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स्टूडेंट कार्नर यानी पूर्वांचल की शान, जिसकी बागडोर संभालते मो.इम्तियाज खान

गोरखपुर। जब से अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने (जनवरी 2006) यह घोषणा की कि अरबी, हिंदी, उर्दू जैसी भाषाओं के लिये अमेरिकी शिक्षा में विशेष बल दिया जायेगा। इन भाषाओं के लिये अलग से धन भी आरक्षित किया गया। यह समाचार सारे संसार में आग की तरह फैल गयी। यहाँ तक कि फरवरी 2007 को भी डिस्कवर लैंग्वेजेस महीना घोषित किया गया। अमरीकी कौंसिल आन द टीचिंग आफ फारन लैंग्वेजेस नामक भाषा शिक्षण से जुड़ी संस्था ने विशेष रूप से राष्ट्रपति बुश के संदेश को प्रसारित करते हुए बताया है कि देश भर में कई तरह से स्कूलों और कालेजों के प्राध्यापक भाषाओं के वैविध्य को मना रहे हैं। सच तो यह है कि दुनिया को चाहे अब जा के पता चला हो कि इन भाषाओं को पढ़ाया जायेगा, इस दिशा में काम तो बहुत पहले से ही हो रहा था। दरअसल, यह चर्चा करने के पीछे गोरखपुर के सिनेमा रोड गोलघर स्थित स्टूडेंट कार्नर के बारे में बताना है, जो आज पूर्वांचल की शान बन चुका है। स्टूडेंट कार्नर का संचालन करने वाले मो.इम्तियाज खान कहते हैं स्टूडेंट कार्नर करीब चालीस वर्षों से पुस्तक प्रेमियों की सेवा कर रहा है। यही वजह है जो पुस्तकें व पठन-पाठन संबंधी सामान कहीं नहीं मिलता है, उसके लिए सीधे ग्राहक स्टूडेंट कार्नर पर आते हैं। स्टूडेंट कार्नर की यही सबसे बड़ी साख है कि दुर्लभ पठन-पाठन की सामग्रियां और स्टेशनरी बिल्कुल वाजिब दाम पर सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं। जानकार बताते हैं कि भारत के साथ अमेरिका के सांस्कृतिक, राजनैतिक और व्यापारिक सम्बन्ध पिछले करीब दस वर्षों में अचानक कई गुना और कई स्तरों पर बढ़ गए हैं सो भारतीय भाषाओं में रुचि भी उसी हिसाब से बढ़ी है। चूँकि हमारे परिवार काफी हद तक संश्लिष्ट बने रहते हैं, इसलिये नानी दादी से बात करनेके लिये नई पीढ़ी के बच्चे भी इन भारतीय भाषाओं के बोलते बोलते ही बड़े होते हैं। पूर्वांचल में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला स्टूडेंट कार्नर की शुरूआत करीब चालीस वर्ष पहले बहुत कम पूंजी से हुई थी। स्टूडेंट कार्नर के इस सफर को सफलता पूर्वक चलाने में , नेहाल हुसैन खान, रियाज खान, मोहम्मद इम्तियाज खान की कार्यशैली हमेशा उल्लेखनीय रहेगी। इसे कभी भी कोई भुला नहीं सकता। चार दशकों ने स्टूडेंट कार्नर ने अपनी इस प्रकार निखारी गोरखपुर पूरे पूर्वांचल में स्टूडेंट कार्नर जैसी कोई दुकान नहीं है। स्टूडेंट कार्नर के सबसे पुराने कर्मचारी विपिन बिहारी लाल कहते हैं कि यहां हिंदी की साहित्यिक पुस्तकें, अंग्रेजी में नावेल (फिक्शन & नॉन फिक्शन), हर प्रकार की चिल्ड्रन स्टोरी बुक, इनसाइक्लोपीडिया (हिंदी-इंग्लिश), मोटीवेशनल बुक (हिंदी-इंग्लिश), हर प्रकार की स्टेशनरी, इण्डिया टुडे डायरी आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का एकमात्र केन्द्र स्टूडेंट कार्नर को ही माना जाता है। यहां काम करने वाले रवि प्रकाश शर्मा, पिंटू कुमार शर्मा, सुलेमान खान व अनवर खान बेहद मृदुभाषी और ग्राहकों की सेवा का सदैव ख्याल रखते हैं। वहीं इसके संचालक मो.इम्तियाज खान के व्यवहार के तो कहने ही क्या है। बिल्कुल सहज, साधारण और हर वक्त चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाले इम्तियाज को हरदिल अजीज माना जाता है।
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