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बिहार की राजनीति में ओवैसी की एंट्री, चुनाव लड़ने पर नहीं खोले पत्ते

नई दिल्ली। हैदराबाद में दबदबा रखने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम महाराष्ट्र के बाद बिहार विधानसभा में भी किस्मत आजमाने वाली है। एमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार के किशनगंज में बड़ी रैली की। ओवैसी की रैली में हजारों की भीड़ भी जुटी। चुनावी भाषण में ओवैसी ने पीएम मोदी सहित लालू यादव और नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा। हालांकि बिहार में एमआईएम कितनी सीटों पर लड़ेगी इस पर ओवैसी ने पत्ते नहीं खोले हैं। ओवैसी ने आज किशनगंज की रुईधासा मैदान में हज़ारो की भीड़ को संबोधित किया. ओवैसी ने लालू, नितीश और पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा. ओवैसी ने बिना नाम लिए बिहार के नेताओं की तुलना बन्दर से की. ओवैसी ने कहा कि सीमांचल को शेरों की ज़रुरत है, बंदरों की नहीं। इसके साथ ही ओवैसी ने पीएम मोदी के भाषण की मिमिक्री भी की. ओवैसी ने बिहार के चुनावों को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले हैं. एबीपी न्यूज़ से बातचीत में भी ओवैसी ने कहा कि बिहार चुनाव में कितनी सीटों पर एमआईएम लड़ेगी लड़ेगी ये अभी तय नहीं है। ओवैसी ने सीमांचल का मुद्दा उठाया और मांग की कि आर्टिकल 371 के तहत स्पेशल डेवलॅपमेंट कौंसिल का गठन किया जाये. किशनगंज मुस्लिम बहुल ज़िला और ओवैसी की यहां से रैली की शुरुआत लालू, नितीश के लिए मुशक्किल खड़ी कर सकती है। अपने बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले ओवैसी की बिहार में एंट्री लालू-नीतीश की नींद उड़ा सकती है. मुस्लिम वोट बैंक को लालू का आधार वोट माना जाता है. ओवैसी अगर इस मुस्लिम बहुल इलाके में उम्मीदवार उतारते हैं तो फिर लालू नीतीश के वोट बैंक में सेंध लगना तय है। किशनगंज, अररिया, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर, सहरसा के इलाकों में मुस्लिमों की अच्छी आबादी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी बुरी तरह हार गई थी।
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