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केन्द्र की मोदी सरकार के यूटर्न पर हुर्रियत ने कसा तंज

श्रीनगर। केन्द्रीय मंत्री वी.के. सिंह के इस बयान कि अलगाववादी नेता पाकिस्तान के उच्चायुक्त से बातचीत कर सकते हैं, का हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े ने स्वागत किया जबकि पार्टी के कट्टरपंथी धड़े ने कहा कि केन्द्र जब तक कश्मीरी जनता से किए गए वादे पूरे नहीं करता, शांति स्थापित नहीं होगी। सिंह के बयान का स्वागत करते हुए हुर्रियत के उदारवादी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि केन्द्र को समझ आ गया है कि राजनीति में लक्ष्मण रेखा काम नहीं करती। जबकि पार्टी के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सयैद अली शाह गिलानी का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा कश्मीरी जनता के किए गए वादे पूरे होने तक शांति स्थापित नहीं हो सकती। फारूक ने कहा कि सिंह का बयान कुछ ना होने से कुछ अच्छा है। संभवत: भारत सरकार को एहसास हो गया है कि उन्होंने जो लक्ष्मण रेखा खींची है वह राजनीति या कूटनीति में काम नहीं आने वाली। इसे स्वागत योग्य बदलाव और वास्तविकता को स्वीकार करना करार देते हुए फारूक ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के पास कश्मीर की जनता को साथ लेकर एक-दूसरे से बात करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने सलाह दी कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए केन्द्र को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी कड़वी यादों को भुलाने और नए कदम उठाने वाली नीति पर वापस लौटना होगा। केन्द्रीय मंत्री सिंह ने 28 अप्रैल को संसद में लिखित उत्तर में कहा था कि चूंकि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और ये तथा-कथित कश्मीरी नेता भारतीय नागरिक हैं, इसलिए भारत में किसी भी देश के प्रतिनिधि के साथ उनकी बातचीत में कोई दिक्कत नहीं है। हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक का कहना है कि कश्मीर भारत, पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच है और हुर्रियत ने हमेशा ही कहा है कि वह विवाद का प्राथमिक पक्ष है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह अलगाववादियों को चुप कराने के लिए जोर-जबरदस्ती कर रही है। अलगावादियों के आंदोलन पर डाला जा रहा दबाव तुरंत समाप्त नहीं होने की स्थिति में मीरवाइज ने जनांदोलन की धमकी दी है। इस बीच, केन्द्रीय मंत्री वी. के. सिंह के बयान को खारिज करते हुए हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि यह हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं है कि हमें आमंत्रित किया जाता है या नहीं। हमारी एकमात्र चिंता है कि कश्मीर के लोगों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा किए गए वादे पूरे हों। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्व-निर्णय का अधिकार देने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव लागू किया जाए। तब तक शांति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद नहीं है, यह अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकार्य विवाद है और उसका समाधान संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव लागू करने में है। गिलानी ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा का आयोजन करने के माध्यम से बीजेपी और आरएसएस जम्मू-कश्मीर की जनांकिकी बदलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों को फिर अखिल भारतीय स्तर पर चुना जाएगा। यदि यहां से कोई छात्र चुना जाता है तो उन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा और दूसरे राज्यों से आने वाले डॉक्टर हमपर थोपे जाएंगे। गिलानी ने कहा कि यह मुसलमान संतों की घाटी को हिन्दू राष्ट्र में बदलने की आरएसएस और बीजेपी की योजना है। वे हमपर हिन्दुत्व थोपना चाहते हैं।
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