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स्टिंग मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत की ही होगी जीत?

नई दिल्ली। स्टिंग ऑपरेशन मामले में कांग्रेसियों व हरीश रावत समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की ही जीत होगी। कांग्रेसी मानते हैं कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया है। सीबीआई ने मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत से ढाई घंटे तक पूछताछ की। समझा जा रहा है कि हरीश रावत से इस मामले में पूछताछ पूरी हो चुकी है। सीबीआई अब या तो मुकदमा दर्ज करेगी या उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिक सूचना को रद्द कर देगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत से सीबीआई ने पूर्वाह्न् 11 बजे से पूछताछ शुरू की। सीबीआई के अफसरों की टीम ने विधायकों की कथित खरीद फरोख्त से संबंधित वे सवाल पूछे, जिनके जवाब उन्होंने पिछली पूछताछ के दौरान नहीं दिए थे। दोपहर डेढ़ बजे मुख्यमंत्री पूछताछ खत्म होने के बाद तीन मूर्ति स्थित अपने आवास के लिए रवाना हुए। स्टिंग मामले में सीबीआई मुख्यमंत्री हरीश रावत से दो बार पूछताछ कर चुकी है। जानकारों का कहना है कि अब हरीश रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा या सबूत नहीं मिलने पर प्राथमिक जांच को खारिज कर दी जाएगी, हालांकि बारे में सीबीआई ने अभी कुछ नहीं कहा है। मंगलवार सुबह सीबीआई दफ्तर जाते समय मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्रकारों से कहा कि वह इस मामले की जांच में सीबीआई को पूरी मदद करेंगे। लेकिन सीबीआई को इस मामले में भाजपा के उन नेताओं से भी पूछताछ करनी चाहिए, जिनके नाम सीडी में आए हैं। रावत ने कहा कि स्टिंग की सीडी में स्टिंगकर्ता भाजपा के कुछ नेताओं के नाम लेकर विधायकों के सौदे की बात कह रहा है। लेकिन सीबीआई ने इन भाजपा नेताओं को अभी तक पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा राज्य के विकास को रोकने के लिए षडयंत्र कर रही है। पीई पहला कदम होता है जिसमें एजेंसी इसे मिली शिकायत पर तथ्यों का सत्यापन करती है। पीई के दौरान एजेंसी किसी व्यक्ति से केवल जांच में शामिल होने का आग्रह कर सकती है। समन नहीं भेज सकती, छापे नहीं मार सकती या गिरफ्तारी नहीं कर सकती। वह एफआईआर दर्ज कर सकती है या पीई को बंद कर सकती है। सीबीआई ने 29 अप्रैल को प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी। स्टिंग में रावत बागी कांग्रेस विधायकों को कथित तौर पर रिश्वत की पेशकश करते दिखते हैं ताकि विधानसभा में वे शक्ति परीक्षण के दौरान उनका समर्थन कर सकें। बागी कांग्रेस विधायकों द्वारा स्टिंग जारी किए जाने के बाद रावत ने आरोप से इनकार किया और वीडियो को फर्जी करार दिया। लेकिन बाद में कैमरे में खुद के होने की बात स्वीकार की। शक्ति परीक्षण में रावत की जीत के बाद 15 मई को कैबिनेट बैठक हुई थी और स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच की सिफारिश करने संबंधी अधिसूचना को वापस ले लिया गया। लेकिन सीबीआई द्वारा की जा रही जांच को रोकने का उनका आग्रह उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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