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श्रेष्ठ या सिद्ध पुरुष को भगवान के समकक्ष मान्यता देना धर्म के विरुद्धः संजीव

मुजफ्फरनगर (विनय)। जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा साईं बाबा को लेकर चल रही देशभर में चर्चा पर टिप्पणी करते हुए महामृत्युन्जय सेवा मिशन संयोजक पं.संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि यद्यपि साईं बाबा श्रेष्ठ एवं सिद्ध पुरूष हो सकते हैं, परन्तु किसी भी श्रेष्ठ एवं सिद्ध पुरूष को भगवान के समकक्ष मान्यता देना सर्वथा सनातन धर्म के विरूद्ध कृत्य है। शंकराचार्य जी द्वारा दिया गया वक्तव्य किसी भी प्रकार गलत नही है। गांधी कालोनी स्थित मिशन कार्यालय पर आयोजित बैठक में संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि ऐसे अनेक उदाहरण है कि जिन्होंने स्वयं जप, तप, भक्ति से भगवान का साक्षात्कार किया, परन्तु न तो उन्होंने स्वयं को और न ही धर्म ने उनको भगवान के समान माना। संजीव शर्मा ने कहा कि हमारा विरोध सांई बाबा से नहीं है बल्कि उस अन्धभक्ति से है जो साई बाबा को भगवान कह रहे है। कथा व्यास सीताराम त्रिपाठी ने कहा कि विषय चिन्तन एवं चिन्ता दोनों का है। हिन्दू समाज के साथ ही ऐसा हो रहा है। यदि साई बाबा अनुयायी अपना सम्प्रदाय चलाना चाहते हैं तो हमें कोई ऐतराज नहीं परन्तु फिर वे सनातन धर्म में घालमेल न करें। साई मन्दिर बनाये परन्तु वहां भगवान गणेश आदि की मूर्तियों को छोटा या प्रभावहीन दृष्टि से न रखें और गायत्री व अन्य मंत्रों के साथ साईं का नाम न जोडें। बैठक में उपस्थित सभी ने एक मत से कहा कि जगतगुरू शंकराचार्य जी ने जो कहा वह आलोचना नहीं बल्कि मार्गदर्शन है। हम पूर्ण रूप से शंकराचार्य की बात का समर्थन करते हैं। इस बैठक में मुख्य रूप से पं.नवल किशोर मिश्रा, डा. सुधीर भारद्वाज, अखिलेश मिश्रा, विष्णु शास्त्री, अवधेश शास्त्री, शम्भूनाथ दूबे, पंकज शुक्ला, शिवनारायण दूबे, योगेश दत्त शर्मा, देवानन्द तिवारी, राजेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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