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पुलिस के हलफनामे से झूठी साबित हुईं ईरानी?

नई दिल्ली। संसद में रोहित वेमूला सहित जेएनयू मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का बहुत तीखे अंदाज में जवाब देने वाली केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के भाषण को काफी सराहा जा रहा है। जिस आक्रामक लहजे और तल्खत जबान के साथ उन्होंने रोहित और जेएनयू मुद्दे पर विपक्ष के सभी प्रहारों को भोथरा किया उससे प्रधानमंत्री मोदी भी संतुष्ट नजर आए। उन्होंने स्मृति की तारीफ करते हुए ट्वीटर पर उनका पूरा भाषण शेयर भी किया। लेकिन लोकसभा में स्मृति ईरानी जिन दावों के आधार पर विपक्ष पर भारी पड़ती नजर आई थी अब उन दावों पर ही सवालिया निशान खड़ा हो गया है। सवाल खड़ा करने वाले हैं रोहित के दोस्त जो उसकी मौत के बाद मौके पर ही मौजूद थे। नए दावों के बाद स्मृति के साथ साथ तेलंगाना पुलिस भी सवालों के घेरे में आ गई है, क्या उसने हाइकोर्ट को गलत जानकारी दी। क्योंकि उसी जानकारी के आधार पर ही स्मृति ने रोहित की मौत को लेकर संसद में नए खुलासे किए थे। लोकसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते समय बुधवार को स्मृति ईरानी ने कुछ नए तथ्यों का खुलासा किया था। स्मृति ने तेलंगाना पुलिस की हाइकोर्ट में दी गई रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि पुलिस को उसकी मौत की जानकारी 17 जनवरी की शाम 7.20 पर मिल गई थी। जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची तो देखा की उसका कमरा खुला हुआ था। रोहित का शव भी फंदे से उतारकर नीचे मेज पर रखा हुआ था। स्मृति ने पुलिस के दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि आक्रोशित छात्रों ने पुलिस को उसके शव के नजदीक ही नहीं जाने दिया। दावा ये भी था कि सुबह 6.30 तक पुलिस और डॉक्टर रोहित के शव की जांच नहीं कर सके। नए दावे के साथ स्मृति ने सवाल खड़ा किया था कि उस भीड़ में ऐसा कौन था जिसने बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण के रोहित को मृत घोषित कर दिया। स्मृति ने कहा जानबूझकर राजनीति करने के लिए एक छात्र को मौत के मुंह में धकेल दिया गया। राजनीतिक दलों ने उसके शव को भी पॉलीटिकल टूल की तरह इस्तेमाल किया। स्मृति ने अपने दावों के साथ बेशक विपक्ष पर बढ़त बनाने का प्रयास किया हो लेकिन रोहित के साथियों ने इस पर सवाल खड़ा कर दिया है। रोहित के साथी रहे एक छात्र जिकुरल्लाह निशा ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट लिखते हुए स्मृति इरानी को झूठा कहा है। निशा ने कहा कि "रोहित के फांसी खाने के तुरंत बाद उसने खुद हेल्थत सेंटर को फोन किया था। पांच मिनट के अंदर ही हेल्थक सेंटर के सीएमओ डा. राजश्री पी मौके पर पहुंचे और रोहित के शव की जांच कर उसे मृत घोषित किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय तेलंगाना पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। आज केन्द्रीय मंत्री ने पूरे देश के सामने झूठ बोला कि सुबह 6.30 बजे तक न पुलिस और न डॉक्टरों को रोहित के शव का निरीक्षण करने दिया गया।" निशा की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। वहीं एक अंग्रेजी वेबसाइट द न्यूज मिनट ने रोहित के शव का चिकित्सकीय परीक्षण करने वाले डॉक्टर राजश्री पी के हवाले से बताया कि किया कि उसकी मौत के तुरंत बाद वह के पर पहुंच गए थे। वेबसाइट के अनुसार रोहित ने 17 जनवरी की शाम 6.30 बजे से 7 बजे के बीच न्यू रिसर्च स्कॉलर हॉस्टल के कमरा नंबर 207 में फांसी खाई थी। इसकी सूचना सबसे पहले सिक्योरिटी ऑफिसर को मिली, जिन्होंने तुरंत हैदराबाद यूनिवर्सिटी के मेडिकल ऑफिसर राजश्री पी को सूचना दी।
कुछ लोग मुझे अनपढ़ मंत्री भी कहते हैः स्मृति
रोहित वेमूला मुद्दे को लेकर राज्यसभा में दूसरे दिन भी जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से दूसरे दिन भी मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को मोर्चे पर लगाया गया। स्मृति ने भी विपक्ष के आरोपों पर एक एक कर उसी तल्खस अंदाज में जवाब दिया। हालांकि इसी दौरान जेएनयू में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने के मुद्दे पर बांटे गए पर्चों का ईरानी ने जिक्र किया तो विपक्ष एकसुर में इसके विरोध में खड़ा हो गया। जिसको लेकर देर तक हंगामा चलता रहा, इसके चलते राज्सभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के ‌स्थेगित कर दी गई। चर्चा के दौरान स्मृति ने विपक्षी सांसदों को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह लगातार रोहित के मुद्दे पर उन्हें निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ लोग तो उन्हें अनपढ़ मंत्री भी कहते हैं। लेकिन मैंने कभी नहीं कहा कि सीताराम येचुरी जी की तरह प्रखर वक्ता हूं। लेकिन क्या इससे मेरी योग्यता कम हो जाती है। मैं सबसे कम उम्र में राज्यसभा सांसद बनी थी तब किसी ने मेरी डिग्रियों की बात नहीं की। रोहित मुद्दे पर बात करते हुए स्मृति ने रोहित की अंतिम फेसबुक पोस्ट को सदन में पढ़कर सुनाया। जिसमें वामपंथी नेता सीताराम येचुरी की आलोचना की थी।
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