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यूपी में कांग्रेस की कुटनीति से सपा चित, भाजपा-बसपा में भी खलबली

राजीव रंजन तिवारी 
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही कांग्रेस के दांव से सभी गैर भाजपाई दल सकते में हैं। खासकर सपा की तो गणित ही बिगड़ गई है। सपा जिस वोट बैंक के भरोसे अपनी सियासत को आगे बढ़ा रही थी और पुनः सत्ता में आने का सपना देख रही थी वह फिलहाल ध्वस्त होता दिख रहा है। हालांकि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, इसलिए भविष्य में क्या उलटफेर होगा, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल राज बब्बर और इमरान मसूद के हाथ यूपी कांग्रेस की कमान सौंपकर पार्टी हाईकमान ने जबर्दस्त कुटनीतिक चाल चली है। जिसकी काट अन्य गैर भाजपा दलों को ढूंढना मुश्किल होगा। इतना नहीं इस बदले समीकरण से भाजपा में भी खलबली की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि यूपी के सियासी समीकरणों के मद्देनजर यह कयास लगाया जा रहा था कि भाजपा और सपा के बीच ही यूपी की सियासी लड़ाई सिमट कर रह जाएगी। क्योंकि भाजपा को हिन्दूवादी कार्ड और सपा मुस्लिम कार्ड पर दारोमदार था। अक्सर यह आरोप भी लगते रहते हैं कि भाजपा और सपा में अंदरूनी तालमेल भी है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हां, जो प्रत्यक्ष रूप से दिख रहा था वह यही था सपा मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में करने में जुटी हुई थी और भाजपा हिन्दू वोट को तो अपनी जागीर मानती ही है। कहा तो यहां तक जाता है कि चुनाव से पहले सपा और भाजपा मिलकर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय में कटुता भी पैदा करेगी ताकि वोटों का ध्रूवीकरण इन्हीं दोनों दलों के बीच हो सके। इस बीच कांग्रेस ने यूपी में सत्तारूढ़ सपा के खेल को बिगाड़ दिया है। जानकार बताते हैं कि सपा खेमे में यह मंथन शुरू हो गया है कि आखिर अब कौन सी रणनीति बनाई जाए, जिसके सहारे आगामी विधानसभा चुनाव की लड़ाई में वह मुख्य भूमिका में रहे। इसके लिए तरह-तरह के सुझाव आ रहे हैं, लेकिन कोई ठोस रणनीति नहीं बन पा रही है। दरअसल, कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता व मुस्लिम नेता राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों वोटों में अच्छी पकड़ रखने वाले इमरान मसूद उपाध्यक्ष बनाकर शानदार प्रयोग किया है। कहा जा रहा है कि राज बब्बर और इमरान मसूद के यूपी की सियासत में सक्रिय भूमिका निभाने की वजह से सपा का समीकरण बिगड़ गया है। पहले कहा जा रहा था कि सपा मुस्लिमों और भाजपा हिन्दुओं के सहारे चुनाव मैदान में मुख्य भूमिका में रहेगी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। अब मुख्य भूमिका में सपा की जगह कांग्रेस रहेगी। यूं कहें कि अब सीधी टक्कर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही संभव है। हालांकि राजनीति में कुछ स्थायी नहीं होता। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में और क्या-क्या उलटफेर होंगे, पर इतना जरूर है कि कांग्रेस ने अपनी कुटनीतिक सियासी रणनीति के आगे सबको धराशायी कर दिया है। अब देखना यह है कि भविष्य कौन-कौन दल किस-किस तरह खुद मुख्य भूमिका में लाने की कोशिश करते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इनसे फोन नं.-8922002003 पर संपर्क किया जा सकता है।)
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