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बिहार की ‘सियासी कोख’ से निकलेगा इस बार ‘कल्याणकारी सुपुत्र’

ग्राम खिरियाटोला में पहुंचे एमएलसी टुन्नाजी पाण्डेय ने की ‘एनएफए’ से विशेष बातचीत, मौजूदा एमएलसी चुनाव व भावी विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर हुई अनेक सारगर्भित बातें 

मैरवा (सीवान, बिहार, भारत)। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने बीते दिनों जब राजधानी दिल्ली में यह जानकारी दी कि बिहार जैसे संवेदनशील राज्य में विधानसभा चुनाव सितम्बर-अक्टूबर में होंगे तो वे यह कहना भी नहीं भूले- ‘बिहार विधानसभा चुनाव सभी चुनावों की जननी है।’ मुख्य चुनाव आयुक्त के उक्त वक्तव्य, मौजूदा एमएलसी चुनाव, भावी विधानसभा चुनाव और बिहार में लगातार बनते-बिगड़ते समीकरणों पर अपनी पैनी नजर रखने वाले एमएलसी टुन्नाजी पाण्डेय जैसा युवा, ऊर्जावान, अपनी बौद्धिक कौशल के बल पर पार्टी और जनता के बीच बेहतर तालमेल रखने वाले लोकप्रिय जननेता ने खुलकर बातचीत की। क्योंकि टुन्नाजी पाण्डेय जैसा नेता जहां बैठा हो और वहां राजनीति और कुटनीति के बीच के फासले न मापे जाएं, यह मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। सितम्बर-अक्टूबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने बेलाग-लपेट अनायास ही कह दिया-‘इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव बेहद रोचक और इतिहास रचने वाला होगा। बिहार का ‘सियासी कोख’ इस बार ‘कल्याणकारी सुपुत्र’ को जन्म देगा, जो पिछले करीब छह दशकों से लगते रहे अपने दामन पर बदनुमा दाग से कराह रहे बिहार राज्य में खुशहाली का संचार करेगा। हर चेहरे पर मुस्कान होगी। अस्ताचलगामी शिक्षा उदीयमान होगा। काम और रोजगार बढ़ेंगे।’ अत्यंत सारगर्भित अंदाज में सियासत की मधुर तान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी और बिहार के सभी राज्यस्तरीय नेताओं का गुणगान करने वाले एमएलसी टुन्नाजी पाण्डेय ने निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए विश्व स्तर पर मशहूर और चर्चित समाचार पोर्टल www.newsforall.in (एनएफए) से सियासत की हर छोटी-बड़ी बिन्दुओं पर लम्बी बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के कुछ संपादित अंशः

एनएफएः अभी एमएलसी चुनाव की तैयारी चल रही है। स्वाभाविक है, आपका जनसंपर्क अभियान जोरों पर चल रहा होगा। जनसंपर्क के दौरान वाले रूझान को आप किस रूप में देख रहे हैं?
टुन्नाजी पाण्डेयः देखिए, मैं सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति हूं। मेरे इर्द-गिर्द नकारात्मक ऊर्जा आती तक नहीं। जहां तक एमएलसी चुनाव में रूझान के आकलन का सवाल है तो यह काम मीडिया और राजनीतिक समीक्षको का है। इस पर मैं कुछ भी नहीं कह सकता।

एनएफएः हां, वो तो ठीक है, पर मेरा मतलब है कि आप इस चुनाव में खुद को किस स्थिति में पा रहे हैं?
टुन्नाजी पाण्डेयः इस सवाल का जवाब तो मैंने पिछले प्रश्न में ही दे दिया था। जब मेरी सोच हर वक्त सकारात्मक रहती है तो इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि एमएलसी चुनाव परिणाम के बारे में मैं क्या सोच रहा होऊंगा?

एनएफएः यानी आप यह चुनाव फिर से जीत रहे हैं?  
टुन्नाजी पाण्डेयः दरअसल, मुझे अपने कर्म पर विश्वास है। यद्यपि यह चुनाव आम मतदाताओं वाला नहीं है, बावजूद इसके चौबीसों घंटे जनहित के कार्यों में लगे रहना और सबके सुख-दुख में शामिल होना और आवश्यकता के मुताबिक जरूरतमंदों को यथासंभव-यथाशक्ति मदद करना आदि का असर तो दिखना ही चाहिए। दूसरे शब्दों में आप कह सकते हैं कि परिणाम बेहतर होंगे। यदि मेरी बातों पर भरोसा नहीं है तो आप मेरे साथ चलिए और खुद देख लीजिए कि डेलीगेट्स (स्थानीय निकाय जनप्रतिनिधि) के मन में क्या है और वह किसे पसंद कर रहा है?

