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राजीव गांधी की हत्या से स्तब्ध रह गई थी पुरी दुनिया

दिल्ली। 21 मई, 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की श्रीपेरम्बदूर में मानव बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। इसी कड़ी में हम आपको बता रहे हैं राजीव गांधी की हत्या के बारे में। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर,1984 को हुई हत्या के बाद उसी वर्ष हुए आम चुनाव में कांग्रेस को देश के इतिहास में सबसे बड़ी जीत मिली व राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। लेकिन 1989 में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद राजीव गांधी को नए सिरे से कांग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए आत्ममंथन गुजरना पड़ा। अपनी ही पार्टी में आलोचना झेल रहे राजीव ने जनता से जुड़ने की नई रणनीति बनाई। वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहते थे। 1991 के आमचुनाव में वह जनता तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच बनाने की रणनीति पर चल रहे थे। इस दौरान अपनी सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी ही उनके लिए काल बन गई। तमाम चेतावनियों के बाद भी उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता नहीं किया। श्रीलंका से शांति सेना भेजने से पहले दिल्ली में लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन की राजीव गांधी से मुलाकात हुई थी। लगता है कि दोनों लोगों के बीच हुई बातचीत के दौरान ही प्रभाकरन ने राजीव गांधी की हत्या की पटकथा लिख दी थी। वह सिर्फ मौके का इंतजार करने लगा। सूत्रों का कहना है कि जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलने के लिए प्रभाकरन दिल्ली आया था तब राजीव उससे सख्ती से पेश आए थे। वह तमिल हितों के सवाल पर राजीव गांधी की बात मानने को तैयार नहीं था। शायद इसीलिए राजीव ने अपनी शर्तें मानने तक पांच सितारा होटल में नजरबंद करा दिया था। राजीव गांधी ने उसे तभी श्रीलंका जाने की इजाजत दी जब उसने शर्तें मानने का आश्वासन दिया। कहा जाता है कि शर्तें मानने के लिए प्रभाकरन का हामी भरना अपने को मुक्त करा श्रीलंका पहुंचने की एक चाल भर थी। इस घटना के बाद वह राजीव गांधी का पक्का दुश्मन बन गया था। नवंबर 1990 में श्रीलंका के जाफना के घने जंगल में लिट्टे के एक अति गोपनीय ठिकाने पर प्रभाकरन, बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरूगन और शिवरासन के बीच मंत्रणा हो रही थी। मुद्दा था राजीव गांधी को किस तरह मारना है। कई तरह के प्लान पर चर्चा हुई। फिर एक प्लान पर प्रभाकरन ने अपनी मोहर लगा दी। इसी के साथ कौन क्या करेगा इस पर चर्चा हुई। इसके बाद बेबी और मुथुराजा 1991 की शुरुआत में चेन्नई आ गए। बेबी और मुथुराजा चेन्नई में शुभा न्यूज फोटो एजेंसी के मालिक शुभा सुब्रह्मण्यम से मिले। उसके पास प्रभाकरन का संदेश पहले ही आ चुका था कि इनकी मदद करनी है। योजना के मुताबिक बेबी ने न्यूज एजेंसी में काम करने वाले भाग्यनाथन को अपने जाल में फंसाया। राजीव हत्याकांड में सजा भुगत रही नलिनी इसी भाग्यनाथन की बहन है। वह 1991 में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करती