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बजने लगा है यूपी में डंका, आ रही हैं बहन प्रियंका

प्रियंका गांधी ने बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति को कांग्रेस में शामिल कराया, पीके के मास्टर प्लान के आगे सभी दलों के चित होने की चर्चा, सूबे में अभी से बहने लगी है कांग्रेस की हवा, चुनाव तक यह हवा ले लेगा तूफान का रूप 
राजीव रंजन तिवारी 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तिथि अगले वर्ष यानी 2017 में जारी होगी, लेकिन यूपी में अभी से कांग्रेस की हवा बहने लगी है। कांग्रेसी कह रहे हैं- ‘बजने लगा है यूपी में डंका, आ रही हैं बहन प्रियंका।’ अभी हाल ही में प्रियंका गांधी ने बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति को कांग्रेस में शामिल कराया। अखिलेश सिंह कभी कांग्रेस पार्टी के ही विधायक थे, लेकिन अखिलेश पर तमाम आपराधिक मामले दर्ज हुए और वो कांग्रेस से बाहर कर दिए गए। जानकार बताते हैं कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के मास्टर प्लान के आगे सभी दलों की रणनीतियां विफल होती दिख रही है। यही वजह है कि सभी गैर कांग्रेसी दलों में बेचैनी का आलम है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि भले विधानसभा चुनाव वर्ष 2017 में हो, लेकिन कांग्रेस के पक्ष में अभी से हवा बनने लगी है। समझा जा रहा है कि यदि इसी तरह पार्टी की गतिविधियां जारी रही तो चुनाव के समय तक यह हवा तूफान का रूप ले लेगा। फिर अन्य दलों को अपना अस्तित्व बचाना भारी पड़ेगा। तीन बार कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले अखिलेश ने बाद में बतौर निर्दलीय और फिर पीस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा का चुनाव रायबरेली की सदर सीट से जीता। अभी सिटिंग विधायक अखिलेश ने फैसला कर लिया कि, अब वो अपनी जगह अपनी बेटी को विधानसभा का चुनाव लड़ाएंगे। पहले बसपा, एसपी और बीजेपी से उनकी बेटी के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज थी, लेकिन अंदरखाने प्रियंका गांधी ने अहम रोल निभाया और अखिलेश की बेटी अदिति कांग्रेस में शामिल हो गयीं। अब वो रायबरेली सदर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। ये बात सभी जानते हैं कि रायबरेली में अखिलेश का अपना वोटबैंक है। वो किसी भी पार्टी के लिए एक अहम सियासी हथियार हो सकते हैं। इसीलिए जब उन्होंने अपनी बेटी को सियासत में उतारने का फैसला किया तो हर पार्टी ने उन पर डोरे डाले, लेकिन बाद में प्रियंका गांधी ने अमेठी राजघराने के संजय सिंह के ज़रिये अखिलेश से संपर्क साधा और विदेश से पढ़कर लौटी उनकी बेटी अदिति को कांग्रेस में शामिल करा दिया, जिससे रायबरेली में अखिलेश की ताक़त से कांग्रेस को और मज़बूती मिले, साथ ही अपने गढ़ में एक बड़ी चुनौती ख़त्म हो जाये। खास बात ये रही कि, अदिति को कांग्रेस में प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद की मौजूदगी में दिल्ली में शामिल कराया गया, जो बताता है कि, अखिलेश रायबरेली में कितनी हैसियत रखते हैं। यूपी में कांग्रेस का अमोघ अस्त्र हैं प्रियंका कांग्रेस ने आखिर तय कर ही लिया है कि उत्तर प्रदेश में फिर से उभरे बिना देश की राजनीति में डंका बजाना नामुमकिन है। पार्टी अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जब वह किसी और बुरे वक्त के लिए संजीवनी बूटी बचाकर नहीं रख सकती। जब से प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का मैनेजर बनाया गया। करीब तीन महीने पहले से इस तरह की खबरें आने लगी थीं कि प्रशांत किशोर ने फॉर्मूला दिया है कि प्रियंका गांधी कांग्रेस का प्रचार करें और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया जाए। 