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भारत की आपत्ति के बाद लखवी फिर हिरासत में

इस्लामाबाद। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता जकी उर रहमान लखवी की हिरासत स्थगित कर दी थी, लेकिन भारत की आपत्ति के बाद पाकिस्तान सरकार ने फिर उसे हिरासत में ले लिया है। लखवी को छह साल पुराने किडनैपिंग के मामले में हिरासत में लेने का फैसला किया गया है। 18 दिसंबर को पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने लखवी की जमानत मंजूर की थी। बाद में भारत के तीखे विरोध के दबाव में उसे फिर शांति भंग होने की आशंका (एमओपी) के तहत हिरासत में ले लिया गया था। इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जज नूरुल हक कुरैशी की अदालत ने सोमवार को लखवी के शांति भंग की आशंका के तहत हिरासत में लेने के फैसले को स्थगित कर दिया। उसके बाद से यह संभावना जताई जाने लगी थी कि उसकी रिहाई हो जाएगी। इस पर भारतीय विदेश मंत्रलय ने पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया। विदेश सचिव सुजाता सिंह ने लखवी के खिलाफ कार्रवाई में अभियोजन पक्ष के पर्याप्त कदम ना उठाने पर सख्त ऐतराज जताया। विदेश मंत्रलय ने बयान जारी किया कि मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा तक पहुंचाने का वादा पाक को निभाना चाहिए। लखवी को लेकर पाकिस्तान सरकार के रुख पर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। आतंकवाद को सिरे से खत्म करने के हालिया पाकिस्तानी राग के बावजूद सोमवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई में सरकारी वकील पेश ही नहीं हुआ। इससे पहले भी कमजोर अभियोजन के चलते ही आतंकवाद निरोधी अदालत ने लखवी की जमानत मंजूर की थी। अदालत ने अपने लिखित आदेश में कहा है कि कमजोर सबूत, संदिग्ध के खिलाफ अप्रासंगिक मामले में प्राथमिकी दर्ज कराना, कभी न समाप्त होने वाली सुनवाई और कही-सुनी बातें आरोपी के पक्ष में चले गए। पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि वह लखवी की जमानत के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेगी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। इस मामले में चीफ प्रॉसिक्यूटर चौधरी अजहर ने बताया कि उन्हें आतंकवाद विरोधी अदालत के आदेश की प्रति हासिल कर पाने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद भी हमें याचिका तैयार करने के लिए समय की जरूरत होगी। लखवी और छह अन्य आरोपियों- अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनिस अंजुम- को 26 नवंबर, 2008 को हुए मुंबई हमलों की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के लिए आोरीप बनाया गया है। इन हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे। वर्ष 2009 से इस मामले में मुकदमा चल रहा है। लखवी हमलों को अंजाम देने वाले 10 आतंकियों को ट्रेनिंग और दिशानिर्देश देने के आरोपों का सामना कर रहा।
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