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पाक को फटकार से सिद्ध हुआ कि मोदी से ज्यादा कड़े तेवर हैं राजनाथ के, फिर राजनाथ पीएम क्यों नहीं?

इस्लामाबाद। भारत पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्ते किसी से छिपे नहीं है। पर, दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा चुनाव से पहले यूपीए सरकार पर बरसते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को कई बार ललकारा। पर दुर्भाग्य कि पीएम बनने के बाद उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश नहीं दिया और ना ही कभी तीखा वार किया। जबकि सार्क सम्मेलन के लिए इस्लामाबाद पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को आईना दिखाया और उसे खूब खरी-खोटी सुनाई। राजनाथ के तेवर को देखकर लोक नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह के बीच तुलना करने लगे हैं। चर्चा है कि जिस तरह राजनाथ ने पाकिस्तान की जमीं पर ही उसे फटकार लगाई, उससे सिद्ध होता है कि राजनाथ सिंह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ज्यादा करंट है और वे मौके की नजाकत को देखते कभी भी चूकने वाले नहीं है।यदि आम चर्चाओं की बात करें तो लोगों का कहना है कि आज के हालात को देखकर यदि राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री होते तो बात ही कुछ और होती। यानी राजनाथ सिंह को नरेन्द्र मोदी से ज्यादा काबिल नेता के रूप में देखा जाने लगा है। राजनाथ सिंह आतंकवादियों का महिमामंडन बंद किए जाने के साथ ही आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया। दक्षेस के गृह मंत्रियों की बैठक में राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों का 'शहीदों' की तरह महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'केवल आतंकवादियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि इसका समर्थन करने वाले संगठनों, व्यक्तियों तथा देशों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सिर्फ निंदा ही काफी नहीं।' इस बीच खबर यह भी आई की राजनाथ सिंह के इस भाषण को पाकिस्तान के चैनलों पर ब्लैक आउट कर दिया गया। हालांकि भारत सरकार प्रसारित नहीं किया गया. भारत ने इन खबरों को 'गुमराह करने वाला' बताया। भारत-पाकिस्तान में जारी तनाव इस सम्मेलन में भी साफ तौर से दिखा जब राजनाथ सिंह का जब अपने पाकिस्तानी समकक्ष चौधरी निसार अली खान से पहली बार आमना-सामना हुआ, तो दोनों नेताओं ने बमुश्किल ही हाथ मिलाया। खान ने सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने आये गणमान्य लोगों के लिए भोज का आयोजन किया था। हालांकि मुख्य बैठक में आयोजित इस भोज में खान खुद ही शामिल नहीं हुए। इससे नाराज होकर राजनाथ सिंह ने वहां लंच नहीं किया। बाद में गृहमंत्री ने अपने होटल के कमरे में अपने साथ आए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ लंच किया औक इसके बाद वह भारत के लिए रवाना हो गए। इससे पूर्व राजनाथ सिंह के पाकिस्तान पहुंचते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर राग छेड़ दिया था। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला नहीं है। नवाज शरीफ ने पाक विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कश्मीर में 'आज़ादी' की एक नई लहर है और कश्मीर भारत का अंदरूनी मसला नहीं है. नवाज़ ने राजनयिकों से कहा कि वह यह बात दुनिया को बताएं। शरीफ ने कहा कि यह आंदोलन कश्मीर के अवाम की तीसरी पीढ़ी की रगों में दौड़ रहा है और आठ जुलाई की घटना के जरिए दुनिया ने खुद इसकी गंभीरता देखी है। उन्होंने हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के कश्मीर में मारे जाने का जिक्र करते हुए यह कहा। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी युवा आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए कुर्बानी के नए अध्याय लिख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गोलियों से उनकी आंखों की रोशनी चली गई लेकिन स्वतंत्रता की आकांक्षा उन्हें गंतव्य की ओर दिशानिर्देशित कर रही है।’’ शरीफ ने पाकिस्तानी दूतों से कहा कि राजदूतों को दुनिया को यह महसूस कराना चाहिए कि कश्मीर भारत की अंदरूनी समस्या नहीं है क्योंकि भारत ने पहले ही स्वीकार किया है कि यह विवादित क्षेत्र है और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे भारत और पाक के बीच विवाद बताया है। वहीं दूसरी ओर बुधवार को इस्लमाबाद में सम्मेलन की जगह के बाहर स्थानीय लोगों ने राजनाथ के खिलाफ प्रदर्शन किया. बताया जा रहा है कि यह विरोध-प्रदर्शन आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन की अगुवाई में किया जा रहा है।  
बगैर लंच किए ही लौटे आए स्वदेश 
हाल ही में कश्मीर में मारे गए हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की ओर इशारा करते हुए राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद का महिमामंडन बंद होना चाहिए और आतंकियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और आतंकियों की सिर्फ आलोचना करना ही काफी नहीं है, उन पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो रहे सार्क सम्मेलन में आतंकवाद पर खरी-खरी बात कही। रिश्तों में तल्खी का सबूत ये भी था कि राजनाथ सिंह लंच में भी शामिल नहीं हुए। लंच पार्टी पाकिस्तानी गृहमंत्री चौधरी निसार खान ने दी थी। खुद निसार भी लंच में शामिल नहीं हुए। बता दें कि दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेने गृह मंत्री राजनाथ सिंह कल ही इस्लामाबाद पहुंचे थे। इस दौरान उनका विरोध भी किया गया। आज उन्होंने सदस्य देशों के अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की। राजनाथ दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ उनके कार्यालय में मुलाकात की।
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