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बिहार में बीजेपी को ओवैसी से मिली खुशी, मांझी ने छीना सुकून

पटना/गया। बिहार चुनाव लड़ने का ऐलान कर असद्दुदीन ओवैसी ने बीजेपी खेमे को जो खुशी दी थी, कुछ ही घंटों के भीतर जीतनराम मांझी ने उसे काफी हद छीन लिया है। एनडीए में शामिल सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी शनिवार की शाम को ही ऐलान करने वाली थी, लेकिन जीतनराम मांझी की नाराजगी ने इस कार्यक्रम पर ब्रेक लगा दिया। मांझी का कहना है कि उन्हें एनडीए में बीजेपी की ओर से उतना सम्मान नहीं मिल रहा है, जितना रामविलास पासवान को दिया जा रहा है। उन्हें इस बात का भी गिला है कि उनके वोटबैंक के मुताबिक उन्हें कम सीटें दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने मांझी को 15 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है, जबकि एलजेपी को 41 और आरएलएसपी के खाते में 25 सीटें दी हैं। इसी बात पर मांझी भड़के हुए हैं। रविवार को बीजेपी के तमाम नेताओं से मांझी की मुलाकात जारी है। यहां तक कि बीजेपी अध्यक्ष ने भी मांझी को हर हाल में मनाने के लिए अपना मैसूर दौरा रद्द कर दिया। समझा जा सकता है कि मांझी के तेवरों के किस तरह से बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक प्रेम कुमार मणि ने कहा कि ऐसे गठबंधनों में जहां किसी तरह का वैचारिक तालमेल नहीं होता, इस तरह की समस्याएं अधिक होती हैं। यही नहीं आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस के महागठबंधन में भी ऐसी ही समस्याएं हैं। मणि के मुताबिक दो बेहद विपरीत विचारधारा के दलों का साथ में दूर तक चल पाना बहुत आसान नहीं होता। इस बीच रविवार को शिवसेना ने भी बिहार में बीजेपी से इतर चुनाव लड़ने का ऐलान कर उसकी मुश्किलें बढ़ाने का काम किया है। भले ही शिवसेना का बिहार में कोई जनाधार न हो, लेकिन वह कुछ सीटों पर वोटकटवा जरूर साबित हो सकती है। हालांकि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के सीमांचल से चुनाव लड़ने पर बीजेपी जरूर खुश है। पॉलिटिकल साइंस के अध्यापक अली हुसैन कहते हैं कि इससे बीजेपी इसलिए खुश है, क्योंकि ओवैसी को मिलने वाला हर वोट नीतीश कुमार के महागठबंधन की संभावनाओं को चोट पहुंचाएगा। इसके अलावा ओवैसी के नाम पर होने वाला बड़ा धार्मिक ध्रुवीकरण भी बीजेपी को लाभ पहुंचा सकता है। हुसैन के मुताबिक सीमांचल की 24 सीटों पर जहां बीजेपी का आधार बहुत कम है, वहां ओवैसी की एंट्री से सेकुलर दलों के वोट शेयर में गिरावट से उसे पूरे राज्य में फायदा होगा। बिहार की राजनीतिक हलचल पर निगाह रखने वालों की मानें तो बीजेपी को सबसे बड़ा फायदा यहां होने वाले धार्मिक ध्रुवीकरण से होगा। इस बीच बिहार में बीजेपी चुनाव समिति की बैठक शुरू हो चुकी है।
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