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कुपोषण से जंग को मुस्तैद हुआ सरकारी अमला, वजन दिवस की सफलता को बनाई रणनीति


सहारनपुर। कुपाषित और अतिकुपोषित बच्चों को चिह्न्ति कर उन्हें स्वस्थ बनाने के लिये 07 व 10 सितम्बर को शासन द्वारा मनाए जाने वाले वजन दिवस की सफलता के लिए जोनल व सेक्टर मजिस्ट्रेट्स को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान सभी नोडल अधिकारी मौजूद रहे। पोषण मिशन की बैठक में डीएम पवन कुमार व सीडीओ मोनिका रानी ने सभी कार्यक्रम में जुटने को निर्देश दिए। उक्त अधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लेते हुए वजन दिवस पर सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को समय पर केन्द्रों पर पहुंचने के निर्देश दिये। इस दौरान किसी तरह की लापरवाही कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अभियान को सफल बनाने के लिये सभी अधिकारी व कर्मचारी को प्रातः 8 बजे अपने-अपने बूथों पर उपस्थित रहकर 2 बजे तक कार्य करना होगा। इस अभियान में समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों का वजन लिया जायेगा तथा वजन को देखते हुये उन्हे कुपोषित और अतिकुपोषित श्रेणी में दर्ज कर उपचार शुरू कराया जायेगा। इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने जिला पोषण समिति की बैठक में 6055 कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं। वजन दिवस की सफलता के लिए जिले को पांच जोन व 121 सेक्टर में बांटा गया है। उन्होंने बताया कि 1034 पर्यवेक्षकों के माध्यम से सभी आईसीडीए कर्मचारियों, कार्यकर्त्रियों, एएनएम तथा आशाओं की मदद से वजन दिवस का आयोजन दो चरणो में होगा। पहले चरण 07 सितम्बर को सढ़ौली कदीम, देवबंद, मुजफ्फराबाद, नांगल, पुंवारका, बलियाखेड़ी तथा 10 सितम्बर को शहर सहारनपुर, सरसावा, गंगोह, रामपुर, नकुड़ व नानौता को शामिल किया गया है। बैठक में सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में करीब चौबीस लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। प्रतिमाह जिले स्तर से कुपोषित बच्चों के वजन का ब्योरा शासन को भेजना होता है। मौजूदा समय में शासन के पास प्रतिमाह ढाई लाख बच्चों के वजन का ही ब्योरा भेजा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आंगनबाड़ी केंद्रों से राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत गोद लिए गांवों का ही ब्योरा भेजने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसी के मद्देनजर शासन ने वजन दिवस मनाने का फैसला लिया है। इससे पूर्व जागरूकता रैली, पोस्टर, बैनर के जरिए इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। पोलियो की तरह ही इस दिवस पर भी बूथ स्थापना कराई जाएगी। कोशिश रहेगी की शहरी इलाकों के क्षेत्रों को ज्यादा से ज्यादा कवर किया जा सके। स्वास्थ्य और जिला प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में यह कार्यक्रम संपन्न होगा। कुपोषण का शिकार मिलने पर बच्चों को विभिन्न ग्रेडों में रखा जाता है, इसके बाद पोषाहार देकर उनके वजन में बढ़ोतरी की जाती है। लंबाई के हिसाब से वजन बढ़ता है, तो ग्रेड में सुधार होता जाता है।
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