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सीबीआई छापों पर बोले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कहा- राजेंद्र कुमार तो केवल बहाना हैं, निशाना मैं हूं

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई छापों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चरम पर है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई रेड अघोषित इमरजेंसी है, मैं इस रेड से हैरान हूं, राजेंद्र कुमार तो सिर्फ बहाना हैं, हकीकत में निशाना मैं हूं। उन्होंने कहा कि ठेकों की जांच के लिए कार्रवाई नहीं हुई है। ठेकों की फाइलें जिन विभागों की है, वहां छापे नहीं मारे गए। मुझे सरासर सब झूठ नजर आ रहा है। मैं डरने वाला नहीं हूं। केजरीवाल ने अरुण जेटली पर आरोप लगाते हुए कहा कि जेटली डीडीसीए मामले में फंस रहे हैं और सीबीआई उसी से जुड़ी फाइल ढूंढने आई थी। वहीं अरुण जेटली का कहना है कि केजरीवाल की बेबुनियाद बातों पर वो कोई जवाब देना उचित नहीं समझते। अपने कैबिनेट सहयोगियों और 'आप' के वरिष्ठ नेताओं के साथ दो घंटे की बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र उन्हें डरा नहीं पाएगा और वह अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। केजरीवाल ने कहा, 'उन लोगों को राजेंद्र द्वारा दिए गए ठेकों में कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर उन्होंने 2007 में ठेके दिए तो मोदीजी आप 2015 तक क्या कर रहे थे। आपकी सरकार को आए तो अर्सा हो गया।' उन्होंने कहा, 'मोदीजी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि सीबीआई के जरिये आपने औरों को डराया होगा, लेकिन केजरीवाल नहीं डरने वाला। आप जानते हैं कि मैं किस मिट्टी से बना हूं। मैं अपनी अंतिम सांस तक देश के लिए लड़ूंगा और कभी भयभीत नहीं होने वाला। मोदीजी सीबीआई और अन्य तरीके मुझे डरा नहीं पाएंगे। मैं आपसे यह साफ कह देना चाहता हूं।' गौरतलब है कि सीबीआई के छापे को लेकर दिल्ली और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। केजरीवाल और उनकी पार्टी ने आरोप लगाया है कि ये छापे राजेंद्र कुमार के दफ़्तर पर नहीं बल्कि केजरीवाल के दफ़्तर पर मारे गए हैं। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री पर राजनीतिक बदले की मंशा से ये कार्रवाई कराने का आरोप लगाया है। उधर केंद्र सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि किसी भ्रष्ट अधिकारी पर कार्रवाई राजनीतिक बदला कैसे हो सकती है? केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सीबीआई सर्च वारंट लेकर छापे मारने गई थी और इस दौरान मुख्यमंत्री के दफ्तर को छुआ भी नहीं गया। रविशंकर ने केजरीवाल के पीएम को कायराना बताने वाले बयान की आलोचना की और इसके लिए केजरीवाल से माफी मांगने की भी मांग की।
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अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक उद्भव का गहन विश्लेषण
मानव इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाने वाले चार्ल्स डार्विन का मत था कि प्रकृति क्रमिक परिवर्तन द्वारा धीरे-धीरे आस पास के माहौल के हिसाब से अपना विकास करती है। मनुष्य का विकास भी इसी तरह हुआ है। डार्विन का ये सिद्धांत उस वक्त बहुत क्रांतिकारी माना गया था और ये क्रांतिकारी सिद्धांत दिल्ली के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर पूरी तरह से लागू होता है। केजरीवाल का राजनीतिक तौर पर क्रमिक विकास हो रहा है और इस विकास के तहत अब केजरीवाल एक संपूर्ण राजनेता बन चुके हैं। पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाकर उन्होंने अपनी राजनीति चमकाई थी लेकिन अब वो भ्रष्टाचार से भाईचारा दिखा रहे हैं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कारगर कदम उठाने के बजाए राजनीति का गेम खेल रहे हैं। डीएनए में अरविंद केजरीवाल के इस राजनीतिक उद्भव यानी पॉलीटिकल इवोल्यूशन का गहन विश्लेषण। भ्रष्टाचार शब्द को केंद्र में रखकर खेले जा रहे इस राजनीतिक खेल की जड़ हैं। अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार जिन पर मंगलवार को सीबीआई ने