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मुखिया चुनाव की चर्चा, सेवतापुर में दिख रही कड़ी सियासी प्रतिस्पर्धा

मैरवा। बिहार में मुखिया के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। राज्य के विभिन्न पंचायतों में इस चुनाव को जीतने के लिए जबर्दस्त सियासी प्रतिस्पर्धा दिख रही है। चारों ओर इसी का बोलबाला है। चौक-चौराहों से लेकर गांव-गिरांव तक सिर्फ मुखिया चुनाव की ही बातें। फिलहाल हम चर्चा कर रहे हैं मैरवा प्रखंड के सेवतापुर पंचायत की। राजनीतिक रूप से संवेदनशील और बेहद जागरूक सेवतापुर पंचायत में इस बार चौआई हवा बह रही है। मतलब यह कि कोई नहीं कह सकता कि चुनाव में जीत किसकी होगी। यदि विरोधी पक्षों के दावों पर भरोसा करें तो इस बार बदलाव की लहर है। अलग-अलग पोस्टर, पंपलेट, हैंडबिल व स्टीकर्स के माध्यम से सेवतापुर पंचायत के प्रत्याशी वोटरों को लुभाने में लगे हैं। कहा जा रहा है कि इस बार का चुनाव आसान नहीं होगा। दरअसल, विरोधी पक्षों द्वारा पंचायत क्षेत्र के गांवों की बदहाली और समस्याओं पर आम मतदाताओं का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की जा रही है। विरोधी कह रहे हैं कि जिस तरह से लोगों ने एक व्यक्ति को ही दो-दो बार मौका दिया, उस हिसाब से गांव का विकास नहीं हो पाया। प्रतीत हो रहा है कि विरोधी पक्षों की बातें लोगों को समझ में भी आ रही है। मुखिया बनने के लिए बतौर प्रत्याशी मैदान में उतरी रीना तिवारी (पत्नी मीडियाकर्मी अजय तिवारी) कहती हैं-‘आप खुद आकर देख लीजिए, गांवों में जितना विकास होना चाहिए, उतना नहीं हुआ। क्या 21वीं सदी में देश के एक जागरूक गांव की दशा इसी तरह की होनी चाहिए।’ खैर, सच्चाई जो हो, पर चुनाव में बह रही चौआई ने खासकर सत्तापक्ष को डिस्टर्ब तो करता ही होगा। बहरहाल, देखना यह है कि चुनाव परिणाम किस करवट बैठता है, इसलिए अभी कुछ भी स्पष्ट कहना मुश्किल है। (अगली खबर में पढ़िए मुखिया चुनाव से संबंधी कुछ और रोचक तथ्य)
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