ताज़ा ख़बर

कविता के जरिए मोदी पर हिन्दू संगठनों ने शुरू किए प्रहार, एक कवि ने कहा- 'अहंकार में डूबे पीएम'

नई दिल्ली। हिन्दू संगठनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराजगी साफ झलक रही है। कार्यक्रमों में लगातार मोदी से हिंदुत्वह के मुद्दे को किनारे करने पर सवाल पूछे जा रहे हैं। विश्वह हिन्दूम महासंघ एवं युवा हिन्दू वाहिनी ने अपने कार्यकर्ता सम्मेूलन के साथ-साथ कवि सम्मेेलन भी आयोजित कराया। 25 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रभात परवाना नाम के कवि ने नरेंद्र मोदी पर एक कविता सुनाई। वीर रस की कविता में परवाना प्रधानमंत्री से पूछते हैं कि अच्छेा दिन कब आएंगे। अपनी कविता में प्रभात ने कई विवादित मुद्दों पर कलम चलाई है। गोरक्षकों को ‘गुंडा’ कहे जाने पर प्रभात मोदी से पूछते हैं कि ऐसा कब तक चलेगा। प्रभात ने कविता में कहा है कि मोदी सबसे ऊंची कुर्सी पाकर ‘अहंकार में डूब’ गए हैं। प्रभात ने पूछा है कि ‘क्यान यह मोदी वही मोदी है जो गुजरात से आया था?’ गौरतलब है कि गौरक्षकों पर बयान देकर प्रधानमंत्री ने हिन्दूर संगठनों की नाराजगी मोल ले ली थी। हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लीगल नोटिस भेजने का फैसला किया था। हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणि ने कहा था कि पीएम ने किस आधार पर 80 फीसदी गौरक्षकों को गुंडा करार दिया है। इसके लिए वो पीएम को लीगल नोटिस भेजेंगे। यही नहीं स्वामी चक्रपाणि ने कहा पीएम को ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए। वहीं हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रेसीडेंट चंद्रप्रकाश कौशिक ने कहा था कि ‘नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के काबिल ही नहीं है। वह वाजपेयी की तरह उसी तरह लौटेंगे जिस तरह वह 2004 में लौटे थे।’ उधर, गौरक्षकों के मुद्दे पर गुजरात में विश्व हिन्दू परिषद ने भी कड़ा एतराज जताया है। विहिप ने प्रेस नोट जारी करते लिखा कि ‘1 लाख से ज्यादा गायों का क़त्ल हो रहा है, बावजूद कड़ा कानून नहीं है। गौरक्षक गुंडों के वेश में आते हैं, इस बयान से गौरक्षकों को सदमा लगा है।’  
परवाना की कविता
भूखे पेटों को जाने कब एक निवाला जाएगा, कहो चुनावी वादों का कब कर्ज उतारा जाएगा 
गौरक्षक बोलो मोदी कब तक गुंडा कहलाएगा, बच्चा-बच्चा पूछ रहा कब अच्छा दिन आएगा 
सबसे ऊंची कुर्सी पाकर अहंकार में डूब गए, राम का मंदिर बनवाऊंगा, भाषा शायद भूल गए
गंगालय पर बाढ़ आई जो सारी कसमें याद करो, 56 इंची सीने वाली सारी कसमें याद करो 
जनता के कानों में मक्खन-मिश्री घोला था, सबके अच्छे दिन आएंगे मोदी तुमने बोला था 
कब तक भारत माता यूं ही हाय-हाय चिल्लााएगी, डायन कहने वालों की कब जीभ काटी जाएगी
लव लेटर की भाषा मोदी तुमको नहीं सुहाती है, भगत सिंह के चेहरे पर जब कालिख पोती जाती है
भारत तेरे टुकड़े होंगे कोई भौंक गया, मोदी फिर भी चुप बैठे, सारा देश चौंक गया 
खून हो गया पानी पानी, यौवन भी शरमाया था, क्या ये मोदी वो मोदी है, जो गुजरात से आया था.
 साभार- जनसत्ता
  • Blogger Comments
  • Facebook Comments

0 comments:

Post a Comment

आपकी प्रतिक्रियाएँ क्रांति की पहल हैं, इसलिए अपनी प्रतिक्रियाएँ ज़रूर व्यक्त करें।

Item Reviewed: कविता के जरिए मोदी पर हिन्दू संगठनों ने शुरू किए प्रहार, एक कवि ने कहा- 'अहंकार में डूबे पीएम' Rating: 5 Reviewed By: न्यूज़ फ़ॉर ऑल