छापा मारा। ये छापेमारी भ्रष्टाचार की एक शिकायत के बाद की गई थी लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के इस केस को राजनीतिक रंग दे दिया और खुद को एक राजनीतिक पीड़ित बताने लगे। सीबीआई के छापे के तुरंत बाद केजरीवाल ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और कहा कि सीबीआई ने उनके दफ्तर में छापा मारा है। ये भी कहा कि राजेंद्र के बहाने मेरे दफ़्तर की सारी फ़ाइल देखी जा रही हैं लेकिन ये झूठ था क्योंकि छापेमारी सिर्फ राजेन्द्र कुमार के दफ्तर में ही हो रही थी। यही नहीं केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया। केजरीवाल ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री को 'कायर' और 'मनोरोगी' कहा। आपको बता दें कि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में कायर शब्द की परिभाषा कुछ इस तरह से है। यानी वो व्यक्ति जिसके अंदर खतरनाक या अप्रिय चीज़ों से लड़ने की हिम्मत ना हो वो कायर है। इसी तरह ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में मनोरोगी शब्द का अर्थ है-ऐसा व्यक्ति जो किसी तरह की दिमागी बीमारी से पीड़ित हो। इन शब्दों का अर्थ जानने के बाद आप समझ गए होंगे कि इन शब्दों का इस्तेमाल कितना आपत्तिजनक है। सवाल ये है कि क्या एक मुख्यमंत्री को देश के प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना शोभा देता है? आंकड़ों के लेंस से देखें तो अरविंद केजरीवाल 2015 में 48 लाख लोगों का वोट हासिल करके दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे जबकि नरेंद्र मोदी 2014 में देश के 17 करोड़ से ज़्यादा लोगों के वोट लेकर देश के प्रधानमंत्री बने थे। ज़ाहिर है एक मुख्यमंत्री जो 48 लाख लोगों की पहली पसंद हो उसे 17 करोड़ लोगों की पसंद से प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अरविंद केजरीवाल चाहते तो भाषा का स्तर और गरिमा बनाकर रख सकते थे। हालांकि गौर करने वाली बात ये भी है कि 48 लाख लोगों की पहली पसंद अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को 17 करोड़ लोगों की पहली पसंद नरेंद्र मोदी की सरकार को दो बार सफाई देने पर मजबूर कर दिया। अरुण जेटली ने पहले राज्यसभा में इस मामले पर सफाई दी और फिर शाम को भी अरुण जेटली सफाई देने के लिए मीडिया के कैमरों के सामने आ गए। ख़ैर बात सिर्फ कायर और मनोरोगी जैसे शब्दों पर ही नहीं रुकी। शाम होते-होते अरविंद केजरीवाल की ज़ुबान और तीखी हो गई। इस पूरे मामले पर मीडिया के सामने केजरीवाल ने अपना पक्ष रखा और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमला कर दिया। केजरीवाल ने अरुण जेटली पर डीडीसीए यानी दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया और कहा कि सीबीआई ने अरुण जेटली की फाइल ढूंढने के लिए उनके दफ्तर में छापे मारे। केजरीवाल का मन इससे भी नहीं भरा और अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दी। अरविंद केजरीवाल की भाषा उनके तेवर और उनकी राजनीति की झलक आपने देख ली अब आपको इस पूरे केस के आरोपी राजेन्द्र कुमार पर लगे आरोपों के बारे में बताते हैं ताकि आप समझ सकें कि आखिर हुआ क्या है? 12 जून, 2015 को दिल्ली डायलॉग कमीशन के पूर्व सदस्य आशीष जोशी ने एंटी करप्शन ब्रांच के चीफ मुकेश मीणा को राजेन्द्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की एक लिखित शिकायत दी। जोशी ने आरोप लगाया कि मई 2002 से फरवरी 2005 तक दिल्ली के एजुकेशन डायरेक्टर, और बाद में हेल्थ सेक्रेटरी और वैट कमिशनर के पद पर रहते हुए राजेन्द्र कुमार ने कई कंपनियां बनाईं और विभागों के कई वर्क ऑर्डर बिना टेंडर निकाले इन कंपनियों को दे दिए गए... जिससे दिल्ली सरकार को वित्तीय घाटा हुआ। आरोप है कि राजेन्द्र कुमार ने इन्डेवर्स सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी कुछ लोगों के साथ मिलकर बनाई। 2007 में वो दिल्ली सरकार के IT सेक्रेटरी बने और इस दौरान उन्होंने इस कंपनी को भारत सरकार के पीएसयू..