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स्मृति ईरानी शैक्षिक योग्यता मामले को कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना, कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा

नई दिल्ली। स्मृति ईरानी के खिलाफ शैक्षिक योग्यता के मामले को पटियाला हाउस कोर्ट ने जैसे ही सुनवाई के लायक माना, कांग्रेस ने फौरन मानव संसाधन विकासमंत्री पद से उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता शकील अहमद का कहना है कि अगर ईरानी खुद इस्तीफा नहीं देती हैं तो ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ज़िम्मेदारी है कि वे उन्हें तुरंत पद से हटाएं। ईरानी पर चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामों में दो अलग-अलग शैक्षिक योग्यता देने का मामला है। आरोप है कि ये फर्जी हैं। कांग्रेस पहले भी इस मामले को उठाती रही है, लेकिन कोर्ट में सुनवाई मंज़ूर हो जाने के बाद कांग्रेस को और ताक़त मिल गई है। कांग्रेस का कहना है कि जिस तरह केजरीवाल सरकार में क़ानून मंत्री रहे जितेन्द्र तोमर पर फ़र्ज़ी डिग्री के मामले में क़ानूनी कार्रवाई चल रही है वैसे ही ईरानी के ख़िलाफ़ भी चलनी चाहिए। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई ये शुरू हो रहा है। स्मृति डिग्री मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 28 अगस्त को तय की है। ज़ाहिर है कांग्रेस संसद में ही इस मामले पर हंगामा करेगी। सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी आज जिस मुकाम पर हैं वहां पहुंचने के लिए उन्हें कई मुश्किलों से गुजरना पड़ा। स्मृति ईरानी का जन्म 23 मार्च 1976 को दिल्ली में हुआ था और उन्होंने दिल्ली में ही पढ़ाई की, स्कूल में स्मृति काफी होनहार छात्र मानी जाती थी। वो अपने स्कूल के स्पोटर्स टीम की कैप्टन हुआ करती थीं। 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद ही स्मृति ने काम करना शुरू कर दिया था, खुद स्मृति बताती हैं कि अपने पिता की मदद करने के लिए कम उम्र में ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था, पहले वो सौंदर्य प्रसाधनों को बेचा करती थीं। रूढ़िवादी पंजाबी-बंगाली परिवार की तीन बेटियों में से एक स्मृति ने बंदिशें तोड़कर 1998 में ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा, उन्होंने 1998 में मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन फाइनल तक नहीं पहुंच पाईं। इसके बाद स्मृति ने मुंबई जाकर एक्टिंग में करियर बनाने की कोशिश की। मुंबई जाने के बाद स्मृति को काम तो नहीं मिला, लिहाजा अपना खर्च चलाने के लिए उन्हें एक रेस्टोरेंट में सफाई तक करनी पड़ी। उन्हीं दिनों स्मृति को मीका के एलबम में काम करने का मौका मिला। स्मृति की किस्मत के दरवाजे तब खुले जब एकता कपूर ने उन्हें अपने सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में तुलसी के किरदार के लिए ऑफर दिया। तुलसी बनकर स्मृति हर घर में छा गईं, एक आदर्श बहू के रूप में उनको इतना पसंद किया जाने लगा कि लोग इस सीरियल के दीवाने हो गए। इस सीरियल ने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, तुलसी के किरदार और इस सीरियल की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये सीरियल आठ सालों तक छोटे पर्दे पर छाया रहा। इस सीरियल में आठ सालों के दौरान जहां तुलसी वीरानी की जिंदगी बदल रही थी , वहीं असल जिंदगी में भी स्मृति की जिंदगी में कई बदलाव आ रहे थे, इसी दौरान उनकी शादी जुबिन ईरानी के साथ हुई और स्मृति मलहोत्रा स्मृति ईरानी बन गईं। स्मृति ने 2003 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की और दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, वो कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से हार गईं। 2004 में उन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया, उन्हें पार्टी ने पांच बार केंद्रीय समीति के कार्यकारी सदस्य के रुप में मनोनीत किया और राष्ट्रीय सचिव के रूप में भी नियुक्त किया। 2010 में उन्हें बीजेपी महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई, 2011 में वो गुजरात से राज्यसभा की सांसद चुनी गई, इसी साल इनको हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चे की भी कमान सौंप दी गई। 2014 में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास के खिलाफ अमेठी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें कड़ी चुनौती दी, हालांकि स्मृति ये चुनाव हार गईं। 2014 लोकसभा का ये चुनाव तो स्मृति हार गईं, लेकिन उन्हें बीजेपी की सरकार में सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर मानव संसाधन जैसा अहम मंत्रालय सौंप दिया गया। ईरानी ने 26 मई को मंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन इससे पहले कि वो अपने मंत्रालय में कामकाज संभालतीं कांग्रेस पार्टी ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।
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