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क़ानून हाथ में लेने से दिक़्क़त नहीं: ओपी शर्मा

नई दिल्ली। पटियाला हाऊस अदालत में छात्रों, पत्रकारों और शिक्षकों से हाथापायी की घटना में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में 9 फ़रवरी को हुए कार्यक्रम से शुरु हुए विवाद के बाद सोमवार को जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अदालत में पेश किया जाना था। अदालत के अंदर और बाहर जब मारपीट हुई तो दिल्ली से भाजपा के विधायक ओपी शर्मा पर भी मारपीट के आरोप लगे। उन पर युवा वामपंथी नेता अमीक़ जामेई की पिटाई का आरोप है। जब बीबीसी ने ओपी शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, "अदालत के बाहर कुछ लोग भारत विरोधी नारे लगा रहे थे। मैंने रोका तो उन्होंने मुझ पर हमला किया। मुझे कोई मारेगा तो मैं भी उसे मारूंगा। मेरा हाथ स्वतः उठ गया होगा।" क़ानून हाथ में लेने के सवाल पर ओपी शर्मा ने कहा, "कोई दिक़्क़त नहीं है क़ानून हाथ में लेने में। कोई हमे मारेगा तो हम पुलिस का इंतज़ार थोड़े ही करेंगे।" वामपंथी युवा नेता अमीक़ जामेई का कहना है कि पुलिस उन्हें बचाने नहीं आई। हालांकि अमीक़ जामेई ओपी शर्मा के देश विरोधी नारे लगाने के आरोपों को नकारते हैं। अमीक़ कहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की फुटेज और तस्वीरें मौजूद हैं, उनमें देखा जा सकता है कि कौन किस पर हमला कर रहा है। जामेई कहते हैं, "हम कन्हैया के पक्ष में नारे लगा रहे थे। हमने अगर कोई ग़लत नारा लगाया होता तो वहां दिल्ली पुलिस थी, हमें रोकने के लिए। भारत विरोधी नारों की बात बक़वास है।" अमीक़ कहते हैं, "ओपी शर्मा ने मेरे ऊपर हमला किया। दस-पंद्रह मिनट तक मुझे पीटते रहे। क़रीब पंद्रह मिनट बाद मुझे तुग़लक लेन पुलिस स्टेशन ले गए। जहां मेरा फ़ोन छीन लिया गया। उन्होंने मुझे मुजरिम की तरह वहां बैठाए रखा।" अमीक़ का आरोप है कि पुलिस का मूकदर्शक बनकर खड़े रहना दर्शाता है कि सोमवार के हमलों में पुलिस की भी मिलीभगत थी। जामेई के मुताबिक़ उनकी शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को एफ़आईआर दर्ज कर ली है लेकिन एफ़आईआर में अभी किसी अभियुक्त का नाम नहीं दर्ज किया गया है। अमीक़ कहते हैं, "दिल्ली पुलिस आरएसएस या भाजपा की नौकर नहीं है बल्कि जनता की सेवक है। मेरी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी दिल्ली पुलिस की है। मुझे अब भाजपा के नेताओं से ख़तरा और बढ़ गया है।" वहीं अदालत परिसर में पत्रकारों पर हुए हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों की ओर से दायर याचिका स्वीकार कर ली है जिस पर कल सुनवाई होगी।
मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा 
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की पेशी से पहले पटियाला हाउस अदालत में मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मारपीट में घायल जेएनयू के पूर्व छात्र एनडी जयप्रकाश द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा। इस याचिका में कन्हैया के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित कराए जाने की मांग की गई है। जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोप में हिरासत में लिए गए कन्हैया कुमार को सोमवार को पटियाला हाउस अदालत में पेश किया जाना था। इसे देखते हुए अदालत परिसर में पत्रकारों, वकीलों और जेएनयू के छात्रों का बड़ा समूह मौजूद था। पेशी से पहले ही इन लोगों में आपस में भिड़ंत हो गई और नौबत मारपीट तक पहुंच गई। मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र करते हुए मामले पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। जयसिंह ने कहा कि अदालत परिसर में हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिसने घटना पर कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद याचिका पर बुधवार को सुनवाई की मंजूरी दे दी। जनहित याचिका में कहा गया है कि अदालत परिसर में हिंसा से कन्हैया की जान को खतरा है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उसको फिर अदालत में पेश किया जाएगा। इसलिए अदालत परिसर में सुरक्षा का व्यापक बंदोबस्त किया जाना चाहिए।
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