आईसीएसआईएल यानी इंटेलिजेंट कम्यूनिकेशन सिस्टम इंडिया लिमिटेड में सूचीबद्ध कर दिया। आशीष जोशी ने राजेन्द्र कुमार पर प्राइवेट कंपनियां शुरू करके उन्हें 50 करोड़ से ज्यादा के कॉन्ट्रैक्ट्स बिना बोली लगाकर देने का आरोप लगाया है। जोशी की इस शिकायत को एंटी करप्शन ब्यूरो ने सीबीआई की तरफ बढ़ा दिया। और फिर CBI ने इस शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया, अदालत से वॉरंट लिया और राजेन्द्र कुमार और अन्य आरोपियों के 14 ठिकानों पर मंगलवार को छापेमारी की। इससे पहले 8 दिसंबर को ACB यानी एंटी करप्शन ब्यूरो ने राजेन्द्र कुमार से 2002 के CNG फिटनेस घोटाले के सिलसिले में भी पूछताछ की थी। यहां आपके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि 2002 का CNG फिटनेस घोटाला क्या था? ये घोटाला 2002 का है जब दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी। तब सीएनजी किट लगाने के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था और इसमें कई खामियां मिलीं थी। आरोप ये है कि इस मामले में भी बिना टेंडर का ठेका दिया गया था। इसमें खर्च सरकार कर रही थी और आमदनी कंपनी ले रही थी। आरोप ये भी है कि फर्ज़ी फिटनेस टेस्ट करके पैसा लिया जा रहा था। जांच में पाया गया कि इस मामले में दिल्ली सरकार को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने 100 करोड रुपये के इस घोटाले में 2012 में FIR दर्ज की और 2013 में अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। उस वक्त राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे। आरोप है कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रहते हुए राजेन्द्र कुमार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और इसीलिए ACB ने उनसे पूछताछ भी की थी। अब ये समझने की कोशिश करते हैं कि अरविंद केजरीवाल और राजेन्द्र कुमार के बीच इतना भाईचारा क्यों है? और राजेंद्र कुमार के खिलाफ पड़े सीबीआई के छापे को लेकर अरविंज केजरीवाल इतने बेचैन क्यों हो गए? राजेन्द्र कुमार 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फरवरी 2015 में अपना प्रधान सचिव बनाया था। जब 2013 में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की 49 दिन की सरकार बनी थी उस वक्त भी राजेन्द्र कुमार को मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था। राजेन्द्र कुमार भी अरविंद केजरीवाल की ही तरह आईआईटी के छात्र हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई आईआईटी दिल्ली से की है जबकि केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की है। ऐसा माना जाता है कि राजेन्द्र कुमार की छवि अरविंद केजरीवाल की नज़रों में बहुत अच्छी है। यही वजह है कि केजरीवाल कैमरों के सामने और कैमरों के पीछे लगातार राजेंद्र कुमार के ईमानदार होने के सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं। बताया जाता है कि दिल्ली पुलिस और LG ऑफिस से जुड़े मसलों पर भी राजेन्द्र कुमार अरविंद केजरीवाल को सलाह देते हैं। अब हम आपको बताते हैं कि सीबीआई की इस रेड पर राजनीति करने वाले अरविंद केजरीवाल कैसे अपने ही जाल में फंस गए? सीबीआई की रेड का विरोध करने से पहले शायद अरविंद केजरीवाल ये भूल गए थे कि वो खुद भी लगातार सीबीआई को स्वतंत्र करने के पक्षधर रहे हैं। पहले सीबीआई को संयुक्त सचिव या इससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों की जांच के लिए सरकारों से इजाज़त लेनी होती थी इसे 'सिंगल डाइरेक्टिव सिस्टम' कहा जाता था। अन्ना आंदोलन के दिनों में अरविंद केजरीवाल के साथी रहे प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में एक याचिका दायर की थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल डाइरेक्टिव सिस्टम को खत्म कर दिया था और उस फैसले के बाद ये तय हुआ था कि ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों पर छापा मारने के लिए सीबीआई को सरकारों की इजाज़त की ज़रूरत नहीं होगी। उस वक्त केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने इस फैसले का स्वागत किया था। बाकायदा आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करके इस फैसले को सही बताया था। (साभार Zee Media Bureau)
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