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राहुल की रफ्तार के आगे सुस्त पड़ी केन्द्र की मोदी और यूपी की अखिलेश सरकार

किसान महायात्रा के क्रम में जौनपुर पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि अब चल नहीं रही है अखिलेश की साइकिल और दी को विदेश यात्रा से फुरसत नहीं 
जौनपुर और अयोध्या से राजीव रंजन तिवारी की रिपोर्ट
कांग्रेस की किसान महायात्रा ने पार्टी की फिजां ही बदलकर रख दी है। कहा जा रहा है कि जिस रफ्तार से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं, उससे केन्द्र की नरेन्द्र मोदी और यूपी की अखिलेश सरकार सकते में है और सुस्त पड़ी हुई है। इन दोनों दलों के नेता राहुल गांधी के अभियान की काट खोजने में लगे हुए हैं, पर उन्हें कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है। यूं कहें कि प्रशांत किशोर के प्लान के अंतर्गत राहुल गांधी के अभियान से यूपी की जनता तेजी से कांग्रेस में अपना भविष्य देख रही है। हर किसी को यह लगने लगा है कि उनका भला कांग्रेस ही कर सकती है, बाकी किसी भी दल से कोई उम्मीद नहीं है। 10 सितंबर को अपने हमले का रुख मोड़ते हुए राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा और कहा कि उनकी साइकिल अब चल नहीं रही है। राहुल ने खेतासराय में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘पहले आपने हाथी (बसपा का चुनाव निशान) को हटाया और साइकिल ले आए लेकिन ये साइकिल (सपा का चुनाव निशान) चल नहीं रही है।’ उन्होंने कटाक्ष किया, ‘मुझे पता नहीं, कहीं ये साइकिल पंचर तो नहीं है या पीछे से बांध दी गई है या टूट गई है लेकिन ये चल नहीं रही है।’ राहुल और अखिलेश हाल ही में एक दूसरे की तारीफ कर चुके हैं। प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जनता से सीधा संवाद करने की कवायद में राहुल ‘देवरिया से दिल्ली यात्रा’ कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला। ‘मोदी जी अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं, उनका ध्यान या तो अमेरिका या फिर जापान (या ऐसे ही अन्य देशों) पर रहता है। राहुल बोले, ‘मोदी जी ने बड़े-बड़े वायदे किए थे कि हर किसी के खाते में पंद्रह-पंद्रह लाख रुपए आएंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा। बुलेट ट्रेन चलेगी… (लेकिन) ट्रेन के किराए बढ़ा दिए। उन्होंने गुरैनी मदरसा में दोपहर का भोजन किया। रोड शो में आए लोगों को अपनी 2500 किलोमीटर लंबी महायात्रा का मकसद समझाया। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल में देश के 15 सबसे अमीर लोगों के 1.10 लाख करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर दिए गए। अपने समय में हमने किसानों और गरीबों का 70 हजार करोड़ रुपए कर्ज माफ किए थे। राहुल ने यह भी समझाया कि मोदी ने अमीरों के कर्ज इसलिए माफ किए क्योंकि उनके पैसे से चुनाव में बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे और टीवी विज्ञापन दिए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने मंत्रियों को जिलों का दौरा करने को कह रही है तो मोदी अपने मंत्रियों को दो दो देशों का दौरा करने को कह रहे हैं।
छब्बीस वर्ष के बाद कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष और नेहरू-गांधी परिवार के उत्तराधिकारी राहुल गांधी पहुंचे अयोध्या
