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'जश्न ए कश्मीर' पर भड़का संघ, कहा- पाक उच्चायुक्त को वापस भेजा जाए

नई दिल्ली। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में पाक उच्चायुक्त के कश्मीर पर दिए बयान पर देशभर से विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। विरोध की गूंज के बीच आरएसएस विचारक ने कुछ ऐसा कहा है, जो चौंकाने वाला है। बासित के जश्न ए आजादी को कश्मीर की आजादी के नाम करने वाले बयान पर संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सीधे-सीधे भारत सरकार से अब्दुल बासित को पाकिस्तान भेजने की मांग की है। राकेश सिन्हा ने कहा है कि अब्दुल बासित ने अपने दिए बयान से साबित कर दिया है कि वह राजदूत नहीं, वह जिहादियों के भारत में प्रतिनिधि हैं। और एेसे प्रतिनिधि को भारत की जमीन पर एक क्षण भी रहने का अधिकार नहीं है। भारत सरकार को बिना-विलंब उन्हें पाकिस्तान वापस भेज देना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि हम अगला स्वतंत्रता दिवस पाकिस्तान में तीन जगहों पर मनाएंगे। राकेश सिन्हा ने कहा है कि बासित ने बयान दिया है वो अक्षम्य है। वह (बासित) यहां बैठकर भारत के भीतर अलगाववादियों, आतंकियों और विघटनकारियों को प्रोत्साहन दे रहे हैं। यदि उन्हें वापस नहीं भेजा गया तो इसका साफ संदेश उन अलगाववादियों को जाएगा कि भारत सब चीजों को सहन करने के लिए तैयार है। हम अपनी एकता और अखंडता को किसी प्रकार से सहन नहीं करेंगे। और यदि पाकिस्तान भारत को युद्ध के लिए प्रेरित कर रहा है तो उसे 1965 और 1971 नहीं भूलने चाहिए। मुझे लगता है कि भारत ने एक बात दोहराई है कि बलूचिस्तान की आजादी, बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का स्थापित करना, ये हमारा इस स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प है। और पाकिस्तान को बता देना चाहते हैं कि हम अगला स्वतंत्रता दिवस पाकिस्तान में तीन जगहों पर मनाया जाएगा... पाकिस्तान, बलूचिस्तान और सिंध। बलूचिस्तान के मुद्दे पर राकेश सिन्हा है कहा है कि बंग्लादेश जब बन रहा था, जब जिस तरह से पाकिस्तानी सेना वहां के लोगों के मानवाधिकारों का हनन किया। उससे ज्यादा मानवाधिकारों का हनन पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में कर रही है, वहां के लोगों को बोलने की आजादी नहीं है। महिलाओं के सम्मान पर हमला किया जा रहा है। बलूचिस्तान में मानवाधिकारों को स्थापित करने का नैतिक दायित्व अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर है और विशेषकर एक नैतिक दायित्व भारत पर है। वहां हिंदूओं की संख्या 1 फीसदी से भी कम हो गई है। भारत को सक्रिय हस्तपेक्ष के लिए आज पाकिस्तान आमंत्रित कर रहा है। भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित के कश्मीर पर दिए विवादित बयान पर सभी दलों ने कड़ा एतराज जताया है। सभी दलों ने एक सुर में पाकिस्तान की इस हरकत की निंदा करते हुए कहा है कि पाकिस्तान बौखलाहट में ऐसे बयान दे रहा है लेकिन उसके मसूबे ऐसे बयान देकर कभी कामयाब नहीं होंगे। दरअसल, पाकिस्तान अपनी जश्न-ए-आजादी के मौके पर भी कश्मीर के मुद्दे उठाने से बाज नहीं आया। बासित ने कहा कि कश्मीर की आजादी तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। कश्मीर के लिए जान देने वालों की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। वहीं, शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने भी अब्दुल बासित को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा व्यक्ति जो दिल्ली में बैठकर कश्मीर तोड़ने की बात करता है तो उसको तुरंत इस्लामाबाद भेज देना चाहिए। दिल्ली-मुबंई के पाक ऑफिसों में ताला लगा देना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस स्वतंत्र देश का बनाया जाता है। पाक कोई देश नहीं है वो आतंकियों का गढ़ है। उनका कोई स्वतंत्रता दिवस नहीं होता है। बातचीत से कोई फायदा नहीं होगा। ये अच्छी बात है कि पीओके में भारत की जय के नारे लगते हैं। हम इसका स्वागत करते हैं। ऐसा लग रहा है कि पीएम के पाक अधिकृत कश्मीर पर बयान के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ सा नजर है। इसी वजह से अब्दुल बासित ऐसे उलूलू-जुलूल बयान अपनी जश्ने आजादी के मौके पर देते नजर आ रहे हैं।
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