थी रविशंकरन और हरिबाबू दोनों शुभा न्यूज फोटोकॉपी एजेंसी में फोटोग्राफर का काम करते थे। हरिबाबू को नौकरी से निकाल दिया गया। मुथुराजा ने हरिबाबू को विज्ञानेश्वर एजेंसी में नौकरी दिलाई। हरिबाबू को काफी पैसा मिलने लगा और उसका झुकाव मुथुराजा से हो गया। उसने राजीव गांधी के खिलाफ खूब भड़काया कि अगर वो 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत कर सत्ता में आए तो तमिलों की और दुर्गति होगी। श्रीलंका में बैठे मुरूगन ने इस बीच जय कुमारन और रॉबर्ट पायस को चेन्नई भे% शिवरासन के पोरूर पहुंचते ही जाफना के जंगलों की साजिश का जाल पूरा हो गया। शिवरासन ने कमान अपने हाथ में ले ली। बेबी औऱ मुथुराज श्रीलंका वापस चले गए। चेन्नई में नलिनी, मुरूगन और भाग्यनाथन के साथ शिवरासन ने मानवबम खोजा पर वो नहीं मिला। शिवरासन ने अरीवेयू पेरुली बालन के बम की डिजाइन को चेक किया। मानवबम के इतंजाम में शिवरासन फिर समुद्र के रास्ते जाफना वापस गया और वहां प्रभाकरण से मिला। प्रभाकरन से उसने कहा कि भारत में मानवबम नहीं मिल रहा है। प्रभाकरन ने शिवरासन की चचेरी बहनों धनू और शुभा को उसके साथ भारत के लिए रवाना कर दिया। धनू और शुभा को लेकर शिवरासन अप्रैल में चेन्नई आ गया। शिवरासन ने पायस- जयकुमारन बम डिजाइनर अरिवू को इनसे अलग रखा और खुद पोरूर के ठिकाने में रहा। चेन्नई के तीन ठिकानों में राजीव गांधी हत्याकांड की साजिश चल रही थी। शिवरासन ने टारगेट का खुलासा किए बिना बम एक्सपर्ट अऱिवू से एक ऐसा बम बनाने को कहा जो महिला की कमर में बांधा जा सके। शिवरासन के कहने पर अरिवू ने एक ऐसी बेल्ट डिजाइन की जिसमें छह आरडीएक्स भरे ग्रेनेड जमाए जा सके. हर ग्रेनेड में अस्सी ग्राम सीफोर आडीएक्स भरा गया। सारे ग्रेनेड को सिल्वर तार की मदद से जोड़ा गया। बम को चार्ज देने के लिए 9 एमएम की बैटरी लगाई गई. ग्रेनेड में जमा किए गए स्प्रिंटर कम से कम विस्फोटक में 5000 मीटर प्रतिसेकेंड की रफ्तार से बाहर निकलते यानी हर स्प्रिंटर एक गोली बन गया था। बम इस तरह से डिजाइन किया गया था कि आरडीएक्स चाहे जितना कम हो अगर धमाका हो तो टारगेट बच न सके और वही हुआ भी। 12 मई 1991 को शिवरासन और धनू ने पूर्व पीएम वीपी सिंह और डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की रैली में फाइनल रेकी की। तिरुवल्लूर के अरकोनम में हुई इस रैली में धनू वीपी सिंह के पास तक पहुंची उसने उनके पैर भी छुए। इससे शिवरासन के हौसले बुलंद हो गए और उसे अपना प्लान कामयाब होता दिखने लगा। राजीव गांधी की चुनावी सभा 21 मई को श्रीपेरबम्दूर में होनी थी। 20 की रात शिवरासन नलिनि के घर रैली के विज्ञापन वाला अखबार लेकर पहुंचा और तय हो गया कि अब 21 को अपना काम करना है। शुभा ने धानू को बेल्ट पहना कर प्रैक्टिस करवाई। 20 मई की रात को सभी ने साथ मिलकर फिल्म देखी और सो गए। श्रीपेरबम्दूर की रैली में राजीव गांधी के आने में देरी हो रही थी। राजीव गांधी आए एक महिला सब इंस्पेक्टर ने उसे दूर रहने को कहा। राजीव गांधी ने उसे अपने पास बुला लिया। राजीव के पास पहुंचते ही नलिनी ने माला पहनाई, पैर छूने के लिए झुकी और विस्फोट कर दिया। (साभार)
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