एनएफएः चलिए, मैंने मान लिया कि एमएलसी चुनाव का परिणाम आपके पक्ष में जा रहा है। अब थोड़ा बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा करते हैं। राज्य में आए दिन बन-बिगड़ रही राजनीतिक रणनीति और हो रहे कुटनीतिक कारनामों के बीच यह चुनाव भाजपा के लिए कितना आसान है?   
टुन्नाजी पाण्डेयः पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में आपने जनता का मूड देख लिया था। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के पक्ष में जो राष्ट्रव्यापी लहर पैदा हुई थी, वह अब पहले से अधिक है। क्योंकि एक वर्ष के अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री जी ने देशहित में जो कार्य किए हैं, उसका असर भी बिहार विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। फिलहाल, बिहार में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए कह सकते हैं कि बिहार की जनता बीजेपी को ‘वाक-ओवर’ देने जा रही है।

एनएफएः अरे, इतना आत्मविश्वास? आपके इस बयान को एक मतदाता की सोच मानें, भाजपा नेता का आकलन कहें या किसी राजनीतिक समीक्षक का विश्लेषण समझें? बिहार में रोज नए-नए समीकरण बन रहे हैं और आप भाजपा की जीत का दावा कर रहे हैं? 
टुन्नाजी पाण्डेयः यह आपकी मरजी है। मेरे इस वक्तव्य की समीक्षा आप जिस दृष्टिकोण से चाहें तो कर सकते हैं, पर रिजल्ट वही होगा, जो मैंने कहा है। वैसे, अब किसी को भी बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। विधानसभा चुनाव होने में बहुत वक्त नहीं है। चार-छह माह में सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। मेरी बातें कितनी सही निकलेगी, आप भी देख लीजिएगा?

एनएफएः अच्छा एमएलसी साहब, बिना किसी संकोच और बेलागलपेट बिल्कुल एक लाइन में यह बताइए कि पिछले चुनाव में जदयू के नीतीश कुमार और भाजपा के बीच तालमेल था। उसका परिणाम भी बेहतर आया। अब हालात बिल्कुल उलट हैं। इस बार नीतीश कुमार के जदयू की यारी कांग्रेस और राजद से है। इस सियासी बदलाव का विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा? 
टुन्नाजी पाण्डेयः चूंकि आपने प्रश्न के दौरान ही यह कहते हुए शब्दों के बंधन में बांध दिया है कि एक लाइन में ही उत्तर देना है। सबसे पहले तो मैं इस प्रश्न पर ही सवाल खड़ा कर रहा हूं कि आपने सब्जेक्टिव सवाल पूछा और उत्तर ऑब्जेक्टिव में मांग रहे हैं? यह कैसे संभव है कि इतने गंभीर् इश्यू पर अपनी आइडियोलॉजी को एक लाइन में बता दूं? फिर भी जब आपने कहा है तो एक लाइन में ही बता देता हूं कि बिहार में जदयू-राजद-कांग्रेस का जो बेमेल गठबंधन हुआ है, उसका इस विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बिहार की जनता बेहद जागरूक, संवेदनशील, मेहनतकश और प्रतिभाशाली है। जनता ने सबको देख लिया है। इस बार वह कोई पुराने प्रयोग को दोहराना नहीं चाहती। क्योंकि बिहार 60 वर्ष पहले जहां खड़ा था, आज भी वहीं हैं।

एनएफएः मतलब ये कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भाजपा उभरेगी और उसकी सरकार बनेगी? 
टुन्नाजी पाण्डेयः निसंदेह। इसमें किसी तरह का ‘इफ-बट’ नहीं है।

एनएफएः यानी मैं आपको अग्रिम बधाई दे सकता हूं?
टुन्नाजी पाण्डेयः नहीं, अभी नहीं। रिजल्ट आने के बाद बधाई लेने के लिए मैं खुद मीडिया और मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दूंगा। शायद आपको याद होगा, एक ब्रिटिश राइटर ने इंडियन डेमोक्रेसी और इसमें होने वाले चुनावों के बारे में स्पष्ट लिखा है कि भारत की लोकतांत्रिक राजनीति पूरी तरह संभावनाओं की नींव पर टिकी हुई है। आकलन तो मौजूदा हालातों, अपने क्रिया-कलापों, चाल-चलन-चेहरा और पार्टियों के भीतर की जनसेवा के भाव को देखकर लगाया जाता है। इन सबमें भाजपा अन्य पार्टियों से बहुत आगे चल रही है। यूं कहें कि बिहार की सारी पार्टियां मिलकर भी चाहे तो भाजपा के करीब तक नहीं पहुंच सकती।