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने 10 जनपथ पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ लंबी मुलाकात की। इसके बाद आजाद ने कहा, 'हम सब चाहते हैं कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रचार करें। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला खुद उन्हीं को करना है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका उससे कहीं बड़ी होने जा रही है, जितनी वह अभी नजर आती है। प्रशांत के फॉर्मूले के तहत ही आजाद को भरोसेमंद मुस्लिम चेहरे के तौर पर यूपी भेजा गया। पार्टी के दूसरे मुस्लिम चेहरे सलमान खुर्शीद कुछ दिन पहले अचानक ट्विटर प्लेटफॉर्म पर उतरे और बीजेपी के खिलाफ धुआंधार मोर्चा खोल दिया। फैजाबाद से सांसद रहे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री आचार्य नरेंद्र देव के नाती हैं और गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं, लेकिन प्रशांत के जातिगत फॉर्मूले में वे फिट नहीं बैठ रहे हैं। कांग्रेस की रणनीति ब्राह्मण और मुस्लिम, दोनों को अपनी ओर खींचने की है। वैसे, प्रियंका के प्रचार मैदान में उतरने की संभावना से खत्री उत्साहित हैं, 'प्रियंका प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगी तो जनता और कार्यकर्ता, दोनों में नया जोश आएगा।' शीला दीक्षित को यूपी भेजने की बात पक्की हो गई। इसकी एक नजीर तो यह है कि आम तौर पर चुनाव से महीने भर पहले प्रत्याशी घोषित करने वाली पार्टी ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया जून के पहले हफ्ते से ही शुरू कर दी। इसके तहत हर दावेदार को बूथ प्रतिनिधियों की लिस्ट के साथ अपना बायोडाटा प्रशांत की टीम को ईमेल करना है। इसके बाद प्रशांत की टीम संबंधित दावेदार से फोन पर बात करेगी। कई मामलों में दावेदारों से अपने सभी बूथ प्रतिनिधियों के साथ लखनऊ आने के लिए भी कहा जा रहा है, ताकि उन्हें ट्रेनिंग दी जा सके। इस पूरी कवायद से प्रशांत हर बूथ पर कांग्रेस के लिए कम से कम आठ-दस समर्थकों का डाटा बैंक तैयार कर लेना चाहते हैं जो चुनाव अभियान को जमीनी बनाने में मदद करेगा। ऐसे में कोई कहे या न कहे, वहां प्रशांत किशोर की भूमिका ही सबसे अहम है। उनकी टीम पैनल के तीन नामों के बारे में विधानसभा क्षेत्र के 1,000 लोगों से फोन पर बात करेगी। जिस प्रत्याशी को सबसे ज्यादा लोग ठीक बताएंगे, उसे ही टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस की कोशिश है कि अगस्त तक प्रत्याशियों के नाम फाइनल हो जाएं। यानी प्रियंका के मैदान में आने से पहले कांग्रेस के पास अपने बूथ एजेंटों की 'जिंदा' सूची होगी और हर विधानसभा में कार्यकर्ताओं का बड़ा डाटा बेस होगा।
प्रियंका गांधी के आने की चर्चा से कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह 
कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी के सामने आने की सूचना से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। बताते हैं कि प्रियंका गांधी के आने से जनता कांग्रेस के पीछे आएगी और बहुत से लोग पार्टी में लौटेंगे। असल बात यह है कि कांग्रेस का माहौल बनेगा। पार्टी मानकर चल रही है कि प्रियंका के आने का सबसे ज्यादा असर शहरी मतदाता पर दिखेगा। संयोग से इन सीटों पर पारंपरिक रूप से बीजेपी का दबदबा रहा है। यानी इन सीटों पर पारंपरिक वोट के साथ ही प्रियंका के आने से आया उत्साह और ब्राह्मण-मुस्लिम समीकरण मिलकर कांग्रेस की किस्मत बदल सकते हैं। वैसे भी पिछले विधानसभा चुनाव में 405 में से सिर्फ 28 सीटें पाने वाली कांग्रेस इस बार 100 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर चुनाव चौतरफा हुआ तो कांग्रेस कम वोट हासिल करके भी पर्याप्त सीटें हासिल कर सकती है। जानकार बताते हैं कि वर्ष 1999 में मुंशीगंज गेस्ट हाउस में कांग्रेसी नेता सतीश शर्मा और किशोरी लाल शर्मा एक अहम बैठक में मौजूद थे। उस दौरान प्रियंका गांधी ने ऐलान किया कि वो उसी दोपहर