अपमानित किया गया। भविष्य की योजना के बारे में पूछने पर नवजोत ने कहा कि वह आवाज-ए-पंजाब के लोगों के साथ बैठेंगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि विधानसभा से इस्तीफे का कोई कारण नहीं है। जब आप विधायक होते हैं तो आप अपने क्षेत्र में कार्य पर निगरानी रख सकते हैं। मैं अपनी सीट पर उपचुनाव नहीं चाहती। मैं नहीं चाहती कि कोष बिना उपयोग के पड़ा रहे और उसका दुरुपयोग हो।नवजोत कौर ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, राजस्व मंत्री बिक्रम मजीठिया और पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष कमल शर्मा पर उनके विधानसभा क्षेत्र में विकास संबंधी कार्य करने में अड़चनें पैदा करने का आरोप लगाया। नवजोत ने कहा कि इन लोगों ने उनके पति को पंजाब की राजनीति से दूर रखा, भाजपा आलाकमान पर दबाव बनाया कि 2014 लोकसभा चुनावों के लिए अमृतसर सीट से उनका टिकट काटा जाए और यहां अरुण जेटली को लाया गया।उधर पंजाब भाजपा प्रमुख विजय सांपला ने नवजोत के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने लुधियाना में कहा कि कई बार उनके बयानों को लेकर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति पैदा हो जाती थी लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।  
माफिया पर भाजपा की चुप्पी पर उठाए सवाल 
क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से इस्तीफा देने के एक दिन बाद रविवार को 'पंजाब में माफियाओं के राज पर भाजपा की चुप्पी' पर सवाल उठाए। नवजोत ने माफिया पर सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल से जुड़े होने का आरोप लगाया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्तारूढ़ गठबंधन में अकाली दल के साथ साल 2007 से सहयोगी है। भाजपा से शनिवार को इस्तीफा देने के बाद कौर ने मीडिया से यहां कहा, "गठबंधन में शामिल होने से पहले, उन्हें हमसे कहना चाहिए था कि हमें अपना मुंह नहीं बंद रखना होगा. हमारे लिए मान लिया गया कि जो भी कुछ गलत हो रहा है, उसे हम सिर्फ देखते रहें और उन गलत कार्यों का समर्थन करते रहें। हमसे पूरे माफिया को समर्थन देने की उम्मीद की जा रही थी और हमें किसी की गलती की तरफ इशारा करने की अनुमति नहीं थी।" कौर ने अकाली दल के नेताओं, खास तौर से पंजाब के शक्तिशाली राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े नेताओं पर राज्य में माफिया राज चलाने का आरोप लगाया. मजीठिया पंजाब के उप मुख्यमंत्री एवं अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के रिश्तेदार हैं. मजीठिया, सुखबीर सिंह की पत्नी और केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल के छोटे भाई हैं. कौर ने भाजपा से अपने इस्तीफे में देरी की वजह पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इसमें उनके निर्वाचन क्षेत्र का हित निहित था.
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