एनएफएः अच्छा ये बताइए कि यदि बिहार में भाजपा को बहुमत मिल जाता है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा?  
टुन्नाजी पाण्डेयः मेरे जैसे पार्टी के एक छोटे-से सिपाही से इस तरह का सवाल करना शोभा नहीं देता। कौन मुख्यमंत्री बनेगा व कौन किस क्षेत्र का प्रत्याशी बनेगा, इस तरह के सवाल मेरे स्तर से बहुत ऊपर का है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता और ना ही मैं जानना चाहता हूं। मैं पार्टी का एक छोटा-सा सिपाही हूं, मुझे प्रखंड स्तर से लेकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक के पार्टी नेताओं का आज्ञाकारी बने रहने में ही सुखद अनुभूति होती है। मैं तो पार्टी के नीचे से लेकर ऊपर तक सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं कि पिछली बार मुझे एमएलसी बनने का मौका दिया। इस बार भी वही होने की उम्मीद है।

एनएफएः आखिरी सवाल, एकबार फिर दोहरा रहा हूं, जो पहले पूछा था। ये बताइए कि बिहार में भाजपा के लिए जदयू-राजद-कांग्रेस का ये गठबंधन कितनी मुश्किल पैदा कर सकता है? 
टुन्नाजी पाण्डेयः मेरे ख्याल से इस प्रकार का कोई असर नहीं होगा, जो भाजपा के परिणाम को प्रभावित कर सके। आपको बता दूं कि बिहार में भाजपा के पक्ष में पांच अहम फ़ैक्टर हैं। पहला सबसे बड़ा फैक्टर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की लोकप्रियता। दूसरा फ़ैक्टर है, केंद्र में भाजपा की लोकप्रिय व जनहित का सरकार का होना। बिहार के वोटर यह जानते हैं कि यदि केन्द्र में भाजपा की सरकार है तो बिहार का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब यहां भी भाजपा की ही सरकार हो। तीसरा फ़ैक्टर है, भाजपा का सांगठनिक ढांचा, जो बाक़ी सभी पार्टियों से मजबूत स्थिति में है। चौथा फ़ैक्टर है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो करीब पूरे बिहार में काफ़ी मजबूत है। पांचवां फ़ैक्टर है, भाजपा के साथ रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा व नंदकिशोर यादव जैसे लोकप्रिय पिछड़े और दलित नेताओं का होना। पिछड़े व दलित मतदाताओं को भाजपा की झोली में डलवाने के लिए ये लोग प्रयाप्त हैं, मैं यह महसूस करता हूं।

एनएफएः शुक्रिया पाण्डेय जी। आपने एनएफए को इतना वक्त दिया, इसके लिए धन्यवाद।
टुन्नाजी पाण्डेयः धन्यवाद और हार्दिक आभार। -राजीव रंजन तिवारी (पत्रकार, स्तंभकार, राजनीतिक सलाहकार एवं विश्लेषक)
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एमएलसी ने दी प्रसिद्ध श्रमिक नेता स्व.रामायण तिवारी को श्रद्धांजलि 
सीवान के एमएलसी टुन्नाजी पाण्डेय 9 जून की दोपहर अचानक खिरियाटोला (उग्रसेनछापर) स्थित राज्य के चर्चित श्रमिक नेता स्व.रामायण तिवारी के निवास पहुंचे। एक अनौपचारिक किन्तु शिष्टाचार भेंट के लिए श्री पाण्डेय के यहां पहुंचने पर खुशी और उत्साह से अभिभूत स्व.रामायण तिवारी के पुत्र राजीव रंजन तिवारी, पप्पू तिवारी, पुत्रवधु मीना तिवारी, पौत्री प्रीतिश रत्नम, पौत्र आनन्द वैभव तथा पारिवारिक मित्र उपेन्द्र पाण्डेय व रितेश गोंड ने उनका जोरदार अभिनन्दन किया। इस दौरान उन्होंने स्व.रामायण तिवारी के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा देश के बदलते सियासी परिदृश्य के मद्देनजर स्व.रामायण तिवारी जैसे बेबाक, स्पष्टवादी और मानवीय स्वभाव वाले अनूठे व्यक्तित्व की जरूरत पर बल दिया। 

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