नौ सितंबर, 2016 की सुबह साढ़े नौ-दस बजे के आसपास जब राहुल गांधी अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी में दर्शन किया तो वे बाबरी मस्जिद कांड के बाद अयोध्या जाने वाले नेहरू-गांधी परिवार के पहले वंशज होंगे। 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री और राहुल के पिता राजीव गांधी ने कांग्रेस के लोक सभा चुनाव प्रचार की शुरुआत अयोध्या से की थी, हालांकि वे हनुमान गढ़ी नहीं जा पाए थे, हालांकि यह उनके कार्यक्रम में था। 1990 में सद्भावना यात्रा के दौरान राजीव गांधी का गुज़र अयोध्या से हुआ था। लेकिन तबसे हनुमान गढ़ी तो दूर, अयोध्या भी उनके परिवार का कोई कांग्रेसी नहीं गया। सोनिया ने फैज़ाबाद में तो सभाएं कीं लेकिन अयोध्या से वे दूर ही रहती आई हैं। वैसे, राजीव अयोध्या में हनुमान गढ़ी दर्शन से कहीं 'बड़ा' काम कर चुके थे जिसके बल पर उन्होंने 1989 के उस चुनावी सभा में 'राम-राज्य' लाने का वादा किया था। राहुल गांधी का हनुमान गढ़ी के दर्शन करने का कार्यक्रम पहले नहीं था। 9 सितम्ब की रात अचानक इसे राहुल जी के कार्यक्रम में जोड़ा गया। जोड़ा यह भी गया कि अयोध्या के बाद जब वे रोड शो करते हुए अम्बेडकरनगर जाएंगे तो किचौछा शरीफ़ दरगाह पर भी मत्था टेकेंगे। राहुल इस समय उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों-कस्बों में रोड शो कर रहे हैं. उनकी यात्रा को ‘किसान यात्रा’ का नाम दिया गया है. राहुल की यह यात्रा देवरिया से अपनी शुरुआत ही में 'खाट-प्रकरण' के कारण चर्चा या विवाद में आ गई. सोशल साइटों पर तब से 'खाट' ट्रेंड कर रहा है. देवरिया के बाद राहुल को गोरखपुर, गोण्डा होकर शुक्रवार को अयोध्या-फैज़ाबाद में रोड शो और किसानों से मुलाक़ात करते हुए अम्बेडकर नगर जाना था. “खाट-प्रकरण” उनके साथ-साथ चल रहा था लेकिन अब हनुमान गढ़ी का दर्शन उनके कार्यक्रम में जुड़ जाने से फोकस बदल गया लगता है. क्या कांग्रेसी रणनीतिकारों ने ‘किसान यात्रा’ में ऐन वक्त पर ‘मंदिर टच’ जान-बूझ कर दिया है? क्या राहुल के हनुमान गढ़ी दर्शन से कांग्रेस कोई ख़ास संदेश यू पी के मतदाताओं को देना चाहती है? क्या आने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा की काट के लिए कांग्रेस को थोड़ा हिंदू-झुकाव भी ज़रूरी लग रहा है? जिन ब्राह्मण वोटों पर इस बार कांग्रेस सबसे ज़्यादा ज़ोर दे रही है, क्या राहुल का हनुमान गढ़ी प्रवेश उसे आसान बना देगा? राहुल के हनुमान गढ़ी में पूजन-अर्चन को 27 साल पहले की उनके पिता की रणनीति से जोड़कर भी देखा जाने लगा है. राजीव गांधी ने अपने दोस्तों-सलाहकारों के कहने पर बाबरी मस्जिद मामले में कई तरह के फ़ैसले लिए थे: 1989 में विश्व हिंदू परिषद को अयोध्या के विवादित क्षेत्र में राम मंदिर के शिलान्यास की इजाज़त दी थी. इसकी परिणति छह दिसम्बर, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस में हुई, जिसने कांग्रेस को अपने व्यापक मुस्लिम जनाधार से वंचित कर दिया. 27 साल से कांग्रेस यूपी की सत्ता से बाहर है. '27 साल यूपी बेहाल' का नारा लेकर इस बार वह नए चुनावी प्रबंधन कौशल से प्रदेश में पैर जमाने निकली है. ये 27 साल यूपी में कांग्रेस की बदहाली के भी हैं. क्या इस बदहाली को दूर करने के लिए राहुल को अयोध्या और हनुमान गढ़ी की यात्रा ज़रूरी लग रही है? बताया तो यह जा रहा है कि अयोध्या-फैज़ाबाद से कांग्रेस का टिकट चाहने वालों ने, जिनमें एक महंत भी हैं, राहुल के सलाहकारों तथा कांग्रेस के रणनीतिकारों पर दवाब बनाया और तब बुधवार की रात राहुल के हनुमान गढ़ी जाने का कार्यक्रम तय हुआ. उन्हें यह समझाया गया कि सोनिया गांधी अपने वाराणसी रोड शो में काशी-विश्वनाथ के दर्शन नहीं कर पाई थीं. बहाना उनकी बीमारी बना लेकिन हिंदुओं में चर्चा यह रही कि रोड शो में बड़ी संख्या में मुस्लिम उपस्थिति देख कर सोनिया बाबा विश्वनाथ के दर्शन करना टाल गईं. राहुल और उनके सलाहकारों की रणनीति यदि इस बहाने हिंदू-कार्ड चलना है