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जल्लीकट्टू की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जयललिता ने पीएम को लिखा पत्र

नई दिल्ली/मुंबई/चेन्नई। तमिलनाडु में पोंगल के अवसर पर सांड पर काबू पाने के दुनिया के सबसे पुराने खेलों में से एक जल्लीकट्टू का आयोजन नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसका आयोजन करने संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर मंगलवार को रोक लगा दी। कोर्ट ने यह आदेश देते हुए कहा कि ऐसे खेल जिसमें पशुओं के साथ क्रूरता होती है आयोजन करने नहीं दिया जा सकता। यह दूसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल को रोका है। सुप्रीम कोर्ट ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार के इस आग्रह को अस्वीकार कर दिया कि जल्लीकट्टू 400 वर्ष पुराना है और यह स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है। इसे नहीं रोका जाना चाहिए क्योंकि सरकार की 7 जनवरी की अधिसूचना में सुरक्षा के पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार की ओर से अटाॠर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि कोर्ट चाहे तो इस बारे में उच्चाधिकार समिति बना सकती है, जो खेल पर नजर रखेगी और क्रूरता नहीं होने देगी। उन्होंने क्रिकेट के मामले में जस्टिस लोढा समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी खेल में कुछ गलत है तो ऐसे खेल पर पाबंदी लगाने की बजाय उस गलती को दुरुस्त करना चाहिए। लेकिन जस्टिस दीपक मिश्रा और एनवी रमणा की पीठ ने कहा कि ऐसे खेल होने ही क्यों चाहिए। 21वीं सदी में क्या हम ऐसे खेलों को खेलते रह सकते हैं। पीठ ने कहा कि अंतरिम उपाय के रूप में, हम निर्देश देते हैं कि 7 जनवरी, 2016 को जारी अधिसूचना पर रोक रहेगी। इसके साथ ही अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने केंद्र, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात को नोटिस जारी किए, जिसका जवाब चार सप्ताह के अंदर देना है। भारतीय पशु कल्याण बोर्ड और पेटा सहित विभिन्न संगठनों की याचिकाए सुबह प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थीं। लेकिन पीठ की एक सदस्य जस्टिस आर भानुमति ने इसकी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद यह मामला तुरंत जस्टिस मिश्रा की पीठ को भेजा गया। जल्लीकट्टू के आयोजन को इजाजत देने वाली केंद्र की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इसपर अध्यादेश लाने की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में कहा, तमिलनाडु के लोगों की ओर से मैं आपसे इसे लेकर तत्काल कार्रवाई करने की अपील करती हूं। उन्होंने अध्यादेश जारी करने का अनुरोध करते हुए कहा, लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए पूरे राज्य में आयोजक पहले ही व्यवस्थाएं कर चुके हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में सांड़ों की लड़ाई और ग्रामीण महाराष्ट्र में बैल गाडि़यों की दौड़ पर लगे प्रतिबंध को हटाने को लेकर केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी है। अदालत ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में इस अधिसूचना पर रोक लगने के बाद किया। न्यायमूर्ति वी एम कनाडे और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की खंडपीठ सामाजिक कार्यकर्ता लोरेंजो स्टेनडेन और गार्गी गोगोई की दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
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