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बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होने से बहुमत के करीब पहुंचे हरीश रावत!

नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आए भूचाल के बीच परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। शनिवार रात सूत्रों के हवाले से खबर आई कि कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। बीजेपी ने बागी नेताओं की सदस्यता खत्म करने के फैसले को असंवैधानिक कदम बताया है। इसके बाद देर रात वरिष्ठ नेता और मंत्री इंदिरा हृदयेश के न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि बागी नेताओं की सदस्यता खत्म नहीं हुई है, यह महज अफवाह है। उन्होंने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों के वकीलों को आगे की सुनवाई के लिए रविवार सुबह 9 बजे का वक्त दिया है। राजनीतिक उथल-पुथल को देखते हुए पूरे उत्तराखंड के सभी जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी 10 कंपनी फोर्स बुलाई गई है। यही नहीं विधानसभा के लिए जारी सभी पास भी निरस्त कर दिए गए हैं। इससे पहले मुख्यरमंत्री हरीश रावत विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के घर भी पहुंचे। उत्तराखंड की राजनीति ने शनिवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर विधायकों को खरीदने की कोशिश का आरोप लगाया। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की सीडी जारी की, जिसमें पैसों के लेनदेन की बातचीत हो रही है। इस आरोप पर सीएम हरीश रावत ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसा उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश के तहत किया जा रहा है और उन्हें ब्लैकमेल करने की भी कोशिश हो रही है। बाग़ी विधायकों की ओर से हरक सिंह रावत ने कहा कि हरीश रावत विधायकों को धमका रहे हैं। बाग़ी विधायकों ने जान को ख़तरा बताते हुए सुरक्षा की मांग भी की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम हरीश रावत पर एक स्टिंग जारी किया गया, जिसमें पैसे के लेनदेन की बातचीत रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री रावत ने आरोप के जवाब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, 'नापाक गठबंधन मेरी सरकार को गिराने की कोशिश कर रहा है। मेरी सरकार लोगों के दबाव में नहीं आती।' उन्होंने स्टिंग की सत्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मोदी और अमित शाह की सरकार ने यह झूठ बनाया है और मैं मीडिया से प्रार्थना करता हूं कि स्टिंग करने वालों का इतिहास को जरूर खंगालें। इससे पहले उत्तराखंड में सत्ताधारी कांग्रेस ने बाबा रामदेव पर भाजपा नेतृत्व के साथ मिलकर राज्य सरकार को गिराने का आरोप लगाया था, जबकि योग गुरू ने इसका खंडन करते हुए कहा कि राजनीतिक घटनाओं के लिए उनके बजाय राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सीएम हरीश रावत को 28 मार्च तक बहुमत साबित करना है, लेकिन उससे पहले 26 मार्च तक बाग़ी विधायकों को स्पीकर के नोटिस का जवाब देना है, जिसमें पूछा गया है कि क्यों ना दल बदल क़ानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाए। दरअसल भाजपा ने दावा किया था कि 70 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को मिलाकर उसे 35 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। साथ ही पार्टी ने कहा था कि रावत सरकार अल्पमत में आ गई है। इसके बाद राज्यपाल ने सीएम रावत से 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के लिए कहा।
राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार 
उत्तराखंड के राजनीतिक संकट ने एक नया मोड़ ले लिया, क्योंकि केंद्र सोमवार को होने जा रहे कांग्रेस के मुख्यमंत्री हरीश रावत के विश्वास मत परीक्षण से पहले राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार कर रहा है। कांग्रेस के उन नौ विधायकों को अयोग्य ठहराने के विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के कथित फैसले से 70 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या 61 रह जाएगी। इन नौ विधायकों ने रावत के खिलाफ बगावत की और भाजपा से हाथ मिला लिया। ऐसे में रावत के पास छह समर्थकों के अलावा 27 कांग्रेस विधायक होंगे और इस तरह सदन में सत्तापक्ष के पास 33 विधायक होंगे। ऐसी स्थिति में रावत विश्वासमत परीक्षण जीत जायेंगे। हालांकि इस स्थिति में एक अज्ञात कारक यह है कि केंद्र की मोदी सरकार विश्वास मत परीक्षण से पहले क्या करती है। केंद्र सरकार को विधायकों के बगावत से उत्पन्न राज्य की नवीनतम स्थिति के बारे में राज्यपाल केके पॉल से रिपोर्ट मिल गयी है। असम की यात्रा संक्षिप्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलायी जो उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने समेत केंद्र के सामने उपलब्ध विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के लिए करीब एक घंटे चली। वैसे इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसके बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेने के लिए कल फिर बैठक करेगा। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में आनन फानन में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में पार्टी महासचिव अंबिका सोनी ने मोदी सरकार एवं भाजपा की जमकर आलोचना की और उन पर राज्य की रावत सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक संकट नहीं होने के बावजूद राष्ट्रपति शासन लगाने के माध्यम से उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को अपदस्थ करने के लिए आतुर है। बागी कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सदन में विश्वास मत परीक्षण के दौरान समर्थन के लिए मुख्यमंत्री द्वारा रिश्वत की पेशकश की गयी और उन्होंने मुख्यमंत्री की संलिप्तता वाला स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो दिखाया। वैसे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे फर्जी करार दिया।
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