तो इतिहास में, विशेषकर राजीव गांधी की मंदिर-चाल में उनके लिए एक बड़ा सबक़ तो हो ही सकता है, यदि वे उस ओर देखना चाहें. तनिक वाम झुकाव वाली कांग्रेस की मध्यमार्गी नीति से किनारा करते हुए राजीव गांधी ने 1986 से 1989 के बीच हिंदू झुकाव का जो रास्ता अपनाया उसने जहां देश को विकास के मार्ग से भटका कर धर्म की राजनीति का अखाड़ा बना दिया वहीं कांग्रेस पार्टी के धीरे-धीरे अप्रासंगिक होते जाने का रास्ता भी तैयार कर दिया था. धर्म की राजनीति करने के लिए दूसरी पार्टियां अखाड़े में पहले से मौजूद थीं. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों की सहायता से भाजपा ने फ़ौरन राम मंदिर को चुनावी राजनीति का मुख्य मुद्दा बना डाला. आज भी राहुल और उनकी कांग्रेस इस मामले में भाजपा का क़तई मुकाबला नहीं कर सकते. भाजपा को टक्कर देने के लिए उस ही की तरह बनने की कोशिश करने की बजाय कांग्रेसी मूल्यों की पुनर्स्थापना क्या बेहतर तरीक़ा नहीं होगा? जिस निचले पायदान पर आज कांग्रेस खड़ी है वहां से उसे वापसी का रास्ता ढूंढना है. उससे नीचे मोदी जी का ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और वहां कांग्रेस निश्चय ही नहीं लुढ़कना चाहेगी. आश्चर्य है कि राहुल अपने रोड शो और किसान पंचायतों में सीधे नरेंद्र मोदी और उनकी 'सूट-बूट की सरकार' को निशाना बना रहे हैं. उनके प्रचार का अंदाज़ लोकसभा चुनाव की याद दिलाता है. किसानों की ऋण माफी का मुद्दा वे सीधे विजय माल्या से जोड़ते हैं लेकिन मुख्यमंत्री पद की अपनी उम्मीदवार 'दिल्ली का कायाकल्प कर देने वाली' शीला दीक्षित को प्रदेश के मतदाताओं से परिचय नहीं करा रहे.
राहुल को मिला पीएम बनने का आशीर्वाद 
किसान यात्रा के चौथे दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। हनुमानगढ़ी मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना की। वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद गांधी परिवार के किसी सदस्य का अयोध्या का यह पहला दौरा है। राहुल ने शुक्रवार को हनुमानगढ़ी में माथा टेकने के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास से उनके आवास पर जाकर भेंट की और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को संजीवनी मिले इसके लिए आशीर्वाद मांगा। राहुल गांधी ने महंत ज्ञानदास की ओर से हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की, वही महंत ज्ञानदास ने भी राहुल गांधी को यशस्वी होने के साथ भविष्य में उच्च सफलता के लिए आशीर्वाद देते हुए उनका स्वागत किया। बंद कमरे में उनकी मुलाकात करीब 7:00 मिनट तक चली इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री मौजूद थे। मुलाकात के बाद महंत ज्ञानदास में कहा कि उनके बीच कोई विशेष गोपनीय वार्ता नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार तीर्थ में आने पर लोग दर्शन पूजन के लिए जाते हैं और संतों का आशीर्वाद लेते हैं इसी कड़ी में राहुल गांधी भी यहां आए थे और उन्होंने आशीर्वाद मांगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो भी आएगा हमारा धर्म बनता है कि उसके उज्जवल भविष्य की कामना करें। उन्होंने कहा की हानि-लाभ, जीवन-मरण यह सब विधाता के हाथ में है। राम मंदिर से जुड़े सवाल को पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जब रामलला चाहेंगे तभी मंदिर का निर्माण होगा उन्होंने विहिप पर आरोप लगाया राम मंदिर निर्माण में वास्तविक बाधा वह स्वयं है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित स्तंभकार हैं, इनसे 08922002003 पर संपर्क किया जा सकता है)
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