से कैम्पेन पर निकल रहीं है और उन्होंने अपने दिवंगत पिता राजीव के पसंदीदा इलाकों में से एक तिलोई को चुना। तिलोई तहसील के मोहनगंज इलाके में गाड़ी से उतर कर, एसपीजी सुरक्षाकर्मियों की परवाह किए बिना प्रियंका ने कस्बे में पैदल चलना शुरू कर दिया। जबकि न कभी प्रियंका ने यहां चुनाव लड़ा है और न ही कभी ऐसी मंशा ज़ाहिर की है। एक वजह तो प्रियंका गांधी का अपनी मां और भाई के चुनाव प्रबंधन से जुड़ाव दिखती है। बताते हैं कि 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने एक बयान दिया था कि कांग्रेस अब बूढ़ी हो चली है। इस पर जब प्रियंका की प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि क्या मैं बूढ़ी दिखती हूं। जो लोग प्रियंका की हाज़िरजवाबी का लोहा मानते हैं उनमें सांसद संजय सिंह भी हैं, जो प्रियंका और राहुल गांधी के बीच में तुलना को भी ये कहकर गलत बताते हैं, "एक ही हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती, इसलिए दोनों की अपनी शख्सियतें अलग हैं"। नेहरू-गांधी परिवार के करीबी लोग बताते हैं कि अगर इंदिरा गांधी का रुआब उनके परिवार में किसी को विरासत में मिला है तो वो प्रियंका गांधी हैं। राय बरेली-अमेठी में प्रियंका अपने दौरों के दौरान यदा-कदा इंदिरा गांधी की साड़ी भी पहन कर निकल जातीं हैं। एक दशक से भी ज़्यादा से प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्रों अमेठी, राय बरेली में कैम्पेन के दौरान नज़र भी रखतीं हैं और उसे दिशा भी देतीं रहीं हैं। बहराल, प्रियंका गांधी ने हमेशा इस तरह की मांगों को कम तवज्जो दी है और अपनी मां और भाई के लिए काम करने की ही बात दोहराई है। कॉंग्रेस का एक बड़ा तबका मानता रहा है कि नेहरू-गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत उनमें दूसरों से ज़्यादा है और उन्हें कॉंग्रेस की कमान संभालनी चाहिए।  
अदिति के रूप में कांग्रेस को मिला नया महिला चेहरा 
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को एक नया महिला चेहरा मिला है। हाल के दिनों में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं की आवा-जाही देख चुकी कांग्रेस उत्तनर प्रदेश में खुद को आगे रखने में कामयाब रही है। राय बरेली के चर्चित नाम अखिलेश सिंह की बेटी अदिति ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। अदिति को कांग्रेस में शामिल कराने में प्रियंका गांधी का अहम रोल है। प्रियंका ही अपनी मां सोनिया गांधी की लोकसभा सीट राय बरेली का सारा काम संभालती हैं। पांच बार विधायक रह चुके अखिलेश तीन बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। अब, अदिति विधानसभा चुनावों में राय बरेली सदर सीट से कांग्रेस उम्मीचदवार होंगी। उनकी उम्मी दवारी पर पिता अखिलेश सिंह ने भी सहमति जता दी है। अदिति को लगता है कि प्रियंका युवाओं को अपील करती हैं और उन्हेंस राज्यै भर में कांग्रेस के लिए प्रचार करना चाहिए। राजनैतिक गलियारों में इन चुनावों को 2019 लोकसभा चुनाव का क्वा र्टर फाइनल बताया जा रहा है। राज्यक में सत्ता धारी सपा के सामने जहां एंटी इनकम्बेंवसी फैक्टचर से निपटने की चुनौती होगी। वहीं विपक्षी दल कानून-व्यववस्थान, धार्मिक अशांति जैसे कई मुद्दों पर अखिलेश यादव सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। राज्यव में पिछले ढाई दशक से सत्ताट से बाहर कांग्रेस के सामने अपना खोया हुआ सम्माैन वापस पाने की चुनौती है। प्रशांत किशोर कांग्रेस नेताओं से मिलकर लगातार मिशन 2017 की तैयारियों में जुटे हुए हैं। किशोर का मानना है कि इससे कांग्रेस को उत्तेर प्रदेश में निश्चित तौर पर बढ़त मिलेगी। 
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और चर्चित स्तंभकार हैं, इनसे फोन नं.- 08922002003 पर संपर्क किया जा सकता है)
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