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फिल्म समीक्षाः बिन रोए

मुम्बई (विशाल)। यह पाकिस्तानी फिल्म पिछले महीने 'बजरंगी भाईजान' के साथ रिलीज होने वाली थी, लेकिन कई कारणों से यह संभव न हो सका। हालांकि ये बात पक्की है कि अगर ये फिल्म उस समय रिलीज होती तो 15-20 करोड़ तो भारतीय बॉक्स ऑफिस से बटोर ही लेती। महज 3-4 करोड़ में बनी इस फिल्म के वारे-न्यारे हो जाते। फिल्म की कहानी है सबा (माहिरा खान) और इर्तिजा (हुमायूं सईद) की। पाकिस्तान के कराची शहर में रहने वाले एक परिवार में सबा सबकी चहेती है। वह इर्तिजा को दिल ही दिल चाहती है। सबा की इकतरफा मोहब्बत से अनजान इर्तिजा किसी काम से अमेरिका जाता है, जहां उसे समन (अमीना खान) से मोहब्बत हो जाती है और फिर शादी। इस वाकिये से सबा टूट जाती है। लेकिन तभी एक हादसे में समन की मौत हो जाती है और तीन साल के बच्चे और इर्तिजा को संभालने की जिम्मेदारी सबा पर आ जाती है। न चाहते हुए भी उसे इर्तिजा से शादी करनी पड़ती है। कुछ समय बाद जिंदगी एक नया मोड़ लेती है और सबा-इर्तिजा अमेरिका चले जाते हैं। फिर कहानी में तेज मोड़ आते हैं। यह गंभीर किस्म की प्रेम कथा है, लेकिन निर्देशक ने इसे गंभीर नहीं होने दिया है। अभिनय के लिहाज से माहिरा छाई रही हैं। हुमायूं सईद इंटरवल के बाद निखर कर आते हैं। जेबा बख्तियार को लंबे समय बाद स्क्रीन पर देखना सुखद अनुभव लगता है। वो आज भी वैसी ही दिखती है, जैसा उन्हें 'हिना' में देखा गया था। फिल्म में बस एक ही कमी दिखती है और वो है इसका अंत, जिसे लगता है कि सस्ते में निबटा दिया गया है। कलाकार हैं, माहिरा खान, हुमायूं सईद, अमीना खान, जेबा बख्तियार, जावेद शेख। निर्देशन किया है मोमिना दुरैद ने और निर्माता हैं अहमद अफजल।
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Item Reviewed: फिल्म समीक्षाः बिन रोए Rating: 5 Reviewed By: न्यूज़ फ़ॉर ऑल